Breaking 
सप्तरीमा करेन्ट लागेर एक किसानको मृत्यु | सर्लाहीको बलरामा चक्कु प्रहारको घटना, ३ जना घाइते | मोडेल कलेजले पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालयबाट पायो बीआइटी सञ्चालनका लागि सम्बन्धन | आणविक बमकेँ दंश झेलएबला एक मात्र देश ‘जापान’ | बंगलादेशको अन्तरिम सरकारद्वारा फेब्रुअरी २०२६मा राष्ट्रिय चुनाव गर्ने घोषणा | बिहिबार सुनको मूल्य स्थिर | सिन्धुलीमा युवकको मिर्गौला निकालिएको घटनामा एकजना पक्राउ | धनुषाको दुहवीमा सशस्त्र प्रहरी र तस्करबीच झडप, चार राउन्ड हवाई फायर | भारतीय विदेश सचिव भदौ १ मा काठमाडौं आउँदै | घानामा सैन्य हेलिकप्टर दुर्घटना हुँदा २ मन्त्रीसहित ८ जनाको मृत्यु |

मैथिली कथाः संसारक रीत





….की हमर बेटी हमरे पद चिन्ह पर चलत, हृदयसँ नोरक बादलसन उठल ….नोर आँखिसँ बहएकेँ लेल शुरुए कएने छल की नर्स बेटीकेँ हमरा बगलमे सुता देलक । हम ओकर मोहनी मुहँ देखलहुँ, धड़कैत हृदयकेँ शान्ति भेटल ई कोन नव बात अछि ! ई तऽ संसारक रीत अछि …., हम स्वयंकेँ धैर्य बान्हलहुँ आ छोटसन जानकेँ छातीसँ लगा लेलहुँ ।

 सुजीत कुमार झा

सखीसभ पयर हाथमे अलता लगा देलीह । हम सिन्दुरसँ सीत भरि लेलहुँ । हमरा गहनासँ लादि देल गेल आ हम कनियाँ बनि गेलहुँ । आँगनमे महिलासभ गीत गाबि रहल छलीह । ई गीतसभ हमर हृदयमे सूर्यक किरण जकाँ चमकि–चमकि कऽ उतरि रहल छल । सत्य ई छल जे हम बहुत प्रशन्न रही । सिंगार भऽ गेल तऽ सखीमेसँ किओ आवाज देलक, ‘किओ जा कऽ बाहर कहि दौक कनियाँ तैयार भऽ गेल, जिनका सुन्दर मुहँ देखबाक होइक ओ भीतर आबि जाए ।’
सखीक बातमे हँस्सी मजाक भाव सेहो छल । हमर मुहँ लाज आ प्रशन्नतासँ लाल भऽ गेल । नहि जाइन कतेको महिला हमर चानसन चेहरा देखलीह, चुमाओन कएलीह, आशिर्वाद देलीह आ रुमसँ बाहर निकलि गेलीह । अन्तमे रुममे पयरक उदास चाप उभरल । बुढ़ हात हमर घोघकेँ उपर उठौलक, हमर श्वास रुकि गेल, ई तऽ माय अछि ।
माय, हमर प्रिय माय ….! हमर मुहँसँ कतेको शब्द प्रेम बनि कऽ उभरल मुदा हमरा लागल नोरक आगा हम बेबस छी । हम एकटक ओकरा देखैत रहि गेलहुँ । ई एतेक बुढ़ कोना भऽ गेल ? चेहरा पर दुःखक छाप किए अछि ? आँखि एतेक किए धैसि गेल अछि ? हमर हृदयमे ककरो आवाज आएल, ‘ई तोहि छएँ जेकरा पालि पोसि कऽ बड़का कएलहुँ राति कऽ जागि–जागि कऽ सुतेलिऔक स्वयं भुखल रहि कऽ तोरा पेट भड़लिऔक, अपन आरामकेँ आराम नहि बुझि दुःखकेँ दुःख नहि बुझि, पूरे २६ वर्ष अपन खुशी, अपन श्वास, अपन अनुभवकेँ तोरा पर न्योछावर कएलिऔ आ आइ तो एकटा दोसरकेँ घर बसाबए जा रहल छएँ की एही दिनक लेल माय कठोर यातना सहैत अछि ।’
एकटा महिलाक आवाज आएल, ‘कानू नहि बहिन ई तऽ संसारक रीत अछि, लड़कीकेँ पालू पोसू आ दोसरकेँ दऽ दिअ ।’
शायद इहे स्वरमे किओ मायकेँ सांतवना दऽ रहल छल । मुदा सांतवना एहन छल, जाहिमे कनाबहेकेँ क्षमता बेसी देखाई दऽ रहल छल ।
मायक स्थिरे–स्थिरक सिसकी आब कोनो रोकाबटकेँ उच्च भऽ रहल छल आ घर पूरा पूर विचलित कऽ रहल छल ।
पिया मिलनक रंगीन आ प्रेमपूर्ण अभिलाषा हमर आँखिसँ नोर बनि कऽ बहि रहल छल । हम बिसरि गेलहुँ जे हम सिंगार एहि लेल कएने छलहुँ, ककरो संसारमे प्रशन्नता भरि देब । आब हम ई स्मरण कऽ सिसैकि रहल छलहुँ जे बुढ़ आँखिमे नोर दऽ कऽ जा रहल छी । ई अनुभव हमर हृदयकेँ मसोरि कऽ राखि देने छल । हम जे कदम उठाएब ओ जमीन पर नहि, मायक टुटल टुक्रा पर पड़त ।
मायद्वारा उठाओल गेल हरेक कठिनाई, हरेक दुःख, हरेक क्षण भगजोगनी जकाँ चमकैत हमर कल्पनाक आँखिक आगासँ घुमए लागल । हमर अस्तित्व नोरसँ बहए लागल, मुदा मजगुत हाथ हमर कन्हा पकैडि़ कऽ छातीसँ लगा लेलक, ‘कानु नहि माधुरी एहि दिनक लेल तऽ हम जीब रहल छलहुँ, अहाँकेँ अपन घर जाइत देखि सकी । एकटा मायकेँ एहिसँ बड़का आओर की इच्छा भऽ सकैत अछि ओकर बच्चाकेँ घर बैसि जाए ।’ ‘हम बहुत प्रशन्न छी बेटी, तोरा ई सुख प्राप्त भऽ रहल छौक,’ शब्द सिसकी बीच टुटि रहल छल । मुदा ओ हमर धैर्यताक लेल कहि रहल छल ।
‘तो ई नहि बुझ हम तोरासँ छुटि गेल छिऔक । माँ बेटीक सम्बन्ध कोना समाप्त भऽ सकैत अछि । ई घर एखनो तोहर छौक जखन मोन हौक चलि आ ।’
ओ नहि जानि की–की कहैत रहल मात्र हमरा एतेक स्मरण अछि जे हम चिचिआ कऽ ओकरा लेपटा लेलहुँ, ‘माय हम तोरा बीना नहि रहि सकैत छिऔक । हम कतहुँ नहि जएबौक, हमरा अपना लग रहए दे माय ।’
समय हरेक घाउकेँ भरि दैत अछि । आश्चर्य भेल द्विरागमनक समय हम कोना जोड़सँ कानल रही । हमरा विश्वास छल, मायकेँ बीना एक क्षण सेहो नहि बीता सकैत छी । आब एतए १५ दिन बीत गेल आ मायकेँ स्मरणो नहि कएलहुँ, ई सोचिते हम स्वयंकेँ दोषी अनुभव करए लगलहुँ । कण्ठमे एकटा गोला आबि कऽ फैसि गेल । हम मोन बहलाबए चाहलहुँ मुदा नहि बहलल । हमरा उदास देखि ओहि साँझ ओ हमरा घुमाबए शहरसँ दूर लऽ गेलथि आ हम बिसरि गेलहुँ कतेक उदास छलहुँ । पार्कमे फुल फुलाएल छल मुहँबन्द चिड़ैसभ झुलि रहल छल । पूरे माहौलमे सुगन्ध आ प्रशन्नता भड़ल छल । एहन क्षणमे केँ दुःखक गीत गाबि कऽ बैसत ?
एक महिनाक बाद मायकेँ एकटा चिठ्ठी आएल हमर कुशलता पुछने छल । चिठ्ठी नहि लिखएकेँ लेल कनि शिकायत कएने छल । ओ इहो अनुभव नहि होबए देलक हमर आभाव खटैकि रहल छैक । मुदा चिठ्ठीक अन्तिममे ओ स्वयंपर नियन्त्रण नहि राखि सकल । ओकर धैर्यक बान्ह टुटि गेल । ‘…बेटी जानकीजी तोरा खुश राखौक । अपन बात की लिखिऔक ई लगैत अछि अपन प्रिय चीज हेरा गेल अछि । हृदयमे स्थायी बिकलता अछि मुदा तो चिन्ता नहि कर….अपन जीवनकेँ बढि़या बनो ।’
चिठ्ठी हाथमे लऽ हम कतेको देर बैसल रहलहुँ किछु बुझएमे नहि आबि रहल छल की करु ? एकबेर तऽ निश्चय कऽ लेलहुँ सभ छोडि़कऽ नैहरि चलि जाउ मुदा ओहि क्षण अनुभव भेल जे २६ बर्षक तुलनाक ई सम्बन्ध बेसी मजगुत सावित भऽ रहल अछि । जाएकेँ मोने नहि भेल । हमरा स्वयंपर तामस आएल जे किओ अपन मायकेँ एतेक जल्दी बिसरि सकैत अछि ? हम कानए लगलहुँ ।
हमर कानएकेँ आवाज सुनि कऽ ओ बाहरसँ भीतर अएलाह । हमरा लग आबिकऽ बजला, ‘अहाँ कनैत छी ? की बात अछि,’ फेर हमर हाथमे नोरसँ भीजल चिठ्ठी देखि कऽ बजला, ‘ओ ई तँ माँजीकेँ चिठ्ठी अछि । एहिमे कानएकेँ की बात भेल । माँजीसँ भेटएकेँ मोन अछि, चलू ओतए पहुँचा दैत छी । आठ दश दिन रहि कऽ चलि आएब ।’
हमरा मुहँसँ नहि, हँ निकलल आने नहि अस्वीकार कऽ सकलहुँ ओ हमर सामान बन्हलन्हि आ भाइसँग बस स्टेण्ड पहुँचा देलाह । हम अपन दिअरसँग विदाह भऽ गेलहुँ ।
नहि–नहि हम नहि जाएब । हम अहाँक बीना एक दिन नहि काँटि सकैत छी, हम चिचिआकऽ कहएके प्रयास कएलहुँ मुदा एहि तरहक शब्द हमर ठोरसँ बाहर नहि निकलल । एतबए बेसी छल जे ओ हमर पूरे धैर्य लुटि लेलन्हि,‘ अहाँ जा रहल छी ….आब हमरा मेहदी भड़ल हाथसँ सुन्दरसन पान के खुआओत ?’
हृदय टुटएकेँ आवाज होइत तऽ ओहि आवाजसँ शायद संसारक कान फाटि जाइत मुदा आश्चर्य जे हृदय भीतरे–भीतर टुटल आ ककरो आवाज धरि नहि आएल । हमर नोर, हमर मुहँ धो देलक ….।
बस धीरे–धीरे बढ़ए लागल, जेना हमरे जकाँ ओकरो मोन आगा जाएकेँ पक्षमे नहि छल ….।
नैहरिमे दिन एना बीत रहल छल, जेना जीवनमे किछु बाँकीए नहि रहि गेल अछि । जीवन डाकक आवाज पर निर्भर रहि गेल छल । कोनो काजमे मोने नहि लगैत छल । बातो करएकेँ मोन नहि करैत छल । भोजन धरिसँ घृणा भऽ गेल छल ।
हृदय हरेक क्षण कहैत छल, ‘पाँखि लागि जाए आ हम उडि़ जाइ ।’
एकदिन काकी एलीह तऽ हमरा एकटा अलग रहस्यक पता चलल । काकी बजलीह, ‘बेटी एना उदास रहब तऽ स्वास्थ्य कोना बढि़या रहतह ? तो तऽ मात्र पतिकेँ भऽ कऽ रहि गेल छह । बिसरि गेल छअ कहिओ तो एहि घरक सदस्य छलह ।’
हम हाँसि कऽ टारए चाहलहुँ मुदा ओ कहैत रहलीह, ‘जानकीजी चाहतह तऽ तोहू माँ बनबह आ तोड़ा पता चलतह जे सन्तानक दूरी की होइत अछि । बेटीकेँ सभ दिन बैसा कऽ नहि राखि सकबह । अपन माय दिस देखऽ केहन भऽ गेल छथि ?’
हमरा बुझएमे किछु नहि आबि रहल छल, काकी कहए की चाहैत छथि ? मायकेँ उदासी आ स्वास्थ्यक खराबीमे हमर की हाथ अछि ? हम प्रश्नवाचक ढंगसँ देखलहुँ । ओ कहि रहल छलीह, ‘सासुरमे तऽ आब तोड़ा सभ दिन रहबाक छह, किछु दिनक लेल एतए आएल छह तऽ प्रशन्न रहअ नहि तऽ माँकेँ कतेक दुःख पहुँचतह….।’
हम लञ्जित भऽ कऽ स्वीकार कएलहुँ, ‘की करु काकी मोन एतेक सुस्त भऽ गेल अछि, कोनो काज करएकेँ मोने नहि होइत अछि ।’
ओ बिहुँसली, ‘पहिल बेर माय बनए जा रहल छह, एहिद्वारे एना भऽ रहल छह । सम्हारह स्वयंकेँ, नहि तऽ तोहर पतिकेँ शिकायत हेतह जे हुनकर कनियाँकेँ हमसभ बेमार कऽ देलहुँ ।’
जीवन बहार बनि कऽ जहिना हमरा कोरामे लऽ लेने छल । हम माय बनि रहल छी, हम बहुत अविश्वसनीय मुद्रामे सोचलहुँ । प्रशन्नता लाज आ गर्वक मिलल जुलल भावनासँ हमर हृदय भडि़ गेल । मुदा फेर भय आबि कऽ पकडि़ लेलक, लड़की भेल तऽ ? की ओहो हमरा छोडि़ कऽ चलि जाएत मुदा हृृदयमे एकटा बात आएल ई तऽ संसारक परम्परा अछि । एहिना होइत अछि, एककेँ स्थान दोसर लैत अछि । एहिमे डेराएकेँ कोन बात….?
किछु दिन नैहरिमे बितेलाकबाद सासुर चलि अएलहुँ । दिन जेना पाँखि बनि कऽ उड़ए लागल । २४ घण्टाक इहे दिनराति नैहरिमे कतेक अबेरसँ बितैत छल आ एतए इहे २४ घण्टा चमकैत भगजोगनी जकाँ उतरि जाइत अछि । आओरकेँ तऽ छोडू, हम तऽ स्वयंकेँ बिसरि गेल छी । मायकेँ चिठ्ठी अबैत रहल । जाहि दिन चिठ्ठी आबए किछु क्षणक लेल हृदयमे गरए मुदा एकटा बुढ़ जीवन हमरा जीजानसँ स्मरण कऽ रहल छल आ हम कोन उचाईकेँ आशामे हेराएल रहैत छी । हम घबराइत प्रार्थना करए लगैत छी, ‘हे भगवती हमरा लड़की नहि चाही, जे हमरा छोडि़ कऽ चलि जाए आ फेर बिसरि जाए । हम दूरी नहि सहि पाएब एहिद्वारे हमरा बेटी नहि देब ।’
किछु महिना बीतलाक बाद माय हमरा फेर बजौलक एहिबेर ओहो हमरासँग छलाह । हमरा हुनकर सामिप्य आ सँग चाहैत छल । आब हम किए उदास रहितहुँ ? माय हमर रेखदेखमे कोनो कसर नहि छोड़लक । शहरक सभसँ कुशल गाइनोक्लोजिष्टसँ देखौलक । चलैत फिरैत, उठैत बैसैत, सुतैत जगैत ओ हमरा निहारैत रहैत छल आ ई प्रार्थना जेना ओकर जीवनकेँ अंग बनि कऽ रहि गेल छल । भगवती एकरा कुशलताकसँग एकटा बेटा देब…., शायद ओहो ई कथाकेँ दोहराबएकेँ देखए नहि चाहैत छल ।
किछु दिन आओर बीतल हमरा अस्पताल लऽ जाएल गेल । ओ गेटक बाहर चिन्तित भऽ ठाढ़ छलाह । माय माथ लग ठाढ़ भऽ प्रार्थना कऽ रहल छल नहि जानि कतहुँसँ एकटा आवाज आएल हमरा पयरक नीचा स्वर्गक निर्माणक समाचार सुनाएल । माय आगा बढ़ल । नर्ससभ बाजल, ‘बेटी भेल अछि, बधाई हो ।’
माय हमरा पलैट कऽ देखलक विचित्र भय हमरा दबा लेलक । ई माय जे आइ एहि तरहे असहाय भऽ हमर आगा ठाढ़ अछि जे अपन चयन खुशी आ पूरे जीवन हमरा दऽ देलक समय फेर ओहि कथाकेँ दोहराओत की ? आबएबला बर्ष ओहि तरहे हमर जीवनकेँ रस निचोडि़ लेत ? हम सोचलहुँ ….की हमर बेटी हमरे पद चिन्ह पर चलत, हृदयसँ नोरक बादलसन उठल ….नोर आँखिसँ बहएकेँ लेल शुरुए कएने छल की नर्स बेटीकेँ हमरा बगलमे सुता देलक । हम ओकर मोहनी मुहँ देखलहुँ, धड़कैत हृदयकेँ शान्ति भेटल ई कोन नव बात अछि ! ई तऽ संसारक रीत अछि …., हम स्वयंकेँ धैर्य बान्हलहुँ आ छोटसन जानकेँ छातीसँ लगा लेलहुँ ।