

मन तऽ हमरो होइत अछि, जे पावनि तिहारक समय अछि कनि आनन्द उठैबतौँ । मुदा इएह समयमे काजक भार एतेक बढि जाइत अछि जे कखन दिन होइत अछि कखन राति से पत्ते नहि चलैत अछि । मुदा कि कऽ सकैत छी, पावनि तिहारमे काज करही पड़त । फेर ई अवस्था मात्र हमरेसाथ अछि से नहि, ईएह अवस्था अधिकांश महिलाक अछि ।
हम्मर माँ सेहो इएह कहैत रहैत छथि । महिलाक जीवन अहिना जिम्मेबारीसँ भरल होइत अछि ।
पावनि तिहारक ओरियाओनक लेल घरमे कि आनए पड़त, कि बनाबए पड़त ई सभके जिम्मा सामान्य रुपसँ महिलेसभक कन्हापर रहैत अछि । ओना कहल जाए तऽ महिलासभक लेल ई कोनो नव बात नहि अछि । काज तऽ सभ दिन रहबे करैत अछि मुदा पावनि तिहारक समय अबिते काजक मोटा आओर बढि जाइत अछि ।
दशमीसँ लऽ कऽ छठिधरि काजक लेल भागम भाग रहैत अछि । जतए पावनिमे पुरुषके आ धियापुतासभ मनोरञ्जनक लेल घूमघाममे रहैत अछि ओहिठाम माए, पुतहु, बेटीसभ पावनिके ओरियाओनक लेल काजमे व्यस्त रहैत अछि ।
दशमीमे १० दिनक पूजाके चाप आ ओहिके बाद दीपावलीक सरसफाई ताहिके बाद निष्ठापूर्वक मनाओल जाएबला छठिके तयारी एहिसभमे महिलेसभ लागल रहैत छथि ।
पूजा पाठक तैयारीसँ लऽ कऽ पाहुनक स्वागत सत्कार तथा भोजनके परिकार बनाबएधरिके जिम्मेबारी महिलेसभके रहैत अछि । ई सभ देखि हमरा मोनमे प्रश्न उब्जैत रहैया कि पावनि तिहारक रंगमे रंगाएके अधिकार पुरुषेके अछि ? कि घरक काजमे सहयोग कएलासँ पुरुषक गरिमामे ठेस लागि जाएत ? ओना कतेको पुरुषके मूहसँ सुनने छियैन पुरुष भऽ कऽ इएह करब तऽ कि महिला पुरुषक काज करतै ? कि काजक सेहो लिङ होइत अछि ?
कहएके लेल समाज परिवर्तित भऽ रहल अछि, महिला पुरुषमे कोनो भेद नहि तऽ किए जिम्मेबारी एक समान नहि होइत अछि । महिलाक एहने अधिकारक लेल बात उठाउ तऽ नारीवादी कहि सम्बोधन कएल जाइत अछि । जहिना अधिकार भेटल अछि ओहिना अधिकार प्रयोग करए देल जेतै तथा जिम्मेबारी सेहो बराबरी रुपसँ बाँटल जेतैक तऽ किए आवाज उठाबए पड़तैक । नहि सभििदन तऽ पावनि तिहारक समयमे घरक महिलाके काजमे सहयोग कऽ काजक भार किछु कम कइए सकैत छी ।
आब तऽ महिलासभ सेहो घर बाहर काज करए जाइत अछि । पुरुषसभ तऽ बाहर काज करिते अछि । ई परिवर्तन जहिना समाजमे आएल अछि ओहने परिवर्तन मानसिकतामे सेहो आएब आवश्यक अछि । भाषणमे मात्रे महिला पुरुष एक समान कहलासँ नहि हएत । व्यवहारमे सेहो ई लागु हएब आवश्यक अछि । यदि तेहन नहि हएत तऽ पावनि तिहारक समयमे महिलासभक ईच्छा अकांक्षा चुल्हामे झोकाइत रहत ।
