

नै निक लगै छल ककरो बोल,
जखन सब कहै छल ओकरा छोर ।।
तैयो आन्हर बैन कऽ डेग बढेलौँ
दु आखर के प्रेम कि पेलौँ,
ताहीमे संसार गमेलौँ ।।
लागल छल बरका मोहक रोग
जाइते ओकरा पैस गेल बिछोरक सोग ।।
कहलक सङी, मार मुझौसि ओ करै छौ झोल
सतरङी छै रुप ओकर अपन आँखि आबो खोल ।।
नहि माइन कऽ ककरो बात ई अपराध केलौँ
कि कहु , दु आखर प्रेम कि पेलौँ
ताही मे संसार गमेलौँ ।।
एहन देलक ओ धोखामे चोट कि भगेल हमर बुद्धी मोट
तहन कहि कऽ गेल सरुधुवा छौ तोरामे खोट ।।
मुदा कि करु ई समझ के,
जखन समयमे नै केलौँ होश ।।
छल अपने गलती सभ तऽ ककरा दियै दोष
तएँ आब अपन मुँह पऽ आङुर धेलौँ
दु आखर के प्रेम कि पेलौँ
तहि मे संसार गमेलौँ ।।
