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मणिकान्त झाक ६ गीत





 मणिकान्त झा


मिथिला मे पाहुन बनायब ।
जनकपुरक शोभा कि वर्णन
रंग रोगन संग संग अरिपन
निज निज नयना जुड़ायब
मिथिला मे पाहुन बनायब।

आनंदित लागथि विदेहे
सुनयनाक सेहो सिनेहे
जमाता पुरुषोत्तम पायब
मिथिला मे पाहुन बनायब।

मन पुलकित दाइ वैदेही
रघुवर के अनुपम सिनेही
मणिकांतक गीत सुनायब
मिथिला मे पाहुन बनायब।
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राम लखन अभिनंदन
मिथिला मे अयलनि दशरथ नंदन
करियौन अभिनंदन
तिलकाबू अच्छत रोड़ी चंदन
वंदन अभिनंदन।

देवता सँ मानव बनलनि
जनकपुर दर्शन चललनि
सौंदर्यक की होबय वर्णन
करियौन अभिनंदन।

श्यामल आ गौर किशोरे
पीताम्बर चौड़ा कोरे
लखनक संग रघुनंदन
करियौन अभिनंदन।

स्वागत मे नगर सजाओल
पीपही ओ ढोल बजाओल
पिठार सिंदुर केर अरिपन
करियौन अभिनंदन ।

चललनि हाट बजरिया
झिल्ली कचरीक सचरिया
छनैत कराही मे छन छन
करियौन अभिनंदन ।

लटकल देखि खेलौना
हर्षित लागथि पहुना
ललचथि सुमित्राक नंदन
करियौन अभिनंदन।

बतियेलनि दूनू भैयारी
मिथिला तँ स्वर्गक द्वारी
माटियो सँ निकलय कंचन
करियौन अभिनंदन।

अपलक ताकथि मिथिलानी
हर्षित सुनयना महारानी
विदेहक मन छनि खनहन
करियौन अभिनंदन ।

सजि जेतय काल्हि स्वयंवर
वैदेहीक होयता रघुवर
मणिकांत नाचथि निज आंगन
करियौन अभिनंदन ।

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वैभव
वैभव पाबि ने अगरैयौ रहियौ कयने मन थीर
धनवानक नहि सीमा कोनो भेटत बहुतो वीर।
ननदियो के ननदि होबय राखी तक्कर भान
कतबो उकठ किए ने होबय बनल रही धीर।
उकटा पैंची जुनि करी एहि सँ नहि हो लाभ
दम्म साधिकय सुनि ली आत्मा कयने स्थीर।
हंसता के सब संग हो कनना के करय कात
व्यथा ने ककरो सँ कही घोंटि जाइ निज पीड़।
दर्द अहाँ के सुनिकय दुर्जन रहि रहि मुस्कैत
टकटक ताकैत रहब अपने बहबैत नैना नीर।
मणिकांतक जँ मानि ली सदिखन रहब अमीर
केहनÞो संकट आबिकय सोझा सँ जायत फीरि।
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टीकाकरण अभियान गीत
आयल टीकाकरण एक्सप्रेस यौ भैया
चलू टीका लगबाबी
कोरोना छै रोग विशेष यौ भैया
चलू टीका लगबाबी।
गामे गामे पहुँचल ई गाड़ी
लाइन लगाबी आबि अगारी
अभियान चलल भरि देश यौ भैया
चलू टीका लगबाबी।
कोविड नाइन्टिन भरि जग पसरल
लोक बहुत अछि एहि सँ लचरल
उपचारक नहि कोनो उदेश यौ भैया
चलू टीका लगबाबी।
टीके टा अछि एकर सुरक्षा
जल्दी चलु अपनहि स्वेच्छा
मणिकांतक आग्रह विशेष यौ भैया
चलू टीका लगबाबी।
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महेशवाणी
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शिव शिव सुमिरन सदिखन करी
नित्य नियम निरिखी नटराज
जलहि टा पर ढरथि महादेव
दूध मलाइक नहि थिक काज।
बसहा वाहन भस्मक चानन
पंचानन दानी सरकार
कार्तिक संगे छथिन गजानन
दूइ बालक हरदम तैयार
छथि दिगंबर मुदा विश्वंभर
तीन भुवन पर करथि राज
शिव शिव सुमिरन सदिखन करी
नित्य नियम निरिखी नटराज।
बनल भिखारी छथि त्रिपुरारी
बाघंबर हिनकर पहिरन
चिताभूमि मे वास करय छथि
फणिमाला लपटल कण–कण
डिम डिम डमरू बाजनि कर मे
प्रियगर हर के छनि ई साज
शिव शिव सुमिरन सदिखन करी
नित्य नियम निरिखी नटराज।
आक धथूरा भोजन हिनकर
रुचिगर लागय छनि बेलपात
भांगक सेवन जगत विदित अछि
बजबा मे नहि कोनो लाथ
अढरण ढरण छथि बउरहबा
मणिकांतक सब पूरन काज
शिव शिव सुमिरन सदिखन करी
नित्य नियम निरिखी नटराज।

बाल गीत
कदली फल के केरा कही सुनियौ यौ श्रीमान्
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
बरहरी चिनियां के संगहि ध’स ओ मोटका चपड़ा
बूझि सकी नहि सोहने बिना त’र मे बीया ककरा
मालभोग के स्वाद ने पूछू खाइते मुख मुस्कान
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
चम्पा केरा चमकय गमकय कान्हाबनसी
सिंगापूरी देखि देखि मनहि हलसी
हाजीपुर केर संगहि नामी नौगछियाक बगान
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
भुसावल जा क’ देखि आउ नमका केरा
दू छीमी सोहियौ भोजनक पारे बेड़ा
कोलकाता जायकाल ट्रेन मे कीनू करबै नै जियान
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
कंचका तीमन तरुआ भूजल ओ रसदारे
कोफ्ता खेबइ गरम तं भेटत स्वाद अपारे
खोंइचाक चटनी उसिन क’ बनबी सुनियौ खोलने कान
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
छीमी हत्था घौड़ मंगाबी जखन तखन
गंडा कोड़ी गोटी संग गनियौ दर्जन
पकबय खातिर खद्धा खुनिकय कसगर दियौ धूकान
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
पितर कर्म मे चाहबे करी कांच पकल
डमखोड़हि देखब सबतरि पिण्ड पड़ल
एकरहि गाछे घाट सजाबी छठियो तकर प्रमाण
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
एकरा पातक कत्ते हम गुणगान करी
भोज भात मे दढ़का संग काटल मूड़ी
कोशा लटकै बेदी ऊपर तखने कन्यादान
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।
बाढÞि बोह की धार पोखरि मे थम्ह एकर
अथाहो जल के पार करी चढÞि कय ऊपर
महिमा एकर कते गनाबथि मणिकांतो अज्ञान
सब पूजामे प्रसादक छैक विधान ।

दरभंगा