

♦ सुजीत कुमार झा
छुट्टीक दिन, हम आ हमर कनियाँ दुनूक लेल अलग–अलग मतलब लऽ कऽ अबैत अछि ।
दुनू अपन–अपन कारणसँ छुट्टीकेँ प्रतीक्षा करैत रहैत छी ।
हम एहिद्वारे जे छुट्टीकेँ दिन हमरा अपना तरिकासँ जीबएकेँ एकदिन होइत अछि । छुट्टीकेँ मतलब दिनभरि आरामे आराम अर्थात जतेक बजेधरि हुए अपना मोनसँ सुती, जेना मोन हुए पड़ल रही ।
पत्रिका उन्टाबैत दिन बिता देब । कोनो उपन्यास पढि़ लेब । किछु लिखएकेँ प्रयास करब आ फेर किछु नहि लिखएकेँ कोशिस करब वा कोनो प्रयासे नहि करब । अर्थात ई सभ अपना मोनक हिसाबसँ, ककरो कोनो दवाव नहि ।
कनियाँक नैहरि आ सासुर दुनू गाममे अछि, से जखन कहिओ कनियाँ गाममे होइत छथि आ हमर बेटा, सत्य अछि ओ हुनकेसँग रहैत अछि । एहन समयमे छुट्टीकेँ कोनो एहन दिन पड़ैत अछि तऽ हम तरकारीसँ लऽ कऽ दुधधरि पहिनेसँ किन कऽ राखि लैत छी, कोनो सम्भावित कारणसँ हमरा रुमसँ बाहर नहि निकलए पड़ए एहन दिनमे । रुमक बाहर पयर राखब हमरा लेल आश्चर्ये जकाँ होइत अछि ।
कतेक दिन तऽ बेचारा पत्रिका दिन–दिनभरि घरक बाहर उठाबएकेँ प्रतीक्षा करैत रहैत अछि, पड़ल रहि जाइत अछि तऽ कतेकोबेर एहन होइत अछि, पत्रिकाकेँ अक्षर–अक्षर चाटि जाइत छी । छुट्टीक विषयमे कही तऽ अपन मुड वा मर्जीसँ चलएकेँ एक दिन, किछु करएकेँ वा नहि करएकेँ दिन । किछु सोचएकेँ वा किछु नहि सोचएकेँ दिन ।
जखन कि हमर कनियाँक लेल छुट्टीक दिन आओर कारण लऽ कऽ अबैत अछि । हमरा अफिसमे रहएकेँ समय भोर ११ बजेसँ ६ बजेधरि रहैत अछि । जतए हम रहैत छी, ओतएसँ अफिस पहुँचएमे आधा घण्टा लगैत अछि ।
आधा घण्टा भोर, आधा घण्टा साँझ । ओहो जखन नगर बस महाराजकेँ कृपा भऽ जाइत अछि तखन ई एक घण्टा कतेको बेर बढि़ कऽ दू घण्टामे बदलि जाइत अछि ।
भोरक समय उठिते पत्रिका पढ़ब, दुध–सुध लाबएकेँ, बेटाकेँ तैयार कऽ स्कूल पठाबएकेँ आ बादमे अफिस जाएकेँ तैयारीमे बीत जाइत अछि आ साँझ साढ़े ६ आ ७ बजेधरि घर पहुँचलाक बाद कतहुँ बाहर निकलएकेँ कोनो इच्छा दूर– दूरधरि नहि रहि जाइत अछि । रातिक भोजन कएलाक बाद, बाहर निकलएकेँ मोने नहि करैत अछि । हमर बढैÞत पेट देखि कऽ, जेकरा लेल कतेको शुभचिन्तक खास रुपमे सलाह देलन्हि । आम मैथिल सर्वहारा युवा जकाँ हमहूँ पूरे तरहे कुपोषणकेँ शिकार भऽ रहल छी । कखनो आँखि भाड़ी लगैत अछि, कखनो माथ । कखनो तरबामे जलन होबए लगैत अछि तऽ कखनो ऐरी दुखाए लगैत अछि । कब्जियत तऽ सदा बहार अछि ।
सत्य ई अछि, कनियाँसँ बेसी हमर शरीरक एहि प्रकारे बिगरएकेँ विषयमे आओर केँ बुझि सकैत अछि ? से हमर कनियाँ हप्ताकँे ६ दिन रुमसँ बाहर निकलएकेँ सभ आकंक्षा दबौने पड़ल रहैत छथि आ क….क…क…केँ सिरियल वा बात–बात पर नोर बहाबए आ गीत गाबएबला सिनेमामे स्वयंकेँ गुम कऽ दैत छथि । मुदा एहिबीच छुट्टी दिनक अपन योजनामे ओ चुप्पे–चुप्पे बनबैत रहैत छथि, छुट्टीक दिन ई करब, ओ करब । छुट्टी दिन ओतए जाएब, छट्टीक दिन ओतए घुमब आ एहिकेँ लेल धीरे–धीरे हमरो तैयार करैत रहैत छथि ।
सपाट भाषामे कही तऽ जतए हमरा लेल छुट्टीक मतलब होइत अछि घरमे रहब, ओतहि हमरा कनियाँकेँ छुट्टीक मतलब होइत छन्हि बाहर जाएब ।
गम्भीरतासँ देखल जाए तऽ दुनू बातमे कोनो अन्तर नहि अछि । हम दुनू गोटे जीवनकेँ कनिक अलग ढंगसँ जीबए चाहैत छी मुदा समस्या ई अछि जे हमर जीवन स्थितिमे एककँेमुक्ति दोसरकेँ मुक्तिमे बाधक बनल रहैत अछि ।
एनामे हमरा सभकेँ बीच विवाद होएब स्वभाविक अछि । मुदा हम दुनू गोटे होसियार छी, एक दोसरकेँ बढि़या जकाँ बुझैत छी । प्रेम करैत छी, ई विवाद हम दुनू गोटे कोनो तरहे टालि दैत छी आ बीचक बाट निकालि लैत छी ।
ई बीचक बाट किछु एहन होइत अछि जे दुनूकेँ पसिनक आधा–आधा दिन । जेना, दिनक पहिल बेरियाधरि ओ हमर कोनो काज पर टिप्पणी नहि करतीह, हमरा जे इच्छा हएत, जेना मोन लागत, हम करैत रहब । मानि लेल जाए, हमरा हुनक बाँहिमे पड़ल रहबाक मोन भेल तैयो । बीचमे टोकब अपराध मानल जाएत । आ बेरियाक बाद स्वंयकेँ पूरे तरहे हुनक इच्छाक हबाला कऽ दैत छी ।
कोनो सिनेमा, नाटक, मन्दिर, हुनक कोनो मित्र, कोनो दूर–दूरकेँ सम्बन्धी, ओहिना बेकारमे जतए हुनका मोन लगलन्हि ततए घुमए जाएसँ लऽ कऽ नदीमे स्नान करएधरि । मात्र शर्त ई अछि, कोनो काज हरेक हालतमे घरसँ बाहर होएबाक चाही ।
हमरा लेल घर एकटा स्वर्ग अछि । जतए आबि कऽ हम संसारी जंजालसँ एकदम मुक्त होबए पसिन करैत छी । कोनो तरहक बाहरी तकलिफ वा तनावसँ मुक्ति, अपनाकेँ सँग अपनाकेँ कोरामे मुदा कनियाँक लेल ई घर एकटा जेल अछि । ओ भोरसँ साँझधरि अनेक दृश्य आदृश काजमे लगातार जुटल रहैत छथि । हम कतेकोबेर प्रयास कएलहुँ, हुनक काजमे सहयोग करी मुदा हम किछु करए चाहैत छी तऽ ओ मना कऽ दैत छथि । मुदा एहि दिनमे ओ बेसी प्रशन्न रहथि छथि आ बात–बात पर हमरा अपन प्रेमसँ सराबोर कऽ दैत छथि ।
हमहुँ दिनभरि हुनकासँग होबएकेँ आ प्रेम भड़ल अनुभवसँ भड़ल रहैत छी । मुदा कोनो नहि, कोनो कारणसँ टुटि जाइत अछि आ फेर टुटल चलि जाइत अछि वा ई कही तऽ बेसी ठीक हएत, कायदासँ ई क्रम कहिओ बनबे नहि कएल । हरेक समय बनएसँ पहिने टुटि जाइत अछि ।
कनियाँक हृदयमे जे किछु हुए मुदा एहि बातक लेल ओ अपन तामस कहिओ प्रगट नहि कएलीह । हुनक तमसाएकेँ कारण हरेक समय दोसर होइत छल ।
तँ एहनेसन एकटा छुट्टीक दिन छल । कनियाँ भोरेसँ बहुत प्रशन्न छलीह । हम भोरे उठलहुँ तऽ लागल हमर किताब पर बहुत गर्दा जमा भऽ गेल अछि । हम भोरेसँ किताब साफ करएमे जुटि गेलहुँ आ एहिबीच हमर बेटा आबि कऽ कतेकोबेर हमर पीठ पर कुदि चुकल छल ।
कनियाँ सेहो कतेकोबेर आबि कऽ हमरासँ प्रेम कऽ चुकल छलीह । हम एहनेसन एकटा किताबकेँ पन्ना उन्टा रहल छलहुँ आ ओ पाछुसँ हमरा बन्नहे छलीह की मोबाइल बाजि उठल । मोबाइल आलमिरा पर राखल छल । हम उम्हर देखनहेँ छलहुँ की कनियाँ बाजि पड़लीह,‘ ककरो हुए बाजए दिऔक, नहि उठाउ ।’
आ ओ हमरा आओर जोड़सँ कैसि लेलीह । एहि सभक बीच मोबाइल एकबेर बाजि कऽ शान्त भऽ गेल मुदा तुरन्ते बाजि उठल । हम कहलहुँ, ‘देखी ककर फोन अछि, उठाएब नहि’ आ हुनकर मना करिते–करिते हम मोबाइलधरि पहुँच गेलहुँ । हाकिमकेँ फोन छल ।
हाकिम सहीमे हाकिम होइतथि तऽ फोन नहि उठबितहुँ मुदा हमरा सभबीच बहुत आत्मीय सम्बन्ध छल । ओ हमरा समस्यामे सहभागी होइत छलथि आ हुनक हम हृदयसँ इज्जत करैत छलहुँ, मोबाइल रिसिब नहि करएकेँ प्रश्ने नहि छल आ हम मोबाइल उठा लेलहुँ, ‘हँ सर कहल जाए ?’
हाकिम कहलन्हि जे एकटा पार्टीसँ आइए अप्वाइन्टमेन्ट तय भऽ गेल अछि आ एहिद्वारे आवश्यक अछि जे हुनकासँग हमरो रहबाक अछि ।
हम किछु कहि पबितहुँ एहिसँ पहिनहेँ हाकिम मोबाइल काटि लेलन्हि । हमर मुहँक स्वाद बिगरि गेल । ओना हाकिम इहो पुछने रहथि जे कतहुँ आओर ठाम व्यस्त तऽ नहि छी आ इहो जे बेसीसँ बेसी दू घण्टामे काज भऽ जाएत, मुदा हम ओ पार्टीकँे हाकिमसँ बढि़या जकाँ बुझैत छलहुँ । एखनधरि ओ कहिओ तय समयपर नहि आएल छलथि एहन कोनो अबेर भेलापर जखन हम हुनका फोन करैत छलहुँ तऽ ओ नहि उठबैत छलथि आ हम अफिसमे बैसि तमसाइत रहैत छलहुँ कारण हुनका देरसँ आबएकेँ सीधा मतलब हमरा अफिसमे अबेरधरि बैसल रहए पड़ैत अछि ।
ओ पार्टी एहन छल, अबेरसँ आबएमे अपनाकँे महत्वपूर्ण होएब बुझए लगैत छलथि । हम ओहि पार्टीसँ परेशान छलहुँ आ हाकिमसँ अपन आपत्ति कतेकोबेर मीठ स्वरमे दर्ज करा चुकल छलहुँ मुदा हरेकबेर हाकिमकेँ एक्कहिटा उतर होइत छलन्हि, कि करब एकर कोनो विकल्प नहि भेटैत अछि आ ई बात सेहो सोलह आना सत्य छल ।
हम ओहि काजक लेल जेकरा ओ पार्टी काज करैत छलथि कतेको पार्टीकँे अजमौने छलहुँ मुदा ओतेक परफेक्षनकँे सँग किओ दोसर नहि कऽ सकल आ मोल सेहो बेसी देबए पड़ल छल । सहीमे हम छोटका शहरकेँ होबएकँे विकल्पहीनताक शिकार छलहुँ ।
हम काठमाण्डू, विरगञ्ज वा विराटनगरमे होएतहुँ तऽ एहन लोककँे जिनकामे प्रोफेशनल एथिक्स नामक कोनो चीज नहि छल, हम अपन लिस्टसँ कहिआ बाहर कऽ देने रहितहुँ मुदा एतए हमरा लग कोनो विकल्प नहि छल ।
ओना तऽ हाकिम ठीके छथि । ओ हमर सुविधाकँे सेहो कनिमनि ध्यान रखैत छथि । हमर सम्बन्ध सेहो हँस्सीमजाकसँ भड़ल अछि, बहुतबेर तऽ नहि लगैत अछि, हम हाकिमक मातहतमे छी । मुदा छुट्टीकेँ मामलामे हमर हाकिम बहुत कड़ा छथि । ओना जखन हमरा आवश्यकता होइत अछि, छुट्टी हमरा भेटिए जाइत अछि मुदा समस्या ई अछि, ई छुट्टी जाहि विशेष आवश्यकताक लेल, लेल जाइत अछि ओहिमे काज आबि जाइत आ अपने एहिबातक लेल तऽ छुट्टी मँगलासँ रहलहुँ की अपनेकँे अपन प्रिय कनियाँकसँग नाटक वा सिनेमा देखए जएबाक अछि नहि तऽ फुन्नी परएबला अछि आ मात्र अपन प्रियकँे सँग हातमे हात राखि भीजब आ भीतरधरि भीज जाएब चाहैत छी, काज नहि करए चाहैत छी । यदि ठण्ढाक समय अछि, अहाँ दिनभरि रौदक मज्जा लैत अल्साएल जकाँ पड़ल रहए चाहैत छी ।
यदि …..
तऽ हाकिमकेँ सँग हमर बातचित समाप्त होइक एहिसँ पहिने कनियाँ कोप भवनमे जा कऽ बैसि रहलीह ।
बातचित समाप्त होइते शीघ्र हम हुनका लग पहुँचलहुँ आ बुझाबएकेँ प्रयास करए लगलहुँ, ‘देखु किछु देरक बात अछि हम जाएब आ चलि आएब… आबि जाएब मिला कऽ तीन, साढ़े तीन घण्टा मात्र लागत, हम एना जाएब आ ओना चलि आएब । अहाँ तैयार रहब, आई हमसभ बक्समे बैसि कऽ सिनेमा देखब… ।’
कनियाँ तमसाएकऽ हमरा दिस तकलीह आ फेर मँुह घुमा लेलीह । हमरा मोनमे आएल, कनियाँके मँुह अपनादिस घुमा लिअ आ सिनेह करी ।
मुदा एकर परिणाम खतरनाक भऽ सकैत छल आ हमरा लग खतरासँ खेलबाक लेल समय नहि छल ।
हम कहलहुँ, ‘प्रिय हमरापर भरोसा राखू । एकदिन हमरा लग बहुत समय हएत आ संसारभरिक खुसी हमरा लग हएत । हम हरेक समय सँग रहब, खूब प्रेम करब आ खूब प्रशन्न रहब ….’ आ हम हुनक पिठपर हात राखि देलहुँ । पिठ बरफ जकाँ ठण्ढा छल मुदा हमरा लग पिठ पर ध्यान देबाक समय नहि छल ।
हम नहाएकेँ लेल धरफरा कऽ बाथ रुममे घुसलहुँ, बाथरुममे पानि बहुत गरम छल जल्दिसँ हम बाथरुमससँ बाहर निकलहुँ आ कपड़ा पहिरए लगलहुँ । कनियाँकेँ वाई केलहुँ तऽ ओ नहि जानि केहन आँखिसँ हमरा देखलीह ? ओहि आँखिमे कि छल, हम से नहि बुझि सकलहुँ, ओहिमे किछु अवश्य छल जेकरा हम सामना करबाक हिम्मत नहि देखा सकलहुँ ।
हम नजरि घुमेलहुँ ब्याग उठेलहुँ, फेर वाई–वाई कहलहुँ, बेटाकेँ गाल थपथपेलहुँ आ कोनो तरहक जवावक प्रतीक्षा कएने बाहर निकलि अएलहुँ ।
बाहर रौद शरीरकँे भीतरधरि सुइया जकाँ गडि़ रहल छल ।
अफिसमे हरेकदिन जकाँ जखन ओ पार्टी आएल तखनधरि हम हाकिमकेँ सँग कतेकोबेर छलफल कऽ चुकल छलहुँ आ हाकिम एककेँ बाद एक दर्जनधरि सिगरेट फुकि देने छलथि । ओना हमरा इहो पत्ता छल, कतबो छलफल करी वा नहि करी ओ पार्टी कोनो कमी अवश्य निकालत, बदलामे अपना दिससँ कोनो नहि कोनो सुझाव अवश्य देत, ई ओकर चरित्र स्थायी अछि ।
पार्टी दू बजेकँे समय देने छल । आ जखन हमसभ अपन काज कऽ कऽ बाहर निकलहुँ, तखनधरि साढ़े ६ बाजि चुकल छल ।
बाहर निकलि कऽ हम एकटा सिगरेट सुनगेलहुँ आ नगरबस दिस बढि़ गेलहुँ, स्वंयकँे कनियाँक छुट्टी बर्बाद करबाक दोषी मानैत रहलहुँ, हुनका सामना करबाक हिम्मत जुटाबए लगलहुँ ।
सहीमे हुनकर एहिसँ पहिलका छुट्टी सेहो एहिना ओहिनामे बर्बाद भऽ गेल छल । अहाँ जे बुझू मुदा छुट्टीक दिन हम ककरो घर बजावएसँ बचैत रहैत छी ।
एकदिन हम अपन स्कूली मित्रक भोजनपर बजा लेलहुँ । आब हम कि करु, हमरा पहिनेसँ पत्ता नहि छल । हुनक भोजनक समय बेरियाक ४ बजे होइत अछि । ओ एला तऽ हम बहुत नव पुरान बातमे डूबि गेलहुँ । हम बहुत लम्बा समयधरि सँग रहल छलहुँ । एक दोसरकेँ सँग नहि जानि कतेको सिनेमा देखने छलहुँ, नाटक देखने रही, परिवर्तनक बड़का–बड़का सपना देखने छलहुँ तऽ ओ सपनाक विषयमे, हमर दोसर मित्रसभक विषयमे, एक दोसरकेँ विषयमे बातचित करएमे बढि़या लागि रहल छल ।
हुनकर कहएकेँ उत्साह, हमरा सुनएकेँ लेल उत्सुक बना रहल छल । हमर उत्सुकता हुनका आओर कहबाक लेल प्रोत्साहन कऽ रहल छल । हम दुनू गोटे एक दोसरमे एतेक डूबि गेलहुँ, समयक पत्ते नहि चलल । जखन कनियाँ एलीह आ चाहक विषयमे पुछलीह तऽ अचानक हमर नजरि घड़ीपर पड़ल तऽ रातिक ८ बाजि रहल छल । हम कनियाँ दिस देखलहुँ, हुनक आँखिमे बेचयनी इम्हर ओम्हर घूमि रहल छल ।
हमर मित्र अचानकसँ अस्तव्यस्त भऽ गेलथि । ओ शीघ्रहि अपन मोबाइलपर फोन लगावए लगलथि आ ओकर ५ मिनेटक बाद हुनकासँ हाथ मिलवैत हुनका बिदा कऽ रहल छलहुँ ।
एहिना ओहिसँ पहिलका छुट्टीबला दिनपर हमर गामक एकटा लड़का आएल छल । ओकरा हमर शहरमे कोनो परीक्षा छल । परीक्षा देलाक बाद ओ पूरे निश्चिन्ततासँ आबि कऽ जमि गेल छल आ हम संकोचमे ओकरा किछु नहि पुछि सकलहुँ । कनियाँ एहि दुनू अवसरपर कोनो प्रतिक्रिया नहि देलीह । मुदा हमरा बुझल अछि, ओ एतेक जल्दि प्रतिक्रिया नहि दैत छथि । मुदा जखन दैत छथि, तखन एक आवेगमे नहि जानि बहुत किछु कहि दैत छथि । प्रतिक्रिया देबाक मुद्रा अजीव छन्हि, ओ मुँहक मुद्रासँ ई सभ करैत छथि ।
आ हम …. जखन हमर कनियाँ हमरापर एहि प्रकारे तमसाइत छथि, हम एहि अनुभवसँ पस्त भऽ जाइत छी जे कनियाँकेँ एहि प्रकारक तामसकेँ पाछु पतिकेँ रुपमे हमर कतेक असफलता नुकाएल अछि ।
घर पहुँचैत–पहुँचैत ७ बाजि गेल छल । हम बहुत देरधरि कलवेल बजवैत रहलहुँ । एकटा नम्हर आबाजक बाद द्वार खुजल । ई हमर बेटा छल, अपन कुर्सीपर ठाढ़ भऽ कऽ छिटकीली खोलने छल । ओ हमरा देखलक आ बिहुँसल, ‘मम्मी देखू पापा आबि गेलथि ?’
हम ओकर ठोढ़पर आंगुर राखि देलहुँ आ चुप रहबाक इसारा कएलहुँ , ओ प्रश्नक दृष्टिसँ हमरा दिस देखलक । ओ कनिक उदास लागि रहल छल । ओकरा हम कोरामे उठा लेलहुँ आ प्रेमसँ ओकर माथपर हाथ फेरलहुँ आ भीतरधरि भीज गेलहुँ ।
बाहर हमर जे जीवन अछि ओ एतेक निरश आ उल्टा अछि, कोनो तुकक बात मिलल नहि कि अलग अनुभव भीजा दैत अछि । ओना एहि तरहक बराबरकेँ घमाएब, हमरा बहुत लज्जीत जकाँ लगैत अछि आ बेर–बेर कानएकेँ इच्छा तऽ होइत अछि मुदा नोरक एकहुँ बुँद नहि निकलैत अछि । एहन अवसरपर हम आओर फसल–फसल अनुभव करैत छी, एहिसँ बढि़या ई होइत जे कोनो दिन खूब कनितहुँ । एकबेर सोचने छलहुँ आ हम बेर–बेर कनबाक प्रतीक्षा करए लगलहुँ । फेर हम सोचलहुँ, कोनो छुट्टीक दिन बढि़या जकाँ कानब । मुदा जखन छुट्टी भेटैत अछि तखन करएकँे बहुत काज भऽ जाइत अछि ।
भीतर बेडरुम अन्हार छल । हम स्वीच अन कएलहुँ, ओरपेट जड़ल मुदा अन्हार कायमे छल । कनियाँ मँुह दोसरदिस कएने माथधरि ओढ़ना ओढ़ने पड़ल छलीह । हम हुनका डेराइते–डेराइते छुलहुँ आ हुनकर मुँह अपना दिस घुमावएकँे प्रयास कएलहुँ । कनियाँ हमर हाथ झटैक देलीह आ बजलीह, ‘हमरा छुवएकेँ प्रयास नहि करु, जाउ अपन अफिस, अपन काज करु, मित्रसँग मस्ती करु, हम अहाँकँे छी कँे…..’
हम कहलहुँ, ‘अहाँ तऽ हमर जीवन छी, अहाँ हमर श्वास छी, अहाँ हमर प्रेम छी, अहाँ हमर सपना छी, अहाँ हमर जीवनक सुगन्ध छी…अहाँ हमर स्वर्ग छी, अहाँ हमर प्रेमीका छी, अहाँ हमर कनियाँ छी ।’ हम हुनका प्रसन्न देखए चाहैत छलहुँ । हम हुनका चहकैत होइत देखए चाहैत छलहुँ । मुदा नहि ओ प्रसन्न भेलीह आ नहि ओ चहकलीह ।
ओ बहुत ध्यानसँ हमर मुँह दिस देखैत रहलीह । हम हुनक आँखि दिस तकलहुँँ आ डेरा गेलहुँ । हमरा लागल, हुनक आँखिमे एक तरहे बेचारगी देखा रहल छल । हम अपन मुहँकेँ निचा कएलहुँ आ प्रयास कएलहुँ, सहज देखि सकी । स्वयं हमरा बेचारा बनव पसीन नहि अछि आ कनियाँक आगा तऽ आओर नहि । मुदा हम नहि बुझैत छलहुँ हमरा भीतरकेँ कोन कोन्हमे ई घाउ अबैत अछि आ मँुहपर आबि कऽ ई काज कऽ दैत अछि । हम चुपचाप सहज होएबाक प्रयास करए लगलहँु । बेटा सभ किछु बुझिए कऽ टेलिभिजनमे डुबि गेल छल । कनियाँ दोसर दिस मुहँ फेर लेलीह ।
हमरा कनिक राहत भेटल आ हम कनिक सहज भेलहुँ । हम कनियाँक कोरामे माथ राखि कऽ देखए लगलहुँ, ओ कतहुँ आओर देखि रहल छलीह आ एहि तरहे चुप छलीह जेना मेघक बीचमे तारा चुपचाप देखाइत दैत अछि ।
हम धीरेसँ हुनक हाथमे अपन हाथ राखलहुँ । हाथ ठन्ढा छल । हम धीर–धीरे हुनक हाथकेँ सहलेलहुँ । हाथ कापलधरि नहि । हम बहुतो कालधरि हुनक हाथकेँ चुपचाप सहला रहल छलहुँ ।
फेर हम कहलहुँ, ‘अहाँ हमर कनियाँ छी आ हम अहाँक पति । हमरा सभकेँ एक दोसरके समस्याकेँ बुझबाक चाही । अहाँ बुझैत छी, हम अहाँसँ कतेक प्रेम करैत छी ? अहाँक प्रसन्नता हमरा लेल, हमर जीवनमे कि अछि मुदा हमरा दुनू गोटेकेँ रहबाक लेल घर चाही । घर बनएबाक लेल काम चाही । कामक लेल अपन सर्त होइत अछि । हम ई काज नहि करब तऽ कोनो आओर काज करए पड़त । मुदा काजक बीना काज कोना चलत ।’
ओ लगातार दूर देखि रहल छलीह । मुदा हुनक हाथमे किछु अनुभव भेल ।
हम कहलहुँ, ‘देखू कनिक पैसा जम्मा भेलाक बाद हमसभ मिल कऽ काज करब, अहाँ हमर बाँस बनब आ फेर देखब अहाँ हमरा कतेक छुट्टी दैत छी । मुदा एखनेसँ बुझि लिए अफिस टाइममे नहि लभ नहि रोमान्स, नहि तऽ सभ कारोवार ठप्प भऽ जाएत । हमसभ मिल कऽ रहब । हमसभ प्रसन्न रहब । तखनधरि हमर बेटा सेहो बड़का भऽ जाएत । सोचू एकरबाद कोनो समस्या रहत ?’
कनियाँकँे हाथ कापल । ओ हमर माथ सहलौलीह आ फेर किछु एहि तरहे सहलावए लगलीह जेना ओ बर्षोसँ इहे कऽ रहल होइथि । ई सहलेलाक बाद पत्ता नहि कि छल हम कानए लगलहुँ । कनियाँ हमरा चुप करावएकँे कोनो प्रयत्न नहि कएलीह । बस चुपचाप हमरासँ लेपटाएल रहलीह आ हमरा सहलवैत रहलीह । हुनकर ठन्ढा हाथ धीरे–धीरे गरम होइत जा रहल छल । ओ हमरा अपनामे एहि तरहे समेट लेलीह जेना हम हुनके शरीरक कोनो भाग होइ आ अलगसँ कोनो अस्तित्वे नहि हुए । मात्र कनबाक छोडि़ कऽ । जे रुकएके नामे नहि लऽ रहल छल ।
आ एहिबीच हमर बुधियार बेटा टेलिभिजनकेँ आवाज तेज कऽ देने छल ।
