

♦ प्रा.डा. सुरेन्द्र लाभ
ज्ंगलके राजा अपन मन्त्रीसब स्ंगे पार्टी मना रहल छल ।एकटा बेचारा गदहा आबि निवेदन चढौलकै –´राजा साहेबके जय हो।अपनेक राजमे सारा ज्ंगलवासी अस्ंतुष्ट अछि ।किछु कयल जाय सरकार ! ´
रक्तप्यालास्ँ एक घोंट खून पीबि सिंह ओहि गदहापर तमसाईत जबाब देलकै – ` अहाँ एहन गदहा पत्रकारके खालि अस्ंतुष्टिए नजरि अबैत अछि ।कत्त` छै अस्ंतुष्टि ? सारा ज्ंगलवासीके प्रतिनीधि हमर सरकारमे अछि ।दूतिहाई बहुमत हमरा प्राप्त अछि आ अहाँ असन्तुष्टि देखै छी? काल्हिधरि त’ हमरे आगा पाछा नाङरि डोल्बैत छलहुँ आब बुझाईय बिरोधी खेमामे चलि गेलहुँ ।।´ततपश्च्यात अपन दूटा बघबाके किछु स्ंकेत कएलकै ।दूनु बाघ आबि गदहाक डेङ पकडि घिसियबैत जहलदिस ल ´ गेलै ।पार्टिमे जोरस ठहाका फुटल्।
दोसर दिन फेर जमघट प्रारम्भ भेलैक जकरनाम ईसब मन्त्रीम्ंडल रखने रहैक्।म्ंत्रणा प्रारम्भ भेलै ।एकटा सियार म्ंत्री राजा समक्ष अपन म्ंत्रालयके रिपोर्ट प्रस्तुत कएलक – ´ सरकार अपनेक शासनमे चारुदिस अ्मन शान्ति अछि ।आब समृधिक बात कयल जाओ । अपनेक बातेपर समृद्धि दौगल दौगल चलि अएतै सरकार । सबमन्त्री स्वीकारोक्तिमे मुडी डोलबैत जयजयकार कर´ लागल -जय हो ! जय हो ! !
राजा अति प्रसन्न भ ´उठलाह्। आग्या प्रवाहित कएलन्हि – ` आई स केयो गोटे आन कोनो बात नै करी, मात्र समृद्धिक बात करी।भाषणके सुरुआत समृद्धिस करी, अन्त समृद्धिस करी आ बिचमे सेहो समृद्धिक बात करी ।’ मंन्त्रीमण्डल फेर जयजयकार कएलक – जय समृद्धि ! जय समृद्धि ! ! खुशीयालिमे टेबुलपर गरिबसभक खून प्यालामे सजाओल गेल । सब मंन्त्रीगण अपन अपन प्याला उठौलनि- चीयर्स !
कहिने कोम्हरस फेर एकटा गदहा उपस्थित भ´ गेल l सबके माथ दुखाए लगलै। ओ फेर निवेदन चढौलक –`सरकार त्राहिमाम ! पुरा ज्ंगलमे आगि लागल अछि ।सब जीवजन्तु भूखस मरिरहल अछि।चारुभर अफरातफरी मचल अछि आ एत्त अहाँसब मौज करहल छी ? ‘
` हमसब मौज क रहल छी? अरे हमसब त समृद्धिपर चिन्तन करहल छी ´ एकटा मन्त्री जवाब देल्कै ।
मुदा आई गदहा मान ´ बला नै छल – ` ईसब नाटक बहुत भेल , आब विद्रोह हएत ।´
विद्रोहक नाम सुनिते राजा गम्भीर भ गेलाह आ मुस्कियाईत जबाब देल्खिन – `जुनि तमसाई पत्रकार महोदय, सूचनाक हेतु धन्यवाद ।अखने हम एकटा आयोगके घोषणा करैत छी ।ई आयोग ज्ंगलभरिके समस्या आ समाधानक पता लगाओत ।आ सबस खुशीक गप्प एहि आयोगक नेतृत्व अहीं करब महोदय ! ´
गदहा खुशी खुशी सरकार प्रति आभार प्रकट करैत बिदा भेल आ पार्टि अखनिधरि चलिए रहल अछि।
