


नेपाल भारतक शायद कोनो स्थान एहन नहि अछि जाहिठाम मन्दिर वा धार्मिक स्थल नहि हुए । एहिठाम एक धर्मक लोक नहि, अनेक सम्प्रदायक लोक रहैत अछि । इएह कारण अछि ई दुनू देशमे मन्दिर, मस्जिद आदि क गिनती अधिक अछि । अहीमेसँ एकटा मन्दिरक बारेमे आइ अपनेसभकेँ बतावए जा रहल छी, जे बिहारक सुपौल जिलाक गणपतगंज नामक क्षेत्रमे स्थित अछि । विष्णु भगवानक समर्पित ई मन्दिर अपन भव्यताक लेल संसारभरिमे प्रसिद्ध अछि । अपितु कहल जाइत अछि जे बिहारमे स्थित ई मन्दिरक तुलना चेन्नइक प्रसिद्ध विष्णु मन्दिरसँ कएल जाइत अछि ।
ई मन्दिरमे दर्शनक लेल आइ भोरमे हम पहुँचल छलहुँ । ई मन्दिरक आकर्षण आ उर्जा हमरा बेर–बेर ओहिठाम पहुँचए लेल बाध्य करैत अछि । किछु वर्ष भीतर हम कएवेर एहिठाम पहुँच गेलहुँ ।
ई मन्दिरकेँ कोगणपतगंज विष्णु मन्दिरक नामसँ जानल जाइत अछि । पौराणिक मान्यताक अनुसार ई मन्दिरक निर्माण करोड़ोक लागतसँ गणपतगंज निवासी जय नारायण मल्लिकक सुपुत्र डाक्टर पीके मल्लिकक द्वारा कएल गेल अछि, जे सन् २००९ सँ शुरू भेल छल । बताओल जाइत छल ई विष्णुधामक वरदराज पेरुमल देवस्थानक नामसँ सेहो जानल जाइत अछि । एतए पूजा करएवला पुजारी कोनो आम पुजारी नहि अपितु चेन्नइक प्रसिद्ध विष्णु मन्दिरमे पूजा करएवला शिक्षित पुजारी छथि । हुनके द्वारा मन्दिरमे पूरे विधि–विधानक संग पूजा–अर्चना कएल जाइत अछि ।

ई भव्य मन्दिर, एहि क्षेत्रमे पर्यटन आ आस्थाक प्रमुख केन्द्र अछि । विष्णु भगवानक संग–संग मन्दिरमे अन्य देवी–देवताक सेहो मूर्तिसभ स्थापित अछि जिनक पूजा वैष्णव आचार्य करैत छथि ।
ई मन्दिरक भगवान विष्णुकेँ एकबेर जे देखलन्हि ओ ओहिमे रमि जाइत अछि । एकटकी लगौने मात्र प्रतिमाकेँ देखिते रहैत अछि । बिहारक शेखपुरा जिलामे बरबीघा–नवादा रोडपर स्थित ई विशेष विष्णु धाम । मन्दिरमे भगवान विष्णु धामक ७.५ फीट ऊच्च आ ३.५ फीट मूर्ति स्थापित अछि । विष्णु धाम भगवानक ई मूर्ति स्वरूपमे अछि आ चारि हाथमे शंख, चक्र, गदा तथा पद्मम स्थित अछि । ई दुर्लभ मूर्ति जुलाई १९९२ मे पोखरिमे खुदाइक क्रममे भेटल छल ।

मूर्तिक वेदीपर प्राचीन देवनागरीमे अभिलेख ‘ऊं उत्कीर्ण सूत्रधारसितदेवः’ उत्कीर्ण अछि । ई लिपिमे आकार, इकार आ ईकारक मात्रा विकसित भेल अछि । ब्राह्मी लिपिमे छोट ठाढ डाढिक स्थानपर ई पूरे डाढि बैनि गेल अछि । विशेषज्ञ मानैत छथि जे एहि प्रकारक लिपि उत्तर भारतमे नवम सदीक बाद भेटैत अछि । बता दी जे प्रतिहार राजा महेन्द्रपाल दिघवा–दुली दानपात्रमे ई शैलीक लिपिक प्रयोग पुरान समयमे कएल जाइत छल । ई अभिलेखमे मूर्तिकार ‘सितदेव’ क नाम सेहो लिखल अछि ।

मन्दिरमे भोरसँ साँझधरि दर्शनार्थीक भीड़ लागल रहैत अछि । जँ ई मन्दिरमे नहि पहुँचल छी जँ एकबेर अवश्य पहुँची । हम तँ आइ भोरमे किछु घण्टा ओहिठाम बिता कऽ निकललहुँ अछि । अद्भूत दर्शन भेल अछि ।
चौधरी नेपाली कांग्रेसक युवा नेताक संगहि माँ जानकी यातायात प्रालि.क अध्यक्ष सेहो छथि
