

♦चन्द्रकिशोर
भोरे भोरे
हम देखि रहल छी
एखने–एखने ओ बच्ची, झरल
आमक टिकोलाकेँ चुनि चुनि कऽ जेब भरि रहल अछि
जेब भरएकेँ प्रसन्नता, ओकर चेहरापर भोरक किरण जकाँ खिल रहल अछि
आमक गाछपर चिड़ैइ चहचहा रहल अछि
हमरासँ आँखि मिलत, ओकर चेहरासँ
छलकल निश्छल मुस्कान
हम पीब रहल छी
कतेक सुन्दर दृश्य देखा रहल अछि ।
एखने–एखने हम चाहक चुस्की लऽ रहल छी
आब तँ अखबार सेहो घरपर नहि अबैत अछि फेर अपन आदतसँ लाचार हम मोबाइलमे खबरि खोजि रहल छी,
तखने लड़काक एकटा झुण्ड अबैत अछि
लड़का नीचामे छिरियाएल आमकेँ चुनए नहि चाहैत अछि,
आओर कि ! ओ गाछपर पाथर फेकैत अछि जे आम झरि जाए
कारण ओ लड़का अछि चुनैत नहि, झटहा चलबैत अछि
हम देखि रहल छी
एखने–एखने एकटा पक्षी चुनि– चुनि कऽ संजोगने
तिनकासँ खोंता बना रहल अछि
हम ई अप्रतिम निर्माणकेँ अपलक
निहारि रहल छी ।
एखने–एखने गाछमे पानि पटौलहुँ अछि
माटिक भीजल– भीजल गमक
वातावरणमे तैरि रहल अछि
चाहक चुस्कीक संग हम
प्रकृतिक संग भऽ कऽ
किछु–किछु बुझएकेँ प्रयास कऽ रहल छी ।
आगाँ आमक भोलाभालासन गाछ अपन मूल प्रकृतिक संग ठाढ़ अछि ।
अनुवाद – सुजीत कुमार झा
