सुतल निन्दसँ हमरा नै जानि किए उठबैत छल पड़ल देख हमरा नै जानि किए नोर बहबैत छल ।। भिर लागल एहि कोणसँ ओहि कोण तक […]
♦ रोशन जनकपुरी “आदमी त सोझ, इमान्दार आ कर्तव्यनिष्ठ छै सर १ आई तक कोनो आरोप नइँ लागल छलै । पता नइँ केना फँइस गेलै बेचारा […]
हम नहि बुझैत छी, अपनेकेँ आ हमराबीच मर्यादाक कोनो छाँह अछि । एहिद्वारे पुछैत छी अपनेसँ, ‘ई नाटक आएल कतएसँ ? ओहे अनपढ़ गबार देहातीक […]
♦ प्रा. डा. सुरेन्द्र लाभ आँखिमे ढ़बढ़बाएल नोर टघैर गेलैक ………….. । दहिन आँखिक टघरैत नोर बाम आँखिक टघरैत नोर सँ पुछलकै – ‘गे […]
♦ राजेश महतो चौबनिया मुस्कि मुस्कियाकऽ दिलके चिर देलियै अहाँ अइ करेजाकेँ करेजा बनी बड पीड़ देलियै अहाँ हम ठीक छली ओहने नुन रोटीए खाइबला रङ […]
♦ डा. विजय दत्त सुनु हे सखिया मोहि लेलक मनमोहना – २ सुनु हे सखिया …. कारे कारे नयना बा श्यामल वदनमा तिरछी नजर मारे लोचन […]
♦ राजन दास जनकपुरधाम मिथिलाक सांस्कृतिक, धार्मिक आ ऐतिहासिक केन्द्र अछि । ई नगरी मात्र नेपालक शान नहि, अपितु सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीपक गहना अछि । […]
♦ पूनम झा “मैथिली” कचरल सन जीनगी थकुचल छै मन पसिझल घवाह गत्र सत्ते खाेरनाठ सन । नुआं में चिप्पी बिन आंगी बदन कुहरैत हुकरैत सुन्नहट […]
….की हमर बेटी हमरे पद चिन्ह पर चलत, हृदयसँ नोरक बादलसन उठल ….नोर आँखिसँ बहएकेँ लेल शुरुए कएने छल की नर्स बेटीकेँ हमरा बगलमे सुता […]
नै निक लगै छल ककरो बोल, जखन सब कहै छल ओकरा छोर ।। तैयो आन्हर बैन कऽ डेग बढेलौँ दु आखर के प्रेम कि पेलौँ, […]
♦ राकेश कुमार झा ‘रसिक’ नरके वसमे करवाकहेतु श्रृंगार करितहु । प्रेमक आकुलता ह्दयमे छुपौने रहितहु । मंद मृदु मुस्कान सदिखन छिटतहु । पत्नीवनिक सुख […]
♦ अयोध्यानाथ चौधरी प्रियवर ! अहाँक ‘हैंगरमे टांगल कोट’ ओहिना अछि खाली गर्दाक एकटा मोट परत निश्चय जमि गेल छैक सर्बत्र ओकरा उतारि क’ झाड़बाक साहस […]