

♦ राजन दास
बहिन, तूँ हमर बचपनक संगिनी,
हँसी-खुशीसँ भरल हमर जिनगी।
तोहर हँसीसँ रौशन होइत अँगना,
तोहर ममतासँ पबैत छी सगरो सपना।
तोरा संग बितेलहुँ असगर पल,
तोहर संग हमरा सभ दुःख कऽ हल।
बचपनक खेलासँ ल’ कऽ बातक रंग,
तोहर सनेहक डोरसँ बन्हि गेल अछि हमर अंग।
तोरा आँखिक चमकमें पबैत छी अपन संसार,
तोहर मुस्कान में अछि प्रेमक आधार।
दुनियाँ चाहे कतेओ कठिन होइ,
तोरा संग रहिते जिनगी सरल होइ।
बहिन, तूँ हँ हमरा लेल स्नेहक छाँव,
तोरा बिनु अधूरा अछि हमर ठाँव।
जेत’ जा तूँ रहब, हमर दिलसँ नेह टुटत नै,
सपनाकेँ रंग भर’ में तोहर हाथ छुटत नै।
– शहीदनगर नगरपालिका
