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मैथिली कविता – जीवनक मूल्य





♦ राम भरत साह


हमरा ऐना प्यसल छोरि
सामने बहैत दरिया छोरि,
जीवन के कि करब मोल
महंगा लिय सस्ता छोरि ।।

अप्पन बिखरल रूप समेटि
आब टूटल आईना छोरि,
चल बला मसैल नहि दै
पिछा बाट मे रूकब छोरि ।।

भऽ जायत कद छोट
उँचाई पर चढब छोरि,
हमहुँ चलब सिख लेलौहुँ
मित्र हमर रास्ता छोरि ।।

गजल सभ उत्तेजित छै
एकान्त मे पढब छोरि,
यार सभहक हाल नहि पुछु
बाहर आउ परदा छोरि ।।

निकम्मा सभ गाममे बैसि
शहर–शहर के सभ केओ छोरि,
हम सभ आइ परदेसि भेलहुँ
अप्पन–अप्पन घरबार छोरि ।।