

♦ प्रा. डा. सुरेन्द्र लाभ
जीवन हमर गीत बनि बजैत रहल,
दुःख–सुखक राग संग सजैत रहल।
जे भेटल, ताहिमे रस पबैत रहल,
जीवन हमर गीत बनि बजैत रहल।
डेग डेग धरती नपैत रहल,
नव किरिणक आशा बुनैत रहल।
अन्हारो केर बीच दीप जरैत रहल,
जीवन हमर गीत बनि बजैत रहल।
काँट भरल बाटमे कुसुम सजल,
मोनक आंगन स्नेहक मधुर गजल।
पीर केर सागरमे सुख खोजैत रहल,
जीवन हमर गीत बनि बजैत रहल।
कखनो मेला, कखनो श्मसान भेटल,
कखनो क्रुड, कखनो दयावान भेटल।
हरेक दुखकेँ हाससँ हरबैत रहल,
जीवन हमर गीत बनि बजैत रहल।
हारितो किछु, मोन ने हारल,
नव सपना पुनि–पुनि सँवारल।
स्नेहक गंध पल पल लुटबैत रहल,
जीवन हमर गीत बनि बजैत रहल।
