

♦ सुजीत कुमार झा
महेश रजक मंदबुद्धिक छल । अपन मनक बात व्यक्त करबो करितए तइओ कोना ? जखन बुझहीमे ओकरा किछु नहि अबैत छल ।
लोकक तिरस्कृत नजरिकेँ झेलैत होइत हम आब दोसराक हाथक कठपुतली मात्र रहि गेल छलहुँ । पिताक गलतीक कारणे हम मंदबुद्धि बालक जन्म लेने छलहुँ । जखन हम माएक गर्भमे रही तऽ हमर माएक पूरे भोजन नहि भेटैत छल । ओकरा हमर पिता ई कहिकऽ मानसिक यन्त्रणा दैत छलाह, हुनक जन्मपत्रीमे लिखल अछि हुनक पहिल बच्चा नहि जीबत । ओ गर्भपात करावए लेल बेर–बेर दबाब दैत रहला अही लेल हमर माए पितामे विवादो बढ़ल छल । ओना सभक जानकारीक लेल ओ बच्चा हमही छी । जे ३५ वर्षगांठ बिना कोनो समारोहकेँ मना चुकल छी ।
जन्म लेलाक बाद हम जण्डीस रोगसँ ग्रसित छलहुँ, मुदा हमरा इलाज नहि कराओल गेल । हमर माए बहुत सीधा छल । हमर पिता ओकरा पैसा नहि दैत छलाह, अपन मरजीसँ हमरा लेल किछु कऽ सकए । सभकिछु सहैत ओ भीतरसँ घुटैत रहैत छल । ओ जमाना एहने छल, जखन लड़की विवाहक बाद अपन सासुरसँ अर्थीएमे निकलैत छल । नैहरवला संग नहि दैत छल । नानी हमर माएके दुःखी देखि कऽ परेशान रहैत छल । मुदा परिवारक अन्य लोकक सहयोग नहि मिलएके कारण किछु नहि कऽ पएलक । हम दू सालक भऽ गेलहुँ, मुदा नहि बजैत छलहुँ, नहि चलैत छलहुँ । मात्र, गुड़कैत रहलहुँ ।
हमर माए क्षण–क्षण हमर ध्यान रखैत छल, आ हरेक समय हमरा कोरामे लेने रहैत छल । शायद ओ जीवनभरिक प्रेम दूसालमे देबए चाहैत छल । हमर जन्म भेलाक बाद हमर कार्यकलापमे प्रगति नहि देखि कऽ ओ बहुत बेसी मानसिक तनावमे रहए लागल छल, जकर परिणाम ई भेल जे कैंसर जेहन गम्भीर बीमारीक कारण ६ महीनेमे चैलि गेल । मुदा हम मंदबुद्धि बालक आ उमेर सेहो कम भेलाक कारण बुझि नहि पएलहुँ अपन जीवनमे आएल एहि भूकम्पके । शुन्य आँखिसँ माएके ताकि तऽ रहल छलहुँ, मुदा हमरा ककरोसँ पूछएके लेल शब्दक ज्ञाने नहि छल ।
हमरा बढि़या जकाँ स्मरण अछि जखन हमर माएकेँ क्रियाकर्म कऽ कऽ हमर मामा आ नाना बिरगंज घूरला तऽ हमरा एकबेर ओ कोरामे लेलन्हि, मुदा हमर कोनो प्रतिक्रिया नहि देखि कऽ किओ गोटे हमर परवाह नहि कएलन्हि । मात्र, हमर नानी हमरासँ बहुत देरधरि चिपकल रहल । पिता एहनो भऽ सकैत अछि कल्पना नहि कएल जा सकैत अछि, हमर कोनो मतलब नहि हुनका छल । माए अन्तिम समयमे हमर जिम्मेदारी ककरो नहि देलक । हमर पालबकेँ समस्या छल, कोनो विकल्प नहि देखल जा रहल छल । नानानानी हमरा अपना लग राखएके निर्णय लेलन्हि । हुनक कहब छल जे हमर माए जकाँ हमर पापा हमरो यंत्रणा दऽ कऽ मारि देता । ओ विसरल नहि छलाह जे हमर माए हुनको बतौने छलन्हि जे हमरा गलतीओसँ कहिओ कोरामे नहि उठौने छलाह ।
एकर पाछाँ हुनक कि मानसिकता छल, शायद ओ एकटा जन्मपत्रीक बात सत्य साबित कऽ कऽ अपन अहं संतुष्ट करएकँे प्रयास कऽ रहल छलाह । कनी विवाद विवाहेके समयसँ शुरु भेल छल, जे दहेजक रुपमे समानसभ लेबए चाहैत छलाह ओ पूरा नहि भेलन्हि, फेर ई जन्मपत्री सेहो समस्या बनि गेल ।
ओ हमरा कहिओ लेबए सेहो नहि अएलाह । माएकेँ मृत्युक ६ महिनाक बाद ओ दोसर विवाह कऽ लेलन्हि । ओ हमरा लेल विडम्बने छल जे हमरा माएकेँ स्थान पर दोसर माए नहि भेटल, मुदा हमर पिताकँे दोसर कनियाँ भेटएमे अबेर नहि भेल । पिताक रहति हम अनाथ भऽ गेलहुँ । हम मंदबुद्धि छलहुँ, एहिद्वारे हमर नानानानी हमरा पालएमे बहुत शारीरिक, मानसिक आ आर्थिक कष्ट सहलथि । शारीरिक एहिद्वारे जे मंदबुद्धि भेलाक कारण १५ वर्षधरि लघु आ दीर्घशंकाक ज्ञाने नहि छल, कपड़ामे स्वयं भऽ जाइत छल आ ओकरा नानीकँे साफ करए पड़ैत छल ।
रातिमे ओछायन भीज गेलाक कारण नानी राति कऽ उठि ओछायन बदलैत छल । ढलैत उमेरक कारण हमर नानानानी शारीरिक आ मानसिक रूपसँ बहुत कमजोर भऽ गेल छल । मुदा मोहवश ओ हमर बहुत ध्यान रखैत छल । हम स्कूल असगरे नहि जा पबैत छलहुँ, एहिद्वारे हमर नाना हमरा स्कूलधरि छोड़ए जाइत छलाह । हमरा ऐहन स्कूलमे पठौलन्हि जतए सभ बच्चा हमरा जकाँ छल । मुदा ओतहुँ साथीसभ हमरा मजाक उड़ौलक । जाहि कारण पढ़ाइके निरन्तरता नहि दऽ सकलहुँ ।
नानानानी बहुत मानसिक कष्ट सहलन्हि । हमर मंदबुद्धि होबएकँे कारण नानानानी कतहुँ हमरा लऽ कऽ जाइत छल तऽ लोक बहुत हासपरिहास करैत छल । परिस्थितिके नजरअन्दाज करैत हमर असामान्य व्यवहारकेँ देखि कऽ हुनकासभके उलहन देबए लगैत छल । ओहिसँ हुनकसभक मन बहुत व्यथित होइत छल । फेर ओ हमरा कतहुँ लऽ कऽ जाएमे कतराए लागल । हुनक अपन बच्चा हमर कारण हुनकासँ बहुत दूरी बना लेने छल ।
कतेक करकुटुम्ब तऽ एतेकधरि सलाह देलन्हि जे हमरा अनाथाश्रममे किए नहि राखि दैत छथि ? नानानानीके ई सूनि कऽ बहुत दुःख होइत छल । कतेक बेर किओ घर अबैत छल त नानी भिजल ओछायनके जल्दीसँ झापि दैत छल, जाहिसँ हुनक नकारात्मक प्रतिक्रियाक दंश हुनका झेलए नहि पड़ए । हम शारीरिक रूपसँ बहुत तन्दुरुस्त छलहुँ । मस्तिष्कक उपयोग नहि भेलाक कारण ताकत सेहो बहुत छल, भीतरे–भीतरे अपन कमीकेँ बुझैत पूरे आक्रोश अपन नानीपर निकालैत छलहुँ । कहिओ ओकर केश खीचैतत छलहुँ, कहिओ ओकरापर पानि राखि दैत छलहुँ आ कहिओ ओकर कोरामे माथ पटकि कऽ ओकरा तकलीफ पहुँचबैत छलहुँ । मातापिताकेँ नहि रहलासँ हुनक अनुशासनके बिना हम बहुत जिद्दी सेहो भऽ गेलहुँ । हम अपन नानीकेँ बहुत दुःख देलहुँ ।
मुदा एहिमे हमर कोनो गलती नहि छल कारण हम मंदबुद्धि बालक छलहुँ । नानानानी आर्थिक कष्ट सहलन्हि, एहिप्रकार जे हमर पूरे खर्च हमर पेन्शनधारी नानापर आबि गेल छल । कतहुँसँ हुनका सहयोग नहि भेटैत छल । ओ हमर बढि़यासँ बढि़या डाक्टरसँ इलाज करावएके इच्छा रखैत छलाह मुदा पैसाक अभावमे बहुत किछु नहि कऽ सकला । तखन छोट–छोट चीजक कमी महसूस होबए नहि देबए ओसभ प्रयास करैत रहैत छला । नानी हमर भविष्यके लऽ कऽ बहुत चिन्तित रहैत छल आ हमरे कारण मानसिक आघात सहैत–सहैत थाकि कऽ असमये ६५ वर्षक उमेरमे सदाक लेल विदा भऽ गेल । ओहि समय हमर उमेर १५ वर्षक रहल हएत । एखनधरि मानसिक आ शारीरिक रूपसँ हम बहुत ठीक भऽ गेल छलहुँ । अपन व्यक्तिगत कार्य करए लेल आत्मनिर्भर भऽ गेल छलहुँ । मुदा भावाभिव्यक्ति सही तरिकासँ सही भाषामे नहि कऽ पबैत छलहुँ । टूटलफूटल आ कतेकबेर निरर्थक भाषे बाजि पबैत छलहुँ ।
हमर जीवनक एहि दोसर त्रासदीके सेहो नहि बुझि पएलहुँ आ नहि परिवारक लोकक आगाँ अभिव्यक्त कऽ पएलहुँ, एहिद्वारे नानीके मृत्यु पर आएल परिवारक अन्य लोकके हमरासँ कोनो सहानुभूति नहि छल । ओना, अखन नाना जीबैत छलाह, हमरा पालनपोषणक लेल । श्राद्धक औपचारिकता पूरा कऽ कऽ सभ अपना घर घूरि गेल । नाना हमरा बहुत स्नेह देलन्हि । हुनक अन्य बच्चाके धियापुताके हमरासँ ईष्र्या सेहो होइत छल जे हुनक भागक प्रेम सेहो हमरे भेट रहल अछि । मुदा ओकरासभके तऽ मातापिता सेहो छल, हम तऽ अनाथ छलहुँ । हमर मंदबुद्धिक कारण यदि किओ हमरा मजाक उड़बैत छल तऽ नाना ओकरापर बहुत तमसाइत छलाह, मुदा कहिआधरि ? ओहो हमरा छोडि़कऽ संसारसँ विदा भऽ गेलाह । ओहि समय हम १८ सालक छलहुँ, मुदा परिस्थिति पर हमर प्रतिक्रिया पहिने जकाँ नहि छल । हमर सभकिछु लुटि चुकल छल आ हम कानिओे नहि पाबि रहल छलहुँ । मात्र, एकटा एहसास छल जे नाना आब एहि संसारमे नहि छथि । एतेक हमर भीतर बुद्धि नहि छल जे हम अपन भविष्यक चिन्ता कऽ सकितहुँ । हमरा तऽ जन्मे कतेक हाथक कठपुतली बना कऽ कएल गेल छल । मुदा एखनधरि हम ऐहन हाथक संरक्षणमे छलहुँ, जे हमरा एहि लायक बना देने छल ।
हम शारीरिक रूपसँ बहुत सक्षम आ ककरोपर निर्भर नहि छलहुँ आ कोनो कार्य, जाहिमे बुद्धिक आवश्यकता नहि हुए, चुटकीमे कऽ दैत छलहुँ । ओना, जे व्यक्ति दिमागसँ काज नहि करैत अछि, शारीरिक रूपसँ अधिक ताकतवला होइत अछि । हमर मनोस्थिति बिलकुल दू सालक बच्चा जकाँ छल, जे ओकरासंग कि भऽ रहल अछि, ओकरा लेल कि बढि़या अछि, कि खराब अछि, बुझही नहि पबैत छलहुँ । मुदा हमर स्मरण शक्ति कहिओकाल काज लगैत छल । गाड़ीक नम्बर, फोन नम्बर तथा ककरो घर कोन स्थान पर अछि । ई बात हम कहिओ बिसरति नहि छलहुँ । कहलापर हम कोनो शारीरिक कार्य कऽ सकैत छलहुँ, मुदा अपना मनसँ किछु नहि कऽ पबैत छलहुँ । नानाक अवस्था गम्भीर भेलापर हम अपन पड़ोसक एकटा आन्टीक कहलापर अपन मौसीके फोनसँ सूचना देलहुँ तऽ ओ धरफराकऽ अएलथि । हमर दूटा मामा आ मौसी पहुँच गेलथि आ नानाक अस्पतालमे भरती कऽ देलन्हि । डाक्टर देखिते कहि देलन्हि हुनक अन्तिम समय आबि गेल अछि । हुनक क्रियाकर्म भेलाक बाद सभ घरक अलमारी खोलिकऽ तकलक । महत्वपूर्ण कागजपत्र निकालल गेल । सभक नजरि नानाक घरपर छल । ओ घर हमरा नामपर नानानानी राखि देने रहथि, मुदा ओहिसँ हमरा मतलब नहि छल । ओसभ कि कऽ रहल छलाह हम मूकदर्शक बनल सभ देखैत रहलहुँ । भरलपूरल घर छल । घर हमर नानाक छल । हमर एकटा मामाक नजरि हमर हृष्टपुष्ट शरीरपर टिक गेल ।
ओ हमर मंदबुद्धिक लाभ लऽ कऽ हमरा अपन मन पसिनक भोजनक चीज बजारसँ मंगबा कऽ देलन्हि आ बेर–बेर हमरा हुनकासंग इटहरी जाए लेल उकसाबैत रहला । हमरा स्मरण नहि अबैत अछि कहिओ ओ हमरासँ सीधामुँहसँ बातो कएने होइथि । तखन तऽ आओर हद भऽ गेल जखन एकबेर हम नानीक संग इटहरी हुनक घर गेल छलहुँ आ हमर असामान्य व्यवहारक लेल ओ नानीकेँ दोषी मानैत बहुत बात कहने रहथि । ओकरा मामाक बातसँ बहुत दूःख पहुँचल छल, जाहि कारण नानी निश्चित समयसँ पहिने बिरगंज घूरि गेल छल । आब हुनका अचानक एतेक प्रेम किए उमडि़ रहल अछि । ई सोचबाक बुद्धि हमरामे नहि अछि । एतेक सहयोग यदि नानीके पहिने भेटैत तऽ शायद ओ एतेक जल्दी हमरासभके छोडि़ कऽ नहि जाइत । पहिलबेर सभके ई विषय विचारणीय लागल जे आब हम ककरासंग रहब ? नानासँ सम्बन्धित काज पूरा होबएधरि हमर मामा हमरा एतेक ब्रेनवौश कऽ देलन्हि जे हम कतए रहए चाहैत छी ?
ककरो पुछलापर हम झटसँ बजैत छलहुँ, ‘हम इटहरी जाएब,’ नानाके कतेको चिन्हएवला मामाके कटाक्ष सेहो कएलन्हि जे कोना सभ समाप्त भेलाक बाद ओकरा आएब भेल । एहिसँ पहिने तऽ ओकरा वर्षोसँ कहिओ देखल नहि । एतेक सुनिते ‘चोरक दाढ़ीमे तिल’ कहाबतके सार्थक करैत हुनकासभपर मामा खूब बरसला । परिणाम ई भेल जे बहुत लोक कहुना नानाक श्राद्धक भोज खएलक । आखिर हम मामाक संग इटहरी पहुंच गेलहुँ । श्राद्धमे केश त कटा गेल छल तखन हमर दाढ़ी बहुत बड़का–बड़का भऽ गेल । सभसँ पहिने हमर मामा ओकरा सम्वारलए हमरा सैलून पठौलन्हि, फेर हमरा लेल नव कपड़ा किनलन्हि, जकरा पहिरकऽ हमर व्यक्तित्व बदैलि गेल । हमर मामाके फैक्ट्री छल, जकरा हम हुनक बेटाक काजमे हाथ बटावएके लेल जाए लगलहुँ । जखन हम नानीक संग एकबेर एतए आएल छलहुँ, तखन हमरा एहि फैक्ट्रीमे घुसएके अनुमति नहि छल । आब जखन हम शारीरिक श्रम करएके लाएक भऽ गेलहुँ तऽ हुनका लेल हमर माने बदलि गेल । फेर विरगंज शहरक ओ मूल्यवान घर सेहो छल ।
धीरे–धीरे हमरा बुझएमे आवए लागल जे हुनका हमरा एतए लाबएके उद्देश्य कि छल ? हम चुपचाप एकटा रोबोट जकाँ पूरे काज करैत छलहुँ । हमरा अपन इच्छा व्यक्त करएके तऽ कोनो अधिकारे नहि छल । विरगंजक जाहि घरमे हमर बाल्यपन बितल, ओहिमे तऽ हम कहिओ जा नहि सकैत छलहुँ कारण प्रौपर्टीक झगड़ाक कारण ओहिमे ताला लागि गेल छल । आ हमहूँ मामाक प्रौपर्टीभरि बैनि कऽ रहि गेल छलहुँ, जाहिमे कोनो बंटवाराक समस्या नहि छल । हुनके एकछत्र राज्य छल । हम अपन मनसँ किन्को लग जा नहि सकैत छलहुँ, नहि ककरो हमरा बजावएके अधिकारे छल । हमर जीवन टुकड़ामे बंटिकऽ रहि गेल छल ।
हमरा अपन कोनो अस्तित्व नहि छल । हम अपन आक्रोश प्रकट करबो करितहुँ तऽ ककर आगा करितहुँ । किओ नानानानी जकाँ हमर भावनाक बुझएवला नहि छल । हम तऽ एहि लायक सेहो नहि छलहुँ जे अपन पितासँ पुछीतहुँ जे हमर एहि प्रकारक टुकड़ामे बचल जिवनक उत्तरदायी के अछि ? हुनक सभक कि अधिकार छल हमरा जन्म देबाक ? हमर माए अन्तिम समयमे, हमर पिताक दिस इशारा करैत कनैत मामासँ कहि रहल छल, ‘ई हमरा बीमारी देलक अछि, एकरा मारु ।’ मुदा प्रतिक्रिया स्वरूप किओ किछु नहि कएलक, करैत तऽ तखन जखन हुनकासभके हमर माएसँ प्रेम होइत । हमरा एतेक बुद्धि होइत जे अपन माएके बदला अपन पितासँ लैतहुँ । मुदा ऐहनो किओ होइत जे हमर बदला अवश्य लेैत । जकरा लग बुद्धि अछि कहिओकाल कहएकेँ मनमे होइत रहैत अछि । हमर कथाक शब्दक कपड़ा पहिरावएवलाके धन्यवाद, कमसँ कम हुनका हमरासँ किछु सहानुभूति तऽ अछि, जकर कारण हमरा मन्दबुद्धि बालक, जकरा शब्दमे अभिव्यक्ति नहि अबैत अछि, मूकभाषा तथा भावनाकेँ बुझिकऽ ओकर आत्मकथाक कलमबद्ध कऽ कऽ लोकक आगाँ उजागर तऽ कएलक ।
