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हमहुँ तऽ सीते छी !





विभा ठाकुर
केन्द्रिय सदस्य
तराई मधेस लोकतान्त्रिक पार्टी
‘मिथिलाक सिया धिया जगत जननी भेलीह धरनी बनल सूरधाम हे’ एखन तऽ जतए देखु ओतए सीतारामक विवाहक गीत गुंजि रहल अछि । जनकपुरधाम सीताराम विवाहक लेल तैयार अछि । जाहिके लऽ कऽ तैयारीयो खुब जोडतोडसँ कएल गेल अछि । ओना विवाहपञ्चमीके लऽ कऽ जनकपुरधाममे कएल गेल तैयारीपर किछु लिखनाई पानि पर पानि लिखनाई बराबर हएत ।
आई हम तराई मधेस लोकतान्त्रिक पार्टीक केन्द्रिय सदस्य विभा ठाकुरसँ विवाहपञ्चमीपर केन्द्रित रहि कऽ बातचित कएलौँ । ओ बातचितक क्रममे जे बात कहलथि ओ हमरा सिधे हृदयमे भेद गेल । ओ कहैत छथि सीताराम मिथिलासँ जुड़लथि तएँ पावन नहि भेल अछि, हमर मिथिला पावन अछि तएँ लक्ष्मी नारायण बेटी जमाए बनलथि । ओ आगा कहैत छथि जनकपुरधामवासी विवाहपञ्चमीके भव्य बनाबए कोनो कसर बाँकी नहि रखने छथि । विवाहपञ्चमीक समयमे जनकपुरधामक एहन माहौल रहैत अछि मानु जेना सीताराम पुनः चलि आएल होइथ ।
सीताके लऽ कऽ पूरा मिथिला गर्व करैत कहैत छथि, ‘सीता हम्मर बेटी, हम्मर बहिन’ । मुदा दुःख तखन लगैत अछि जखन ईहे बात जनकपुरधामवासी, मिथिलावासी अप्पन व्यवहारमे लागु नहि करैत छथि । मिथिलाक हरेक बेटी सीता अछि से सभकिओ कहैत छथि, मुदा व्यवहार देखि हम पुरुष महान तेना लगैत रहैत अछि । एक दिन मात्रे खुब जोरसोर कएलासाँ कि सम्मान बढि जाएत ? हम ई नहि कहैत छी जे विवाहपञ्चमी मनौनाई उचि नहि अछि, ई तऽ हमरा अहाँक गौरव, जे हएबाको चाही ।
हम तऽ ई कहि रहल छी जे आदर सम्मान सीता बहिनके करैत छी, वएह सम्मान मिथिलाक प्रत्येक बेटी बहिनके हएबाक चाही, तखन मात्रे ओहोसभ कहतीह हमहुँ तऽ सीते छी । सीताराम विवाहसँ इएह पैघ शिक्षा लऽ सकैत छी । एहिसंगे रामायण अर्थात सीतारामक जीवन पिता केहन हएबाक चाही, राजा केहन हएबाक चाही, भाई केहन हएबाक चाही, पतीपत्नी केहन हएबाक चाही, बेटी केहन हएबाक चाही से शिक्षा प्राप्त होइत अछि । तएँ एहिमे होबएबला हरेक गतिविधि, संस्कार जीवनके वास्तविक व्यवहारमे सेहो लागु हएत तऽ देखावटी कम लागत । जाहिसँ अपनत्व आओर बढत ।
प्रस्तुतीः शिवानी मिश्र