

सुजीत कुमार झा ।
जनकपुरधामक पूर्व मेयर लालकिशोर साहक सक्रियता आइकाल्हि अत्यधिक बढ़ल अछि । ककरो उपनायन विवाह, घरडेरासँ लऽ कऽ कोनो शुभ अशुभ जे किछुकेँ आमन्त्रण आएल कि हुनक घरपर पहुँच जाइत छथि । कांग्रेस नेता विमलेन्द्र निधिक बाद यदि सभसँ बेसी उत्सव समारोहमे पहुँचएवला किओ छथि ओइमे लालकिशोरजी सेहो छथि ।
फेर एहन समारोहमे मात्र नहि जतए नगरमे चर्चा होइक ओहिठाम सेहो देखाए लागल छथि । आइ मानव सेवा आश्रम पहुँचल छलथि । काल्हि जनकपुरधामक नगरप्रहरी ओ आश्रममे बदमासी कएने छल जकर चारुदिस आलोचना भऽ रहल छलकि । ओहि बातकेँ लऽ कऽ वर्तमान मेयरकेँ सेहो आलोचना भेल छलैक मुदा एखनकेँ मेयरकेँ ई आलोचना तलोचनासँ मतलब नहि रहैत अछि ! तँए हुनकापर कोनो टिप्पणी करएकेँ लोक आवश्यकता नहि बुझैत अछि । तँए हमहुँ नहि बुझैत छी !
जेकिछु लालकिशोरजी मानव सेवा आश्रममे पहुँच । सामाजिक सञ्जालमे लिखलन्हि जकर भवानुवाद एहि प्रकार अछि – मानव सेवा धर्म निर्वाह करएवला अग्रणी संस्थाक रूपमे जनकपुरधाम स्थित ‘मानव सेवा आश्रम’ रहल सर्वविदिते अछि । मानव सेवामे दिनराति खटएवला आश्रमक सेवादारसभसंग किछु उच्छृंखल समूह कएने अभद्र व्यवहार दुःखद आ निन्दनीय अछि । एहन कार्यमे संलग्न जे किओ छथि हुनका सम्बन्धित निकाय कारवाहीक दायरामे लाबथि । आइ मानव सेवा आश्रम पहुँच घटनाक विषयमे जानकारी लेलहुँ संगहि आश्रम परिवारसंग किछु समय वितावएकेँ अवसर समेत पेलहुँ ।
एहिसँ पहिने गंगासागरघाटपर जननेता स्व.रामनारायण मिश्रक शालीक निर्माणकेँ लऽ कऽ भऽ रहल आन्दोलनमे सेहो पहुँचल रहथि । घाटपर शालीक वा स्मृति भवन नहि बनौक खुल्ला अभिव्यक्ति देलन्हि ।
जनता कि चाहैत अछि एकर नब्ज पकड़एमे नेतासभ माहिर होइत अछि । फेर जे व्यक्ति एकबेर मेयर आ एकबेर उपमेयर भऽ चुकल अछि ओ जनताक मूड बढि़या जकाँ नहि बुझने हेता तेहन बाते नहि अछि । तँए जतए–जतए ओहन विरोधक आवश्यकता भऽ रहल अछि – दबल शब्दमे किए नहि हुए अपन विरोध करएसँ वा अपन बात राखएसँ नहि चुकैत छथि ।
अपन रणनीति अनुसार आगाँ बढि़ रहल छथि । एकटा बर्ग छैक जे एकसाल पहिनहिसँ कहए लागल अछि एखनुक मेयरसँ बढि़या पहिलकेँ मेयर ! ई कहएवला लालकिशोरेजीक लोक छथि तेहन नहि मुदा वर्तमान मेयरक कामकाज करएकेँ तरिका सेहो किछु गोटेकेँ एहन बात मुँहसँ उगला रहल अछि । मुदा जेना कऽ होइक पूर्व मेयरजीक चर्चा तँ होइत रहैत अछि । फेर इएह चर्चा हिनका फेरसँ सक्रियता बढा देलक अछि । सक्रियता माने जनताक नजदिक जाएब फेरसँ उम्मेदवारी देब आ फेरसँ ‘ऐस’ करब !
फेरसँ ऐस करब लिखएकेँ पाछाँ जहिआ ओ पदमे रहथि ओहि समयक काजकेँ जनता बढि़ए जकाँ मूल्यांकन कएने अछि । सभपार्टी एकठाम रहलाक बादो भारी मतसँ अगिला चुनाबमे हारल रहथि । बात करएकेँ व्यवहारक प्रसंग अबैत अछि तँ फेर एहनो लोक कहए लगैत अछि – भलहि काजक ममलामे जिरो छथि मुदा लालकिशोरसँ एखनकेँ मेयर बढिया जकाँ बातो तँ करैत छथि । वर्तमान मेयर सम्मानो तँ करैत छथि ।
एकदिनक लेल जनता मालिक होइत अछि तँए जनता दरबारमे हाजिर लगाएब नीके बात अछि । जनते छैक कहुँ जनताक मुड डोलि गेल मुदा जे हिनक क्रूर शासन देखने अछि सहजे हिनका पक्षमे घैमि जाएत एखने कहब मुस्किल अछि !
