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मैथिली कविताः हाइरो कऽ हम जितबे करब





एना नै कहियौ कि ओ बेकार छै
फुटल कपार ओकर तएँ बैसल लाचार छै

संघर्षक धधरामे ओ क्षण क्षण धधैक रहल अछि,
तैयो ई समाज ओकरे पर भड़ैक रहल अछि

ककरासँ हार आ ककरासँ जीत बिचित्र ओकर युद्ध अछि
सामने परिवार तऽ पाछु समाज लऽ कऽ तलबार ओकर विरुद्ध अछि

जे बाप आङुर पकैर कऽ चलएके सिखौलक
सेहे बाप “तोहर करण माथ झुकैय हमर“
कहि कऽ आइ अपने नजरमे गिरौलक

कहैय ओ “हमरो सफलता बड़ अनमोल लगैय
मुदा बैस जाइत छी , जखन घरक स्थिति पाछुसँ किलोल करैय

चकना चुर कऽ कऽ अपन सपना जिम्मेवारी आब ढोबे करब ,
नै बड़का कोठा तऽ छोट झोपरियो हम ठोकबे करब,

लोक कहैय एखन भाग हमर अधलाहे अछि
हँ हेतै अधलाह भाग हमर मुदा हम नै,
मेहनत करबै अतेक कि एक
दिन सभ कहत ई ककरोसँ कम नै

देखैत जाउ हम आब चुकब नै हर हालमे टिकबे करब
आइ नै तऽ काल्हि हाइरो कऽ हम जितबे करब .