

♦रिंकी झा ‘ऋषिका’
बदलल मन ई
बदलल ठौर-ठेकाना
जन्म-जन्म केर आबाजाही
सब किछु बदलल बदलल सन
लागल
वयसो बदलल बदलल
रुचियो बदलि गेल
सब सपना रंगक
जहिया कहियो समय,
प्रश्न संग सोझा आओत
पूछत प्रेमक नूतन परिचय
– प्रियतम !
निर्भय ठोर हमर ई
अहिंक नाम संग बिहुॅंसत
सदिखन
