

सुजीत कुमार झा
धनुषाक क्षीरेश्वरनाथ नगरपालिकाक रमदैयास्थित वाटरल्यान्ड पार्कमे शनिदिन भेल झडप तोडफोड घटनाक बाद विद्यार्थीक संस्कारसँ जोडि़ कऽ किछु गोटे प्रश्न उठा रहल छथि । एहन प्रश्न उठावएवलामे व्यापारी नेता मात्र नहि किछु सामुदायिक विद्यालयक शिक्षक प्रधानाध्यापकसभ छथि । किछु जातीय संगठनक लोक वा कही व्यवसायीक नातागोताक लोक सेहो । वाटरल्यान्ड पार्कमे क्षति भेल छैक आर्कोशित हएब स्वभाविक छैक मुदा कि सभ तरहे विद्यार्थीकेँ दोष देखा वाटरल्यान्ड पार्क घटनासँ निकलल जा सकैत अछि ? कि व्यवसायीकेँ कोनो दोष नहि ?
प्रश्न तँ बनैत छैक । एहिपर सेहो बात होइक बहस हएब स्वभाविक छैक ।
कोनो सामानमे पचास रुपैया मात्र सस्ता कऽ देलासँ दोकानपर लाइन लागि जाइत अछि ई परम्परा जनकपुरधामक मात्र नहि नेपाल भारतक अधिकांश स्थानक अछि । फेर एतेक प्रतिशत एकहिबेरमे छुट देलापर भीड़ नहि हेतैक मेला नहि लगतैक बाते नहि छैक । स्मरण करी पहिने सिनेमा हलमे शनिदिन कऽ विद्यार्थीसभकेँ भोरका सोमे टिकटमे आधा छुट देल जाइत छल आधा छुट भेलापर कतेक भीड़ होइत छल । सभ सिनेमा हाँल हाउस फुल । प्रायः प्रायः मारि होइत छल ।
९ सयकेँ सामान १ सयमे एहनो छुट होइत छैक ! फेर प्रचार कऽ मेला लगालेब आ भीड़ व्यवस्थापनक लेल व्यवसायी लग कोनो योजना नहि ? इएह व्यवसाय होइत छैक । पूर्वतयारीक अभाव स्पष्ट देखल गेल । कतेकधरि विद्यार्थी आबए सकैत अछि वा आबए नहि देब से सामान्य ज्ञान नहि राखिकऽ हावाक तालमे कार्यक्रम तए कएलाक बाद हएत माने इएह । दू संस्थाक लोभसँ एहिप्रकारक दुर्भाग्यपूर्ण घटना भेल ।
१८–२० वर्षक किशोरसभकेँ अपराधी मात्र बना देलासँ किछु सम्भव नहि । जतवए दोषी अछि विद्यार्थी ओहिसँ कम वाटरल्यान्ड पार्क सञ्चालक आ कृष्णा फाउण्डेशनक लोक नहि । कम समयमे बेसी कमाएकेँ लोभ लोककेँ किछुसँ किछु करए लेल बाध्य कऽ दैत अछि । किछु उदाहरण इहो बनल अछि ।
वाटरल्यान्ड पार्क सञ्चालन जनकपुरधामक लेल नव व्यवसाय अछि । राजनीति आ व्यवसायसँ जुड़ल शक्तिशाली लोकसभ एहिमे लगानी केने छथि । जे किओ लगानी कएने छथि बढिया बात भेलैक । एहिसँ जनकपुरधामक पर्यटन व्यवसायमे मदत करत मुदा एहन छोटका–छोटका त्रुटी करैत रहब तँ व्यवसाय कोना आगाँ बढि सकत । काल्हि जाहिरुपसँ झडप भेल छल ओ घटनामे ककरो मृत्यु भऽ जाइत तँ आओर कि होइत ?
व्यवसाय करु मुदा व्यवस्थापनमे त्रुटी नहि होएबाक चाही । पुनः कही वाटरल्यान्ड पार्क घटनामे व्यवस्थापकीय त्रुटी अवस्य भेल छैक । विद्यार्थीसभकेँ सेहो संयमता अपनाएब आवश्यक अछि । १२ कक्षाक बाद उच्च शिक्षाक लेल ओसभ आगाँ बढता । हुले–हुलेमे लगैत रहलासँ जीवन ठमकि सकैत अछि प्रगतिपथपर नहि बढि सकैत छी ई सत्यकेँ बुझए पड़त ।
विद्यार्थीक जीवनमे अनुशासन अति आवश्यक होइत अछि । एकर अर्थ अछि नियम आ मानकक अनुसार आचरण करब । एकर महत्व एहिकारण अछि जे ई व्यक्तिक संगठित, समयबद्ध, आ लक्ष्यदिस अग्रसर बनबैत अछि । भलेही अनुसन्धानक विषय अछि के सही वा के गलत अनुसन्धान भेलापर मात्र किछु कहल जा सकैत अछि मुदा सरसर्ती देखलापर वाटरल्यान्ड पार्क घटनामे बहुतरास त्रुटी देखा रहल अछि ।
