

✍️ राजन दास
शहिदनगर नगरपालिका
( हाल श्री ज. न. प्रा. मा. बि . गिद्धा बेलापट्टीको कक्षा १२ पशुबिज्ञान तर्फ अध्यनरत )
मिथिला, जेकर ऐतिहासिक आ सांस्कृतिक धरोहर सम्पूर्ण विश्व मे प्रसिद्ध अछि, अपन परम्परागत कला, संस्कृति आ धार्मिक मान्यताक लेल विशेष स्थान रखैत अछि । एहि संस्कृतिके गहनामे “झाँकी–कीर्तन“के अलगे महत्व अछि, जे मात्र धार्मिक आ आध्यात्मिक अनुभवक संग मिथिलाक गौरव आ पहिचानकेँ परिभाषित करैत अछि । झाँकी–कीर्तन मिथिलामे धार्मिक क्रियाकलापक हिस्सा मात्र नहि अछि, बल्कि सामाजिक एकता आ सांस्कृतिक संरक्षणक आधार सेहो अछि ।
झाँकी–कीर्तनः परिभाषा आ महत्व
झाँकी–कीर्तन धार्मिक आ सांस्कृतिक प्रदर्शनक एकटा अद्वितीय स्वरूप अछि, जेकर मूल उद्देश्य भगवानक लीला आ जीवनक शिक्षाक चित्रण करब अछि । ई मात्र संगीत, नृत्य आ अभिनयधरि सीमित नहि अछि, बल्कि ई आध्यात्मिक प्रेरणाक स्रोत सेहो अछि । झाँकी–कीर्तनमे मिथिलाक लोक अपन परम्परा आ धार्मिक मान्यताक आदर्श रूपमे देखबैत छथि ।
इतिहास आ परम्पराः
झाँकी–कीर्तनक शुरुवात प्राचीन कालमे भेल छल । जखन मिथिलाक राजपरिवार आ जनसाधारण अपन धार्मिक आ सांस्कृतिक एकताक प्रदर्शनक लेल ई माध्यमक उपयोग करैत छल । एहि परम्पराक आधार वेद, पुराण आ रामायण आदि धार्मिक ग्रंथसभ अछि । विशेष रूपसँ रामकथा आ कृष्णकथाक घटनाके झाँकी बना कऽ कीर्तनक माध्यमसँ प्रस्तुत करबाक परम्परा मिथिलाक ग्रामीण क्षेत्रमे चलैत आबि रहल अछि । ई परम्परा मनोरञ्जनक माध्यम नहि मात्र नहि कि शिक्षाक एकटा साधन सेहो अछि ।
झाँकी–कीर्तनक स्वरूपः
झाँकी–कीर्तनमे धार्मिक कथाकेँ नाटकीय स्वरूपमे प्रस्तुत कएल जाइत अछि । एहिमे विभिन्न पात्र अपन भूमिका निर्वाह करैत छथि, जेना राम, सीता, राधा, कृष्ण आ अन्य देवताक पात्र । अभिनयक संग–संग कीर्तन गायनक एक विशेष विधा सेहो झाँकीक हिस्सा बनैत अछि । एहि गायनमे हारमोनियम, तबला आ मृदंगक उपयोगसँ संगीतक मधुर स्वरसंग कीर्तन प्रस्तुत कएल जाइत अछि । झाँकी–कीर्तनमे गीतक बोल प्रायः मैथिली भाषामे होइत अछि, जेकर माधुर्य आ भक्ति भावना दर्शककेँ गहींर भावमे डूबा कऽ रखैत अछि ।
धार्मिक आ सांस्कृतिक महत्वः
झाँकी–कीर्तनक मूल उद्देश्य भगवानक महिमा गबैत लोकसभकेँ धर्म आ संस्कृतिसंग जोड़ब अछि । रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा आ कार्तिक पूर्णिमा सन पर्व–त्योहारक अवसरपर झाँकी–कीर्तन विशेष रूपसँ आयोजित कएल जाइत अछि । ई भक्ति प्रदर्शनक माध्यम मात्र नहि अछि, बल्कि समाजक बीच आपसी मेल–जोल आ एकताक सन्देश सेहो दैत अछि । झाँकी–कीर्तनक माध्यमसँ मिथिलाक लोक अपन सांस्कृतिक धरोहरकेँ सजीव रखैत छथि ।
झाँकी–कीर्तनमे मिथिलाक कला आ सौन्दर्यः
झाँकी–कीर्तन मिथिलाक लोक कला आ रचनात्मकताकेँ उजागर करैत अछि । एहिमे कलाकार अपन अद्वितीय प्रतिभा सँ धार्मिक कथाक जीवंत चित्रण करैत छथि। झाँकीक निर्माण मे रंगीन पोशाक, अलंकरण आ परम्परागत आभूषणक उपयोगसँ मिथिलाक सांस्कृतिक वैभव देखल जाइत अछि । झाँकीक मञ्च सज्जा, प्रकाश व्यवस्था आ पृष्ठभूमिसँ समग्र दृश्यक सौन्दर्य अभूतपूर्व होइत अछि ।
सामाजिक एकता आ सामूहिकताक प्रतीकः
झाँकी–कीर्तन मात्र धार्मिक क्रियाकलापक रूपमे सीमित नहि अछि, बल्कि ई मिथिलाक समाजिक एकता आ सहयोगक प्रतीक सेहो अछि । एहि आयोजनमे सम्पूर्ण गामक लोकसभ अपन सहभागिता दैत छथि । पुरुष, महिला, बच्चा आ वृद्ध—सभ झाँकी–कीर्तनक हिस्सा बनैत छथि । एहि प्रकारक सामूहिक आयोजन सामाजिक समरसता आ एकताकेँ सुदृढ़ करैत अछि ।
झाँकी–कीर्तनमे मैथिली भाषाक योगदान
मैथिली भाषा झाँकी–कीर्तनक आत्मा अछि । झाँकीक गीत आ सम्वाद प्रायः मैथिली भाषामे होइत अछि, जेकर माधुर्य आ भावपूर्ण अभिव्यक्ति दर्शककेँ मन्त्रमुग्ध करैत अछि । एहि माध्यमसँ मैथिली भाषाक संरक्षणआ सम्वर्धन सेहो होइत अछि । झाँकी–कीर्तनक गीतसभमे मैथिली लोकगीतक झलक सेहो देखल जाइत अछि ।
आधुनिकताकसंग झाँकी–कीर्तनक सन्दर्भः
आधुनिक युगमे झाँकी–कीर्तनक रूप आ प्रस्तुतिमे परिवर्तन आएल अछि । प्रविधिक उपयोगसँ मञ्च सज्जा आ प्रस्तुति अधिक प्रभावशाली बनल अछि । टेलीभिजन आ सोशल मीडियाक माध्यमसँ झाँकी–कीर्तनकेँ मिथिलाक सीमासँ बाहर सेहो लोकप्रियता भेटल अछि । अखनके समयमे विद्यालय आ सांस्कृतिक संस्थानसभ सेहो झाँकी–कीर्तनक आयोजन करैत अछि, जेकरासँ युवा पीढ़ी एहि परम्परासँ जुडल रहैत अछि ।
झाँकी–कीर्तनक चुनौतिसभः
एतेक महत्त्वपूर्ण आ प्रभावशाली होयबाक बावजूद झाँकी–कीर्तन आजुक समय मे कईटा चुनौतीक सामना क’ रहल अछि । आधुनिक मनोरंजनक साधन, आर्थिक समस्यासभ आ युवाक बदलैत रुझान एहि परंपराक संरक्षणक लेल बाधा बनल अछि । तथापि, मिथिलाक लोकक प्रयास आ श्रद्धा झाँकी–कीर्तनक अस्तित्व केँ कायम राखबाक लेल प्रतिबद्ध अछि ।
निष्कर्षः
झाँकी–कीर्तन केवल मिथिलाक धार्मिक परंपरा नहि अछि, बल्कि ई मिथिलाक गौरव आ शान अछि । एहि माध्यम सँ मिथिलाक संस्कृति, भाषा आ सामाजिक संरचनाक सजीव चित्रण होइत अछि । झाँकी–कीर्तनक माध्यम सँ मिथिलाक लोक अपन धार्मिक आ सांस्कृतिक धरोहर केँ सजीव रखबाक लेल प्रयासरत छथि । एहि परंपराक संरक्षण आ प्रचार–प्रसार मिथिलाक पहिचान केँ और सुदृढ़ करबाक दिशामे एक महत्वपूर्ण कदम अछि । मिथिला क शान झाँकी–कीर्तन, सत्य, सौंदर्य आ श्रद्धाक प्रतीक अछि, जेकर महत्व सदिखन अमर रहत ।
