

♦ प्रा. डा. सुरेन्द्र लाभ
– बौआ नोकरी भेटल ?
– नै ! पार्टीके केन्द्रीय समितिक मिटिङ भेलाक बाद नेताजी आब’ लेल कहने रहथिन ।
– ओ त’ भ’ गेलै एक सप्ताह पहिने ?
– जी आब सचिवालय के मिटिङ के बाद कहलैन ।
– ओहो भ’ गेलै , तखन ?
– पार्टीके वरिष्ट नेता सभक आब एकटा गम्भीर बैसार हएतै तकरबादे सब युवासब के नोकरी देवाक हेतु नीति बनाओल जएतै ।तखन त हमरो नोकरी भेटबे करत ।
– ओहो बैसार भ’गेलै बौआ ।मुदा कोनो नीति फीति नै अएलै ।
– नेताजी कहलैन्ह जे आब महाधिवेशन मे एहि सम्बन्धमे ठोस निर्णय हएतै ।
– आब त’ महाधिवेशन सेहो भ’ गेलै ?
– देखै नै छियै आब महानिर्वाचनके घोषणा भ’ गेलै । नेताजी कहलखिन जे आचार संहिता अखन लागल छै देशमे ।निर्वाचनके बाद जरुर नोकरी देव ।
– निर्वाचन सेहो भ’ गेल । अचार संहिता सेहो समाप्त भेल ।आब ?
– नेताजी कहै छथिन सरकार बनतै तब नै
– यौ बाबू आब त’ सरकारो बैन गेल ।नेताजी मंत्रीयो बनलाह ।आब कहिया ?
– नेताजी कहलखिन अखन अल्पमत के सरकार छै
– अच्छा त ‘ बहुमत के सरकार हएतै तब ?
– जी ! नेताजी कहलखिन जे पाँच वर्ष एहिके लेल कडा मेहनैत कर’ परतै युवासबके । तकर बादे किछु ।ताहीमे लागल छी ।
– बौआ अहाँक धैर्य स्तुत्य अछि ।
– जी बाबू अहूँ धैर्य स रहू ।
