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मैथिली कविताः चलि एलौँ विदेश





वितल डेढ दशकसँ पत्रकारिता क्षेत्रमे निरन्तर सक्रिय विजय झा रेडियो नेपालक बर्दिवास प्रसारण केन्द्रमे समाचारवाचक पदमे कार्यरत छथि । संचारकर्मी झा मैथिली साहित्यमे सेहो कलम चलबैत आबि रहल छथि ।

विजय झा

छोडि कऽ अपन गाम–घर, हम चलि एलौँ विदेश
एहिके अलाबा दोसर उपायो नहि छल शेष ।
मुदा दुःखक बात अप्पन सुनाबी ककरा मित
अर्थ तँगीसँ घरमे सबदिन होइत छलै कलेश ।।

मानु कोनो रोजगार जौँ आई ओहिठाम रहितै
यूवा सबसँ भरल आई अप्पनो गाम रहितै ।
नहि जानि प्रगती कहिया करत अप्पनो देश
छोडि कऽ अपन गाम–घर, हम चलि एलौँ विदेश ।।

याद अबैया अपना सभ खेलै छलौँ ओहि पर्तिके
खेत खरिहान नदि पोखैर अप्पन जन्म धर्तीके ।
बड याद अबैया मेलाके मुरही कचरीबला सनेश
छोडि कऽ अपन गाम–घर, हम चलि एलौ विदेश ।।

माय बाबुजी सदिखन हमरे याद करति हेथिन
बाट पर टक लगौने प्रिय रस्ता तकैत हेथिन ।
धियापुताके हमरा अलाबा हैतै नहि किछ विशेष
छोडि कऽ अपन गाम–घर,हम चलि एलौ विदेश ।।