

पत्रिका चन्दाकेँ एकटा अति महत्वकांक्षी, कुटिल आ चलाक पत्रकारक रुपमे प्रस्तुत कऽ रहल छल ओ पैसा आ पाबरक लेल किछु कऽ सकैत छलीह ।
हम चिचिया—चिचिया कऽ कहए चाहि रहल छलहुँ जे जाहि चन्दाक विषयमे तोँ सभ बात कऽ रहल छँए ओ एहन नहि छलीह । हुनक भीतर हृदय छल । सभक लेल किछु करवाक ईच्छा छल । हमर छोट बहिन चन्दु छलीह ओ ।
♦ सुजीतकुमार झा
भोरमे अखबार देखि हम किछु देरक लेल बिचलित भऽ गेलहुँ । पहिले पृष्ठ पर सभसँ उपर बड़का समाचार छल–पत्रकार चन्दा मण्डलक हत्या ।
हमर माथ घूमए लागल । ई तऽ उएह छलीह …..चन्दा । मुदा मोन मानए लेल तैयार नहि छल । चन्दा एहि तरहे, नहि मरि सकैत छलीह । मुदा समाचार पढ़लाक बाद कोनो संशय नहि रहि गेल छल जे ओ उएह चन्दा मण्डल छथि, जकरा संग हम तीन सालधरि गल्र्स होस्टलमे रुम शेयर कएने छलहुँ । हमरासँ करीब तीन साल छोट छलीह चन्दा । हम बीए फाइनलमे छलहुँ आ ओ प्रथम वर्षमे नामांकन करौने छलीह । उचाईमे कनी छोट छलीह । मुदा पहिल नजरिमे हुनका किओ नजरअन्दाज नहि कऽ सकैत छल । गोर रंग बड़का आँखि, डाँरधरि केश ।
हमरासँ ओ कैन्टीनमे भेटल छलीह । वार्डन परिचय करौलन्हि, ‘ममता ई छथि चन्दा । अहाँक रुममे रहती, हम एहि साल हरेक जूनियरक संग एकटा सीनियर लगा रहल छी ।’
हम ठीक छैक बला मुद्रामे हुनका देखने छलहुँ । ओ पर्सा जिल्लाक कोनो गामसँ काठमाण्डू पढ़ए आएल छलीह । चन्दा शुरुमे कम बजैत छलीह । धीरे—धीरे हमरासँ खुजए लगली । अबेर रातिधरि टेबुल लैम्प जरा कऽ लिखैत रहैत छलीह । हमरा पता लागल जे ओ लेख तेख लिखैत रहैत छथि ।
हम रुचि लेब शुरु कएलहुँ तऽ ओ हमरा अपन लेख सुनाबए लगलीह ।
ओहि समय क्याम्पसमे एकटा लड़कीक संग किछु सिनियर लड़कासभ अभद्रता कएने छल । चन्दा बहुत बढि़या जकाँ ओहि घटनाक वर्णन कएने छलीह । ओ किछु प्रश्न सेहो उठौलन्हि जे छात्रासभकेँ एहि प्रकारे परेशानी किए सहए पडैÞत अछि ? घरसँ दूर रहएबाली लड़की अपन सुरक्षाक लेल कतए जाए । लेख पढि़ कऽ हम हुनका खूब प्रशंसा कएने छलहुँ ।
चन्दा प्रसन्न भऽ गेलीह, ‘दीदी हमरा एहि प्रकारक लेख लिखब बढि़या लगैत अछि …हमरा बहुत तामस होइत अछि, जखन हम कोनो लड़कीक संग अन्याय होइत देखैत छी … हम अपना लग गाममे हरेक समय एहने बातसभ देखैत छलहुँ तखन तऽ हम पढ़ए लेल एतेक दूर चलि आएल छी ।’
ओहि दिन नहि जाइन किए चन्दाक बात सुनि कऽ हमर आँखिमे नोर चलि आएल छल । मुदा आइ ई समाचार पढि़ कऽ हम कानि नहि सकलहुँ । भोरक चाहधरि पीबाक मोन नहि कएलक । भयंकर उथलपुथल मचल छल मोनमे । केशव अफिस पहुँच गेल हएता । हम फोन लगेलहुँ । शीघ्रे कहिदेलहुँ, ‘आजुक पत्रिका देखलहुँ अछि ? अपन चन्दाकेँ हत्या भऽ गेलैक …….’
केशव कनी उखरल सन कहला, ‘तऽ की भेलैक ? ई तऽ होबहेकेँ छलैक एही बातक लेल अहाँ फोन कएलहुँ अछि ? छोडू एहन बात….’
हमरा केशवक ई प्रतिक्रिया बढि़या नहि लागल । आखिर ओहो तऽ मर्दे छथि । उपर बढैÞत महिलाकेँ बर्दास्त कऽ सकैत छथि ? मुदा हम चुप नहि रहि सकलहुँ । कपड़ा बदलि कऽ चन्दाक घर लाजिम्पाट दिस बढि़ गेलहुँ । पुलिस पूरे इलाकाकेँ घेरने छल । हुनक घरक लग पास ककरो जाए नहि दऽ रहल छल । हम दूरेसँ चन्दाक दूमहला पर स्थित घर देखलहुँ । एक महिना पहिने हम ओतए पहुँचल छलहुँ । उएह बजौने छलीह संगे चाह पीबाक लेल । चन्दा ओहि दिन जीन्स पेन्ट आ ब्लू रंगक ढील सन टीसर्ट पहिरने छलीह हुनकर केश पहिने जकाँ लम्बा छल । हुनकापर खुजल केश खूब जँचि रहल छल । ओहि तल्लामे असगरे रहैत छलीह । घरकेँ बाहर छतेपर बहुत रास करौटन लागल छल । घर ओ बहुत सूरुचि पूर्ण ढंगसँ सजौने छलीह ।
हमरा देखिते ओ दौडि़ कऽ पजिआ लेलीह । आ बजलीह, ‘ममता दीदी पता नहि कतेक प्रशन्न छी जे अहाँ अएलहुँ अछि ।’
बहुत स्नेहसँ अपना रुममे लऽ गेलीह । मुर्गाक बनलेस मंगा कऽ रखने छलीह । चाह पिऔली । हम हुनकासँ बहुत किछु पूछय चाहि रहल छलहुँ । खास कऽ राजेन्द्र सुवेदी मन्त्रीसँ बढ़ैत सम्बन्धक विषयमे । केशवे हमरा बतौने छला जे किछु दिन पूर्व मन्त्री चन्दाकेँ अपने संग विदेश भ्रमणपर लऽ गेल छलाह । हम चन्दाक घरकेँ बहुत गम्भीरतापूर्वक अवलोकन कऽ रहल छलहुँ । कतहु मन्त्रीजीक उपस्थितिक प्रमाण नजरि आबि जाए । मुदा एहन किछु नहि छल । हम बहुत अबेरधरि ओतए बैसि नहि सकलहुँ । किछुए कालमे चन्दाक मोबाइलपर किओ फोन कएलक । ओ नम्बर देखि कऽ मोबाइल उठा सिढ़ीपर चलि गेलीह । हम खिड़कीसँ हुनका दिस देखि रहल छलहुँ । एना लागि रहल छल मानू किओ हुनका डाटि रहल हुए । हुनक मुहँ लाल भऽ रहल छल ।
ओ रुममे अएलीह आ किछु घबराति बजलीह, ‘ममता दीदी, हमरा अचानक जाए पड़ल । आइ एम साँरी । अहाँकेँ एहि तरहे बजा कऽ ……’
‘कोनो बात नहि ।’ हम उठि कऽ ठाढ़ भऽ गेलहुँ ।
ओ हमरा नीचाँ गेटधरि छोड़ए अएलीह । हम किछु सोचि रहल छलहुँ चन्दा अचानक बजलीह, ‘दिदी, अहाँसँ बहुत बात करवाक छल । एकटा समाचार सेहो कहबाक छल …….’
‘की ?’ हम आश्चर्यमे छलहुँ ।
ओ जल्दी सँ बाजल, ‘अहाँकेँ तऽ बुझल अछि उएह महेश….’
हुनक चेहरापर बहुत कोमलसन भाव आएल, ‘आब हमहूँ अहीँ जकाँ सेटल होबए चाहैत छी दीदी । बहुत भटैकि गेलहुँ दीदी । आब शान्तिसँ जीबए चाहैत छी । हम तय कएलहुँ अछि जे विवाहक बाद काठमाण्डू छोडि़ देब । कतहु आन ठाम चलि जाएब,’ ओ चुप भऽ गेलीह ।
हमरासँ रहल नहि गेल हम पुछि लेलहुँ, ‘यदि अहाँ महेशसँ विवाह करबैक तऽ राजेन्द्र सुवेदी मन्त्री जीसँ अहाँक नाम किए एतेक चर्चामे अछि ?’
ओ हमर एहि प्रकारक अप्रत्याशित आक्रमणक लेल तैयार नहि छलीह ।
एकदम सन घबड़ा कऽ ओ बजलीह, ‘एहन किछु नहि अछि दीदी । मन्त्री जी एकटा महिला केन्द्रीत पत्रिका निकालबाक योजनामे छथि । ओ हमरा सम्पादक बनाबए चाहैत छथि । एहि सन्दर्भमे भेटैत छी हुनकासँ बस,’ मुदा नहि जानि हुनक चेहरापर पसीना–पसीना चलि आएल ।
हमर आगा ओहि समय जे चन्दा ठाढ़ छलीह से, ओ नहि छलीह जे हमर जूनियर बनि कऽ होस्टलमे हमरा संग रहए आएल छलीह ।
कतेक सोझ आ इमान्दार छलीह ओ, हुनकासँं बात करबाक मोन होइत छल । हुनका लिखल चीज पढ़एमे मजा अबैत छल । ई के अछि हमरा आगा ? डेराएल स्वयंसँ दूर भगैत लड़की ?
हम घर चलि अएलहुँ । जखन हम केशवसँ कहलहुँ जे चन्दा महेशसँ विवाह करए जा रहल छथि, ओ बहुत हँसलथि । महेश हुनकर क्लासमेट छल । हम कनी खांैझा कऽ पुछलहुँ, ‘एहिमे हँसबाक की बात अछि ?’
‘आब नाटक किए कऽ रहल अछि दुनू ? सभकेँ पता अछि किए कऽ रहल अछि दुनू विवाह ।’
‘हमरा बूझल अछि क्याम्पसकेर समयहिसँ दुनू एक दोसरकेँ पसिन करैत छथि ।’
केशव मुहँ टेढ़ कऽ कऽ बजला, ‘तखन बात अलग छल । मन्त्रीए जी चन्दाकेँ कहला पर महेशकेँ नोकरी लगौलन्हि अछि । चन्दाकेँ किछु बुझएमे नहि आबि रहल अछि । एक दिस ओ मन्त्रीजीकेँ कनियाँ बनि कऽ हुनकासंग पोखरा वा भारत घुमए जाइत छथि आ दोसर दिस महेशकेँ नोकरी दिआबएकेँ लेल हुनकापर दवाव दैत छथि ।’ ‘….पागल अछि महेश जखन ओ चन्दाकेँ करेक्टरक विषयमे बुझि गेल अछि तैयो ओ ओकर पाछू किए पड़ल अछि ? बुझल अछि किछु दिन पूर्व महेश ओकरा खूब पिटने छलैक । चन्दा पुलिसमे सेहो शिकायत कएने छलीह । हमर एक मित्र महेशसँ भेटल छल तऽ चन्दाक विषयमे नहि जाइन की की कहने छल । ओ गलत लड़की छथि…….।’
‘तऽ फेर आब कोना दुनू विवाह कऽ रहल छथि ?’
‘उएह तऽ । कोनो तऽ बाते भेल हएत …..। भऽ सकैत अछि मन्त्रीजी अपन नाम बचाबए लेल स्वयं एना कएने होथि । चलू बढि़एँ भेल महेश बेचारा द्वारेद्वार भटैकिए रहल छल ।’
हमरा किछु बुझएमे नहि आएल भऽ की रहल छैक । मोनमे आएल चन्दाक लगमे जा कऽ साफ—साफ पूछी बात की भऽ रहल छैक मुदा फेर अवसर नहि भेटल ।
हम प्रतीक्षा कऽ रहल छलहुँ विवाह पर हमरा ओ आमन्त्रित करथि । शायद हुनक विवाह भेबे नहि कएल ।
चन्दाक हत्यासँ हम बहुत भीतरधरि हिलि गेल छलहुँ । हमरासँ कोनो काज नहि भऽ रहल छल । रहि रहिकऽ पुरान बात स्मरण आबि रहल छल । ओ एकटा छोटसन गामसँ आएल प्रतिभाशाली आ महत्वाकांक्षी लड़की छलीह । क्याम्पसमे दोसर वर्ष पहुँचिते ओ बढि़या धाक जमा लेने छलीह । क्याम्पसक पत्रिकामे सेहो लिखैत छलीह । हुनक दुस्साहस छल जे क्याम्पसक एक प्रोफेसरक गलत आचरणक विषयमे एकटा समाचार लिखि देने छलीह । तकरबाद ओ देखिते—देखिते हिरोइन बनि गेलीह । ओ पत्रिकामे पार्ट टाइम लिखए लगलीह । पुलिस अधिकारी स्थानीय नेता आ सामाजिक कार्यकर्तामे हुनक पहिचान बनल । हम हुनकासँ जखन कहैत छलहुँ, ‘चन्दा आगा बढ़बाक एतेक जल्दी किए अछि । पहिने पढ़ाई तऽ पुरा कऽ लिअ ।’
ओ बिहुँसि कऽ कहैत छलीह, ‘हमरा लग रुकएकेँ लेल समय नहि अछि दीदी एकहिटा जीवन भेटल अछि हमरा ।’
महेश हुनक प्रेमी छलाह । हमरा पता छल जे चन्दा सेहो हुनकासँ प्रेम करैत छथि । मुदा बराबर हमरासँ कहैत छलीह, ‘हमरा जीवनमे अभावसँ बहुत घृणा अछि । हम एहन लोकसँ विवाह करए चाहैत छी जे हमरा सुरक्षाक संगहि, एकटा बढि़या जीवन दऽ सकए ।’ मुदा नहि जाइन किए हमरा तहिओ ओ बढि़या लगैत छलीह ।
क्याम्पसक अधिकांश लड़की हुनकासँ ईष्र्या करैत छलीह । हमरा लगैत छल लड़कीकेँ प्राक्टिल होएब वा महत्वाकांक्षी होएब अपराध नहि अछि । हुनका अपना ढङ्गसँ जीबाक अधिकार अछि ।
शायद एहिद्वारे हुनकासँ हमरा बनैत छल । हम बीए कएलाक बाद होस्टल छोड़ए लगलहुँ तऽ ओ बच्चा जकाँ कानए लगलीह, ‘दीदी अहाँ बिनु हम कोना रहब ।’
हम हुनका बहुत सम्झौने छलहुँ । हम तऽ काठमाण्डूएमे रहब जखन मोन हएत तखन चलि आएब ।’
शुरु—शुरुमे हमरा घर ओ बहुत अबैत छलीह । हुनके बातसँ पता चलल जे ओ नाबालिक लड़कीसँ वेश्यावृति कराबएबला कोनो गेंगक विषयमे लिखने छथि । ओहि समाचारक बहुत चर्चा भेल छल ।
एकर बादे मन्त्रीसँ हुनक मित्रता भेल ।
केशव हमरा कहलन्हि जे राजेन्द्र सुवेदी मन्त्रीजी स्वयं एहि काण्डक लेपेटामे आबि गेल छलथि । हुनकासँ भेटभेलाक बाद चन्दा स्वयं एहि समाचारपर काज करब बन्द कऽ देने छलीह ।
महेश शायद केशवकेँ बतौने रहथि । ओहो चन्दा आ मन्त्रीजी संग बढैÞत सम्बन्धसँ परेशान रहए लागल छलथि ।
मुदा चन्दा हमरा किछु नहि कहने छलीह । जहिना–जहिना ओ चर्चित होइत गेलीह हुनका हमरा ओहिठाम आबए जाए कम होइत गेल । आब ई सभ सोचलासँ की फायदा ? जे अछिए नहि, ओकर स्मरणकेँ की पोस्टर्माटम करब ? चन्दाक हत्याक ठीक दोसर दिन पत्रिकामे समाचार आबि गेल– पत्रकार हत्याक आरोपी हुनक पूर्व प्रेमी महेश पकड़ाएल । हमर मोन नहि मानि रहल छल जे महेश चन्दाक हत्या कऽ सकैत छथि । तेसर दिन पुलिस हमरोसँ भेटए आएल । चन्दाक मोबाइल पर हमरो नामक मोबाइल नम्बर छल । पुलिस बुझए चाहैत छल हमर चन्दासंग की सम्बन्ध अछि ? हम कतेक दिन पहिने हुनकासँ भेटल छलहुँ ? जखन हमर मुहँसँ निकलल जे एक महिना पहिने बातचित भेल छल तऽ ई स्पष्टसँ कहि देलहुँ जे हुनका मोबाइलपर फोन आएलाक बाद ओ डेरा गेल छलीह । हम चन्दा आ महेशक विवाहक सम्बन्धमे सेहो कहलहुँ । हम पुलिसक अनुसन्धान अधिकृतकेँ जोड़ दऽ कऽ कहलहुँ महेश हत्या नहि कऽ सकैत छथि ।’
ओ ब्यङ्गसँ पुछलन्हि, ‘फेर के कऽ सकैत अछि ?’
‘मन्त्री राजेन्द्र सुवेदी ।’ नहि जाइन कोना हमरा मुहँसँ निकलि गेल ।
पुलिस सभ किछु हकबकाएल । फेर बाजल, ‘अहाँकेँ बुझल नहि अछि अहाँक मित्र चन्दा आ महेश मिलि कऽ की कऽ रहल छलथि ? ओ अपन पत्रकार होबएकेँ फाइदा उठबैत उच्च अधिकारीसभसँग ब्लैकमेल करैत छलीह । मन्त्रीजी स्वयं हुनकर ब्लैकमैलिङ्ग शिकार भेल छलथि । एक हप्ता पहिने पैसाकेँ लऽ कऽ महेश आ चन्दामे झगड़ा भेल छल । भऽ सकैत अछि ओहि तामसमे महेश मारि देने हुए चन्दाकेँ …….।’
हमरासँ किछु बाजल नहि भेल ।
केशव महेशसँ भेटबाक लेल हनुमान ढोका पुलिस कार्यालयमे सेहो गेल छलथि । बहुत दुःखीत छलाह महेश । ओ ईहो नहि कहि रहल छलाह जे चन्दाक हत्या नहि कएने छी । केशव बहुत सम्झौलन्हि तऽ ओ एतेधरि कहला, ‘हम तऽ ओहि दिन मरि गेल छलहुँ जाहि दिन ओहि महिलासँ प्रेम कएलहुँ ।’
महिनाभरि धरि पत्रिकामे चन्दा हत्या काण्डक समाचार पहिलसँ तेसर आ फेर सातम पृष्ठपर अबैत रहल । हम ध्यानसँ पढ़ैत छलहुँ । पत्रिका चन्दाकेँ एकटा अति महत्वकांक्षी, कुटिल आ चलाक पत्रकारक रुपमे प्रस्तुत कऽ रहल छल जे पैसा आ पाबरक लेल किछु कऽ सकैत छलीह ।
हम चिचिया—चिचिया कऽ कहए चाहि रहल छलहुँ जे जाहि चन्दाक विषयमे ताँे सभ बात कऽ रहल छँए ओ एहन नहि छलीह । हुनक भीतर हृदय छल । सभक लेल किछु करवाक ईच्छा छल । हमर छोट बहिन चन्दु छलीह ओ ।
एकटा टेलिभिजनमे राजेन्द्र सुवेदी मन्त्रीजीसँ टेलिफोन लाइब चलि रहल छल । हमहुँ अनायसे टेलिफोन लगा कऽ चन्दासँगक सम्बन्धक विषयमे पुछलहुँ । ओ अपन चेहरा पर खालीपन लबैत कहला, ‘के चन्दा ? हम एहि नामक कोनो पत्रकारकेँ नहि चिन्हैत छी आ नहि महिलोकेँ जनैत छी …….।’
हम स्तब्ध रहि गेलहुँ आँखिक कोरसँ नोर निकलि गेल इहे सजाय भेटल चन्दाकेँ मन्त्रीजीसँ ? हम ई बात केशवसँ नहि कहि सकैत छलहुँ । ओ डटता, ‘अहाँ मन्त्रीसँ की अपेक्षा कऽ सकैत छी सभक आगामे अपन सम्बन्ध स्वीकार करैथि ? मूर्ख छी अहाँ …..।’
दिन बीतैत जा रहल छल । मुदा चन्दा हमर मानसपटलसँ जाइए नहि रहल छलीह जखन कहिओ असगरे बैसैत छलहुँ हुनका विषयमे सोचए लगैत छलहुँ कोन तरहेँ ओ मरल हएती ? पूरा कण्ठधरि रेत देने छल, हत्याराकेँ तैयो चयन नहि भेटल तऽ पूरे सिक्सर हुनक देहमे उतारि देने छल । हम केशवसँ महेशक विषयमे पुछैत रहैत छलहुँ अचानक एक दिन केशव कहलन्हि जे महेश रिहा भऽ गेल । पूरे सम्भावना अछि चन्दा हत्या काण्डमे ओ निर्दाेष भऽ जाइथि । हम चयनक साँस लेलहुँ । हमरा लगैत छल महेश हत्यारा नहि भऽ सकैत अछि । मुदा केशव बहुत रहस्यात्मक ढंगसँ आगा जोड़लन्हि, ‘पता अछि हुनकर रिहाइ के करबौलन्हि ? ..मन्त्री जीकेँ कहला पर हुनकर कोनो कुटुम्ब । आइ काल्हि महेश मन्त्रीएजीक संगे काज कऽ रहल छथि । सुनल तऽ ईहो जा रहल अछि जे मन्त्रीजी महेशकेँ अनाम नगरमे एकटा बड़का घर देलन्हि अछि ।’
हमरा बहुत दुःख भेल ई सुनि कऽ आओरो जे महेश विवाह कऽ रहल छथि आ हुनक विवाह मन्त्रीएजी करा रहल छथि ।
हमरा कहबाक लेल किछु नहि रहि गेल छल यदि चन्दा जीबैत रहितथि तऽ हुनकेसँ कहितहुँ तो अपने लोकक हाथे ठकाएल छएँ । अपन महत्वाकांक्षा आ महेशकेँसंँग सुखी रहबाक लेल तोँ जे घातक कदम उठौने छलएँ ओहिमे स्वयं होम भऽ गेलएँ । जे लोक तोरा प्रयोग कएलकहुँ, ओ आई बाघ बनि कऽ घूमि रहल छौ । तोरा एना करबाक की आवश्यकता छलौक चन्दा ……..।
मुदा ओ तऽ नहि रहलीह हमर बात सुनबाक लेल ।
