♦ विभूति आनन्द – ‘एना उदास किए छी ?’ – ‘न:, उदास कहां छी !’ – ‘तऽ आब झूठ बाजब सेहो सीख गेलिऐ ?’ – ‘नै […]
♦ हरिमोहन झा खट्टर कका दलान पर बैसल भाङ्ग घोटैत छलाह । हमरा अबैत देखि बजलाह – हॅं!- हॅं;….ओम्हर मिरचाइ रोपल छैक, घूमि कऽ आबह। […]
लक्ष्मी प्रसाद रिजाल मैले सानो उमेरमा देखेका सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्वहरू गाउँका शिक्षकहरू थिए । उनीहरूको बहुआयामिक व्यक्तित्वबाट मेरा हजुरबा पनि प्रभावित हुनुहुन्थ्यो । उहाँले दसैँमा आशीष […]
♦ सुजीत कुमार झा ‘काठमाण्डूक लोक बहुत ठग होइत अछि ने अंकल ?’ प्राची पुछलक । शायद हम ओकरा कहि पबितहुँ, नहि बेटी मनुष्य सभठाम सामान […]
१. हिंसा टी भीसँ समाचार द’ रहल छलैक – ‘ अ्मेरिकामे एकटा स्कुली छात्रद्वारा गोली चलाओल गेल … ‘ हमरा लगे मे बैसल पाँच […]
♦ जगदीश प्रसाद मण्डल चल रे जीवन चलिते चल। संगी बनि तूँ संगे चल जौवन चल जुआनी चल जिनगानी संग मर्दगानी चल चिन्तन संग चिणमय चल। […]
♦ राजन दास । धनुषा पृथ्वीपर सब किछु सब ठाम भेटत मुदा जन्मदेबएवला माँ भेटबाक कोनो उपाय नहि । हृदयक टुकड़ी निकालि आँखिमे चिपका दैत छथि […]
♦लक्ष्मी रिजाल जलेश्वर निवासी शमीमुद्दीन अन्सारी मैले जीवनमा बिर्सिनै नसक्ने,बिर्सिनै नहुने नाम हो । मैले हृदयबाट सम्मान गर्ने थोरै पात्रहरूमध्ये शमीमुद्दीन पनि अग्र पंक्तिमा पर्नुहुन्छ […]
♦ रोशन जनकपुरी १- गान्धीमार्ग मन नइँ मानलकै । ओ एकटा जोगीजी स पुछिए देलकै – “महाराज ! वैष्णव जन तो तेने कहिए, पीर पराई जाने […]
♦ सुजीत कुमार झा महेश रजक मंदबुद्धिक छल । अपन मनक बात व्यक्त करबो करितए तइओ कोना ? जखन बुझहीमे ओकरा किछु नहि अबैत छल । […]
♦ रमण कुमार सिंह 1 राजा हमर सपनाक शिकार करैत अछि अफसर हमरा विरोध मे ठाढ़ अछि दियाद-बाद दालि जकाँ हमर गलबाक करैत अछि प्रतीक्षा […]
♦ विभूति आनन्द वैभव कें एक दिन गाम मोन पड़ि अयलै । ओ नाॅस्टैजिक होबऽ लागल । फेर नेनपन आ किशोरपन मोन पड़ि अयलै । आ […]