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मनमे लागलः स्वयं कहिओ कक्षा नहि लेबएवला क्याम्पस प्रमुख बनलापर !





सुजीत कुमार झा ।
डा. बसन्त कर्ण रामस्वरुप रामसागर बहुमूखी क्याम्पस जनकपुरधामक क्याम्पस प्रमुखक पदभार ग्रहण कएलन्हि अछि । एक दू दिनसँ सामाजिक सञ्जालमे हिनका खूब बधाइ आबि रहल अछि ।
स्वभाविके छैक राराबकेँ प्रमुख होएब कम बड़का उपलब्धि नहि होइत अछि । मात्र योग्यता पदक लेल आवश्यक नहि रहल समयमे जोड़जार लगाबही पड़ैत छैक । इहो नहि लगेने हेता से नहि कहल जा सकैत अछि । प्रजातान्त्रिक विचारधाराक भेलाक बादो अगिला कार्यकालमे बामपन्थी भऽ गेल रहथि जखन अगिलाबेर क्याम्पस प्रमुख नहि बनाओल गेलन्हि तखन पुनः प्रजातान्त्रिक खेमामे एलथि । व्यक्तिसँ बेसी पद महत्वपूर्ण बुझएवला समाजमे बिचारधारा बहुत माने नहिओ राखि सकैत अछि । डा. साब बिरले सेहो नहि भऽ सकैत छथि । पद चाहबए करी ओहि लेल सभ अस्त्र नहि प्रयोग कएने रहितथि तँ ई पदपर कोनो दोसर व्यक्ति शोभा बढ़ोने रहितथि ।
जे किछु । आइ जखन डा. कर्ण पदभार ग्रहण कएलन्हि तँ मनमे एकटा बिचार आएल जे जहिआ ओ, एकटा शिक्षक छलथि कहिओ क्लास नहि लैत छलथि । क्याम्पसमे एलहुँ हाजिरी कएलहुँ आ फिर्ता चलि गेलहुँ । विद्यार्थीकेँ पढ़ाएब हिनक शब्दकोषमे छलन्हि नहि, एहनमे जखन ई स्वयं क्याम्पस प्रमुख बनलथि अछि पढाइकेँ विकास कोना हेतैक ई प्रश्न तँ बनैत छैक !
फेर ई जखन स्वयं क्याम्पस चिफ बनलथि अछि कोना नैतिकतासँ दोसर शिक्षककेँ कहथिन नियमित कक्षा चलावए !
राराब क्याम्पसमे केहन क्याम्पस प्रमुख चाही कनिदिन पहिने एकटा शिक्षाविद्सँ पुछने रहियन्हि तँ ओ बाजल रहथि – नियमित कक्षा चलाबएवला, परीक्षामे चोरी नहि होइक ताहिपर कड़ाइ करएवला, भौतिक विकास संगहि प्रागिक विकासपर जोड़ देबएवला ।
डा. कर्णकेँ एहिपर जोड़ देबही पड़तन्हि । भलहि अपने कक्षा नहि लैत छलथि मुदा नियमित कोना कक्षा शुरु होइक एहिपर गम्भीरता देखाबही पड़तैक । मात्र आर्थिक तरक्कीक लेल ओ पद खासे प्रभाव नहि दऽ सकैत अछि ।
डिग्रीक लेल मात्र नामांकन करएवला लोककेँ परीक्षामे जँ कड़ाइ करथिन ओ कड़ाइ करएवलाकेँ कि स्थिति हेतैक ? एकबेर सोचलए मात्रसँ डेराउन परिणामक संकेत देखारहल अछि । ई बातक गृहकार्य कइए कऽ डा. साब आएल हेताह ।
आजुक २१अम शताब्दीमे नेपालमे विश्व परिवेश आ नेपाल अनुकूलक पाठ्यक्रम तथा शिक्षा प्रणाली होबए नहि सकब पक्के दुःखक बात अछि । शिक्षा जेहन अत्यन्त महत्वपूर्ण क्षेत्रमे राज्य खुलिकऽ लगानी करए नहि सकैत अछि आ कएल गेल लगानीक सेहो प्रतिफल सकारात्मक नहि अछि । एहिमे राज्ये गैरजिम्मेवार रहल देखल गेल अछि ।
नेपालक पाठ्यक्रममे किछु स्तरीयता भेल सेहो पाठ्यपुस्तक, पाठ्यवस्तु, पाठ्यसामग्री आ शैक्षिक सामग्रीसभमे गुणात्मकता नहि पाओ्ल जाइत अछि । मात्र सैद्धान्तिकताकेँ जोड़ देबए खोजल गेल अछि । विश्वविद्यालयसँ उत्पादित जनशक्ति आत्मनिर्भर होबए आ बजारमे बिकए नहि सकैत अछि । एहिसँ लगानीक प्रतिफल अत्यन्त न्यून अछि ।
शैक्षिक बेरोजगार भेलासँ प्रमाणपत्र बाकसमे थन्काकऽ विदेश जाए लेल बाध्यता अछि । पहिल बात बजारमे उत्पादित जनशक्तिक माँग नहि अछि तँ दोसर उत्पादित जनशक्ति दक्ष आ उत्पादनमूलक नहि अछि । विद्यार्थी किताब रटिकऽ प्राप्ताङ्कक भारीसँ पिचाएल अछि । ओसभ सिर्जनात्मक आ व्यावहारिक बनए नहि सकल अछि । विद्यार्थीकेँ अपन रुचि कथिमे अछि ताहिसँ बेसी अभिभावककेँ कि बनावए पड़लैक ताहिसँ पिचाएल अछि । समग्रमे बच्चा अपन पढाइमे स्वतन्त्र नहि अछि, दोसराक लेल पढए आ नम्बर लाबएकेँ रहैत अछि । एहिठामक बात कएल जाए तँ कतेक एखन अछि नोकरी करैत अछि मुदा डिग्री पावए लेल नामांकन करौने अछि । कक्षामे आबएकेँ बाते नहि मात्र परीक्षा देबएकेँ छैक बाहर कपी लिखारहल रहैत अछि मात्र कपी चेन्ज करएकेँ रहैत अछि ।
विश्वमे शिक्षाक गुणात्मकताक दृष्टिकोणसँ जापान, जर्मन, क्यानडा, नेदरल्यान्ड, बेलायत, फिनल्यान्ड, अस्ट्रेलिया, अमेरिका आ फ्रान्स जेहन देश अग्रपंक्तिमे रहल अछि । नेपाल किए पाछाँ अछि बुझावएकेँ आवश्यकता नहि ! क्याम्पस प्रमुखक नियक्तिएसँ बहुत किछु बुझा दैत अछि ।
राजनीति सेहो डा. कर्णक आगाँमे चुनौति बनि सकैत अछि । ओना विषम परिस्थितिमे क्याम्पस प्रमुख भऽ गेल छथि । एहिमे कांग्रेसी नेतासभक जोगार लगाबएमे सफल छथि मुदा एतबी काफी नहि अछि । जेना चलैत छल ओकर निरन्तरतासँ कनिको लिकसँ नहि हटि सकैत छथि । जँ हटता तँ सहजे क्याम्पस नहि चलि सकैत अछि ।
सभसँ बेसी चाही तँ ओ अछि इच्छाशक्ति । हमसभ बहुतबातमे ताजगी होबए नहि सकल अवस्था मात्र अछि । समयानुकूलक शिक्षा नीति, प्रणाली आ पद्धतिकेँ अवलम्बन करए नहि सकि रहल छी । हमसभ कहिआधरि एहने कमजोरी स्वीकारैत रहब ? ई महत्वपूर्ण प्रश्न अछि जेना लगैत अछि ।
राज्य एहिमे चुकल अछि । एकटा कहाबतसँ मनमे लागल बातकेँ अन्त करए चाहैत छी रोपब बबुर तँ आम कतएसँ पाएब !