Breaking 
सप्तरीमा करेन्ट लागेर एक किसानको मृत्यु | सर्लाहीको बलरामा चक्कु प्रहारको घटना, ३ जना घाइते | मोडेल कलेजले पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालयबाट पायो बीआइटी सञ्चालनका लागि सम्बन्धन | आणविक बमकेँ दंश झेलएबला एक मात्र देश ‘जापान’ | बंगलादेशको अन्तरिम सरकारद्वारा फेब्रुअरी २०२६मा राष्ट्रिय चुनाव गर्ने घोषणा | बिहिबार सुनको मूल्य स्थिर | सिन्धुलीमा युवकको मिर्गौला निकालिएको घटनामा एकजना पक्राउ | धनुषाको दुहवीमा सशस्त्र प्रहरी र तस्करबीच झडप, चार राउन्ड हवाई फायर | भारतीय विदेश सचिव भदौ १ मा काठमाडौं आउँदै | घानामा सैन्य हेलिकप्टर दुर्घटना हुँदा २ मन्त्रीसहित ८ जनाको मृत्यु |

मैथिली कविताः दूआखर के प्रेम कि पेलौँ, ताहि मे संसार गमेलौँ





नै निक लगै छल ककरो बोल,
जखन सब कहै छल ओकरा छोर ।।
तैयो आन्हर बैन कऽ डेग बढेलौँ
दु आखर के प्रेम कि पेलौँ,
ताहीमे संसार गमेलौँ ।।

लागल छल बरका मोहक रोग
जाइते ओकरा पैस गेल बिछोरक सोग ।।
कहलक सङी, मार मुझौसि ओ करै छौ झोल
सतरङी छै रुप ओकर अपन आँखि आबो खोल ।।
नहि माइन कऽ ककरो बात ई अपराध केलौँ
कि कहु , दु आखर प्रेम कि पेलौँ
ताही मे संसार गमेलौँ ।।

एहन देलक ओ धोखामे चोट कि भगेल हमर बुद्धी मोट
तहन कहि कऽ गेल सरुधुवा छौ तोरामे खोट ।।
मुदा कि करु ई समझ के,
जखन समयमे नै केलौँ होश ।।
छल अपने गलती सभ तऽ ककरा दियै दोष
तएँ आब अपन मुँह पऽ आङुर धेलौँ
दु आखर के प्रेम कि पेलौँ
तहि मे संसार गमेलौँ ।।