

♦ कर्ण संजय
बस
एक राति बाकी छैक
शायद अन्तिम राति
चाँग लागल फौतिक लहसरी देखि
हिरोशिमाके सभटा पीडा सन्हिया गेल अछि देह मे
देबालक ओहिपार
घात लगने रक्त–युद्घ–पिपासु सभ
सुनगैत बारुदक ढेरीपर मारि क’ टँगने छैक टटका लाश
सँुघि रहल छैक
जरैत मनुख गन्ध
अपने कौलिक सभहक रक्त जरबाक गन्ध
जे कहियो ओकर विगत छलै आई वर्तमान छैक
हेँजक हेँज कैमरासभ गिद्घजकाँ नोचि रहल छैक जीबते देह सभ के
सामाजिक संजाल के वालपर
ऋाँखि मे घृणा भरि भरिक’
शब्दमे रक्त बोरि बोरि क’
लिखल जा रहल छैक मृत्य ुके जीबैत युद्घ कथा
आउ हमसभ एकबेर फेर सँ
युद्घक बिचला आँगनमे ठाढ भ’ क’ कनि जी लए छी आ फेर सँ मरि जाए छी ।
जन्म आ मृत्यु के बिच अहि फाँक समय मे
अँकुराति असंख्य सपना सभ मे
जन्मैत रहै छैक
नव जीवनक छोट छोट आँखि सभ
श्मशान घाट मे चिता पर चढाओल फूल, माला, सरर–धुमन, चन्दनक आगि मे
धू–धू क’ जरैत देह सँ
गमकैत रहैत छैक जीवनक गमगम सुगन्ध
आब तऽ
मुर्दाक बजार मे
सितुआ मे भरि भरि क’ बिका रहल छै जीवन
फेरसँ शुरु भेल छैक
मनुखक प्रतिमान गढबाक क्रम
देह पर ताम–तुलसी, तील–जऽ आ गंगाजल छीट क’
जीवनक अनन्त यात्राक यात्रा मे
किछु समय हमहुँ बेसाहि लेने छी ।
विश्व रंगमञ्च पर
मनुख–मनुख आ देश–देश खेल रहल शक्ति राष्ट्र–सभ
उठौने छैक समदाओन
एकटा मृत्यु गीत
मानवता मरबाक गीत
राष्ट्र मरबाक गीत
देश मरबाक गीत
फलस्तीन आ यूक्रेन मरबाक गीत ।
मुदा
मर’ के चाहै छै ?
मृत्यु उत्सव मनाब’ के चाहै छै ?
जीवनसँ सुन्दर छैक कोनो जीवन ?
जीवनमे उठैत
तमाम अनुत्तरित प्रश्नपर सभ पर
ठाढ कएल गेल छैक जीवन्त प्रश्नचिन्ह
कि जन्मेटा के लेल नै होइछै मनुखक मृत्यु ?
कि मृत्युएटा के लेल नै होइछै मनुखक जन्म ?
आउ हम सभ एकबेर फेर सँ
युद्घक बिचला आँगन मे ठाढ भ’ क’ कनि जी लए छी आ फेर सँ मरि जाए ।।
– विराटनगर
