

ई.विनोद चन्द्र
‘हम साइन्स लक आइ.एस्सी.(अखनका प्लस टू)पढब । ’,पुत्रक प्रश्न छलै ।
‘हमरा पासमे पाइ नहि अछि। शिक्षक तालिम लऽ लीअ आ अपनो शिक्षकके नोकरी करैत ,जतेक अध्ययन करबाक मोन होइए,करु ।’ पिताक जबाब छल ।
मजबुरन शिक्षक तालिमके लेल दुनू वीरगंज पहुँचलाह ।
‘अहाँ किए अएलहुँ शिक्षक तालिममे,अहाँ त साइन्स लऽकऽ पढितहुँ ,हिसाव, साइन्समे नीक नम्बर अछि ? ’,तालिम प्रमुखके जिज्ञाशा छलनि ।
‘पाइके कारण । एतऽ तालिम भत्ता भेटैत छै, आइ.एस्सी. पढाइमे बहुत पाइ चाही,जेकर अभाव अछि । ’,सहज जबाब ।
‘अहाँके विचार ! हिसाव, साइन्समे नीक नम्बर अहि , अहाँके अतेक कम उम्रमे उच्च अध्ययन करबाक चाही ,नहिकी गूरुजी बनबाक लेल हरबरी । ’,फेर सुझाव ।
बाबू –पुत्र दुनू,बिना एडमिशने लौटि अएलाह ।
‘अहाँ हमरा आइ.एस्सीमे. भरना कराउ नहित हम घर छोरिक कतहु पढऽ चलि जाएब । ’, पुत्र, पिताके अन्तिम चेताबनी देलखिन।
‘सर,हमर पुत्र आइ.एस्सी.पढए चाहैत अछि मुदा हम गरीव अभिभावक छी ।कोना हमर पुत्रके अभिलाषा पूर्ण हेतै,सहयोगके लेल सविनय अनुरोध अछि । ’ पिता आर. आर. कैम्पस जनकपुरधामक प्रिन्सिपललग हाथ जोडि अश्रु मिश्रित शब्दसँ निवेदन कएलनि ।प्रमाण पत्रसभ टेबुलपर राखि पुत्र सेहो हाथ जोडने ठाढ छलनि ।
‘जहिया अहाँक पुत्र, कोनो हालतमे पढबाक इच्छा व्यक्त कएलक, तहिए ओ आधा विजय प्राप्त कऽ गेल,बाँकी आधा ओ जतऽ–जतऽ जएतै ततऽ ओकरालेल सहयोगी हाथसभ, ओकरा सहयोग करबाकलेल भेट जएबेटा करतै । ’छात्रक आँटलग प्रिन्सिपल सेहो झुकि गेल छल ।
प्रिन्सिपल,हेड क्लर्क आ किछु सिनियर प्राध्यापकके बजा छलफल कैलखिन आ पुअर ब्वाइज फन्डसँ नामाँकन आ होस्टलमे रहबाक व्यवस्था करबा देलखिन, संगहि एकटा सामाजिक संस्थासँ पुस्तक खरिद देबाक व्यवस्था सेहो भऽ गेलै ।
ओ छात्र आइ.एस्सी.प्रथम श्रेणीमे उच्च अंक लऽकऽ पास भेलाह ।भारत सरकारसँ पूर्ण स्कलरशिपमे ईन्जिनियरिंग पढबाक मौका भेटलनि । नीक अंक अएलनि,फेर उच्च शिक्षा करबाक लेल अवसर भेटि गेलनि आ एम.टेक.,पिएच.डी.इंगलैण्डसँ कएलनि । उच्च शिक्षाक बाद , ओ ईन्जनियरके पदपर सरकारी सेवा शुरु करए अपने देशमे अएलनि । उदेश्य छलनि,अपन जन्म स्थानेक गरीबी मात्र नहि,अपन समाजोक गरीबी दुर करब , जकर सफलतामे सरकारे बीचमे बाधक भऽकऽ ठाढ छलनि । आब एकेटा उपाय छलनि सरकारमे जेबाक । जे कठिन त छलनि मुदा असम्भब नहि ।ओ अपनेसन शिक्षित,निस्वार्थी, कर्मठ ,राष्ट्रप्रेमसँ ओतप्रोत लोकसभके जम्मा कएलनि आ एकटा राजनीतिक पार्टी, ‘नवनिर्माण पार्टी ’ खडा कएलनि,जाहिमे युवा युवतीसभ बढि चढिक भाग लेलखिन । आइ‘ नवनिर्माण पार्टी ’ लोकसभके आँखिपर चढाएल गेल भ्रमक चस्मा हटाबएमे सक्षम भेल अछि । तीसो वर्षसँ लोकसभकेँ झुठक सपना देखा–देखा फेरा–फेरी शासन कए नेतासभकेँ अमीर आ जनताके फकीर बना लुटैत रहल राजनीतिक पार्टी आ ओकर नेतासभ, अखन भयभीत भेल अछि आ सुरक्षित पलायनके लेल उपायके खोजीमे लागि गेल अछि ।अन्य छोट–छोट पार्टीसभ अपनाके सुधारलहुँ कहि, एकजुट भऽ रहल अछि ।
एम्हर एकटा योग्य ईन्जिनियरके संयोजनसँ जनताके बीचमे, जनता द्वारा आ जनताके लेल ठाढभेल ‘नवनिर्माण पार्टी’,देशके योजनावद्ध विकासक पुनित पथपर आगा बढि गेल अछि ।
