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मैथिली कविताः भैया, भौजी नालामे खसल





संतोष कर्ण ।

भौजी, भैया पिक,
नालामे खसल ।
टांग छनि लटकल,
माथ छनि धँसल ।।
तानला केलहुँ तऽ,
पैन्ट छल फँसल ।
भौजी भैया पिक……..

दुनु हाथमे क्वाटर,
जेबमे गुटखा कसल ।
थर्रथराई छथि एना,
जेना बिजलीमे सटल ।।
नेमों चुसैलियैन मुदा,
नसा कनियो नै घटल ।
भौजी भैया पिक …….

किया दारू सऽ ओ,
ललै छथि टसल ,
पिबी ओतबे जे ,
अपने सऽ पचल ।
अहीं सब कहु ,
बात हमर जचल ?

भौजी, भैया पिक,
नालामे खसल………..