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सुसंस्कृत जीवनक चर्चा





संस्कृति जहिओ सेहो उच्चतम तहमे रहैत अछि । हमसभ केहन वातावरण सिर्जना करैत छी ? ओ महत्वपूर्ण पक्ष अछि । नकारात्मक वातावरण भीतर सकारात्मक व्यवहारक अपेक्षा करब कठिन होइत अछि । जतए असभ्य समाज आ व्यवहार होइत अछि, ओतए अराजक कानुन बनैत अछि । दबाब मे काज करबाक बाध्यता पूरे समाजक संरचनाके तहस–नहस कऽ दैत अछि ।

 सुजीत कुमार झा


मनुष्य जखन एहि धरतीपर जन्म लैत अछि ओ अवोधे रहैत अछि । ओहि समय अपन नीक बजाए सोचवाक क्षमता नहि ओकरा लग रहैत अछि आ नहि कोनो तथ्यकेँ बुझएकेँ । परिस्थितिसँ लाभ उठावएकेँ वा अपन गुण कर्म स्वभावकेँ परिस्किृत करएकेँ शक्ति रहएकेँ बातहि नहि । मनुष्यक जीवनभात्रा कोनो पाठशालामे भर्ती कराओल गेल छोट वालक जकाँ आरम्भ होइत अछि । ओहि समय ओकरा जे किछु सिखा देल जाइत अछि, बुझादेल जाइत अछि उएह अनुरुप ओ आगाँ बढ़ैत अछि । ओहि समय व्यक्तित्वक आधारशिला राखएकेँ उत्तरदायित्व स्वाभाविक छैक –अभिभावककेँ रहैत अछि । मुदा जखन किछु सोचएकेँ बुझएकेँ लायक स्थिति भऽ जाइत अछि आ व्यक्ति अपन बढि़या खराब देखए लगैत अछि तखन अपन व्यक्तित्व एहि प्रकारसँ गढब आरम्भ कऽ देबाक चाही, जाहिसँ जीवन साधना भेलापर गर्व आ गौरवक अनुभव कएल जा सकए ।
सर्वदा व्यवहारे स्यात् औदार्यं सत्यता तथा ।
ऋजुता मृदुता चापी कौटिल्यं च न कदाचन ।।
एकर अर्थ अछि, व्यवहारमे सदति उदारता, सत्यता, सरलता आ मधुरता हएबाक चाही । व्यवहारमे करुणा हएबाक चाही, कटुता नहि । जीवनकेँ सु–संस्कृत एवं सभ्य वातावरणमे जीबए मनुष्यकेँ आधारभूत आवश्यकता अछि । घर, संस्था, कार्यालय, विद्यालय, राजनीतिक क्षेत्र सभक वातावरण अनुकूल व्यवहारसँ मात्र व्यक्तिक जीवन आ राष्ट्र दुनूमे विकासक अनुभूति कएल जा सकैत अछि । ककरो घरक वातावरण शान्त, प्रेमल होइत अछि तँ ककरोे झगड़ा विवाद मात्र होइत आएल देखल जाइत अछि ।
राजनीतिक वातावरण बढि़या भेल देशसभमे नागरिकमे इमान्दारिता आ सहयोगी भावना भेटैत अछि । भ्रष्ट वातावरणमे बढ़ल व्यक्तिसँ इमानदारिताक परिणाम खोजब कठिन होइत अछि जानकारसभ कहैत छथि । भ्रष्ट संस्कारक कारण देशक विभिन्न स्थानक सडकसभमे आन्दोलन होइत रहैत अछि । संस्कृति जहिओ सेहो उच्चतम तहमे रहैत अछि । हमसभ केहन वातावरण सिर्जना करैत छी ? ओ महत्वपूर्ण पक्ष अछि । नकारात्मक वातावरण भीतर सकारात्मक व्यवहारक अपेक्षा करब कठिन होइत अछि । जतए असभ्य समाज आ व्यवहार होइत अछि, ओतए अराजक कानुन बनैत अछि । दबाब मे काज करबाक बाध्यता पूरे समाजक संरचनाके तहस–नहस कऽ दैत अछि ।
व्यक्तिमे मनोवृत्ति निर्धारण
कोनो व्यक्तिक उचाइ ओकरद्वारा देखावएवला व्यवहारद्वारा निर्धारण कएल जाइत अछि । उदाहरणक लेल अल्बर्ट आइन्स्टाइनकेँ लेल जा सकैत अछि । आइन्स्टाइन अपना समयक शिखर पुरुष छलाह । किनको भौतिकशास्त्रमे समस्या परए, आइन्स्टाइन लग जाइत छलाह । आइन्स्टाइन सामान्य सापेक्षतावादक सिद्धान्तकेँ अन्तिम रुप देबए लेल संघर्षरत छलाह । ओ सिद्धान्तकेँ एक इन्च लम्बाइक गणितीय सूत्रमे प्रस्तुत करए चाहैत छलाह । भौतिक शास्त्रक जिनिएस भेल होइतहुँ अपन सिद्धान्तकेँ पूर्ण रुप देबए सइक नहि रहल छलाह । एकरा लेल गणितक सहयोगक आवश्यकता छल ।
ओहि समयमे आइन्स्टाइनकेँ सहयोग करए सकएवला एक मात्र व्यक्ति रहथि, डेभिड हिलबर्ट । हिलबर्ट अपन समयक महानतम गणितज्ञक रुपमे चर्चित छलाह । ककरो गणितमे समस्या अएलाक बाद, ओ हुनकासँ भेट करए जाइत छलाह । आइन्स्टाइन समाधानक आशा रखैत हिलबर्टक अफिस पहुँचलाह । हिलबर्टसंग भेट करब ओतेक सहज नहि छल । कहल जाइत अछि हुनका भेटए आवएवलाक लेल एकटा परीक्षा पास करब नियम राखल गेल छल । परीक्षामे पाँचटा गणितक प्रश्न पुछल जाइत छल । हिलबर्टकेँ भेटक इच्छा राखएवलाकेँ सभ प्रश्न मिलावए पड़ैत छल । आइनस्टाइनकेँ एहि विषयमे जानकारी भेलाक बाद ओ कनी देरक लेल असमञ्जसमे पडि़ गेलाह । भेटक लेल परीक्षामे पास होबए पड़त ? ई केहन नाटक कएने छथि ? ओ तमसाइत घर चलि अएलाह । सिद्धान्त पूर्णता नहि पाबि रहल वर्षो भऽ गेल छल ।
हुनक मनमे आएल– कि हेतैक । एखन हिलबर्ट जतेक भाउ खाथि हम भेटब । आखिर समस्याक समाधान तँ हुनकेँ संग अछि । हुनकासंग भेटए हल करएवला गणितक प्रश्नसँ बड़का हमर समस्या अछि । ओतवए महत्वपूर्ण सेहो । तकरबाद आइन्स्टाइन दोसरबेर हिलबर्टक अफिस गेलथि । प्रश्नपत्र मंगौलन्हि । जल्दीसँ ओ हल कऽ घर घूरलाह । किछु दिनक बाद परिणाम आएल । ओ फेल छलाह । ओ हिलबर्टकेँ भेटए नहि सकताह ।
इहो कहल जाइत अछि एक दिन हिलबर्ट अपनासँ भेटए आएलसभक रेकर्ड फाइल देखि रहल छलाह । ओहि समय आइन्स्टाइनक नाम नजरि अएलन्हि । आइन्स्टाइन विज्ञान जगतक परिचित नाम रहथि । हिलबर्ट चकित भेलथि । ओ तुरुन्त सन्देश पठौलन्हि– प्रिय मित्र आइन्स्टाइन अहाँं हमरासँ सहजे भेटि सकैत छी । ओ परीक्षाक झन्झट अपनेकेँ लेल नहि अछि । हम स्वयं अपनेसँ भेटए लेल लालायित छी, उत्साहित छी ।
आइन्स्टाइन अस्वीकार करैत सन्देश पठौलन्हि– नहि, हम अपनेसँ सहजे नहि भेटब । सहज बाट जाएब हमर पसिन नहि अछि । ताहिकारणेँ हम अपनेक पाँचटा गणितक प्रश्न हल कऽ कऽ मात्र भेटब । ओ तेसरबेर हिलबर्टक अफिस गेलथि । प्रश्नपत्रमे पुछल गेल सभ प्रश्न हल मात्र नहि कएलन्हि, पास सेहो भेलाह । एना आइन्स्टाइन आ हिलबर्टक अफिसियल भेट भेल छल । भेटक बाद सिद्धान्त पूर्ण रुप पेलक । आइन्स्टाइन हिलबर्टप्रति नकारात्मक व्यवहार जँ रखने रहितथि ? घमण्डी बुझने रहितथि ?
सायद सिद्धान्तकेँ पूर्णता पाबए लेल दोसर दश वर्ष लागए सकैत छल । आइन्स्टाइन हिलबर्टप्रति सकारात्मक मनोवृत्ति रखलेक कारण सिद्धान्त पूरा करए सकलथि । वैज्ञानिकसभ कहैत अछि, यदि आइन्स्टाइनक सामान्य सापेक्षतावादक सिद्धान्त नहि भेल रहथि तँ ई विश्व १०० वर्ष पाछाँ धकला जाति । एकटा कहावत अछि, ‘व्यवहार माने मूल्य ट्याग जेहन अछि । ताहिकारणेँ हमसभ कतेक मुल्यवान् छी सेह बतवैत अछि ।’
तहिकारणेँ आइन्स्टाइनक जेहन विजेता बनए एटिट्युड राखू । हमसभ दोसराकेँ देखएकेँ माने मूलतः व्यवहार अछि । अपन सेहो व्यवहार ठीक राखी । जुग जाइत अछि मुदा व्यवहार परिवर्तन करए नहि सकैत छी । ताहिकारणेँ कोनो व्यक्तिमे व्यवहारक समस्या अएलापर, ओ व्यक्ति प्रतिक दृष्टिकोण बदली । व्यक्तिक रुप फेरए सकैत छी, योग्यता बढ़ावए सकैत छी मुदा मनोवृत्ति परिवर्तन करब सम्भव नहि अछि । मनोवृत्ति परिवर्तन करब माने व्यक्तिकेँ बदलब अछि । कि हमरासभमे व्यक्तिकेँ जेहन बदलब सामथ्र्य अछि ?
यदि हमरसभक वातावरणद्वारा जीवनमे नकारात्मक दृष्टिकोण आ अभ्यास आगाँ बढ़ल अछि तँ परिवर्तनक आवश्यकता अछि । हमरसभक मनोवृत्ति निर्धारण करएवला मुख्यरुपसँ तीनटा कारणसभ अछि । जाहिमे वातावरण, अनुभव आ शिक्षा प्रमुख रहैत अछि ।
वातावरण
घर, विद्यालय, कार्यालय, जतए कतहुँ राजनीतिक परिवेशक वातावरणद्वारा भूमिका खेलरहल देखल जाइत अछि । प्राकृतिक वातावरण आ सांस्कृतिक वातावरण दुनू मानव जीवनमे महत्व रखैत अछि । प्रकृति, नदीनाला, स्वच्छता, आ प्रदूषित वातावरणसँ जेना बाहिरी जीवनमे प्रभाव पार्ने रहैत अछि, तहिना प्रदूषित सोचद्वारा आन्तरिक मन, चेतना आ जीवनशैलीमे प्रभाव पारैत अछि । नकारात्मक सांस्कृतिक वातावरणद्वारा व्यक्ति, समाज आ राष्ट्रमे अशान्ति सिर्जना कएने रहैत अछि । खराब मानसिक सोचक कारणसँ स्वयंक मानसिकतामे सेहो अशान्ति सिर्जना कएने रहैत अछि । सुरक्षा, शान्ति, करुणा, सभ्यता जेहन गुण आन्तरिक आ बाहिरी दुनू प्रकृतिक लेल आवश्यक अछि ।
अनुभव आ संस्कार
प्रत्येक व्यक्ति अपन वातावरण अनुसार ग्रहण कएने अनुभव आ घटनासभसँ ओकरसभक जीवनशैली आ व्यवहारमे असर कएने रहैत अछि । सुन्दर, न्यायमूलक, समतामूलक, करुणावान्, प्रेमल संस्कार आ जीवनशैली पौने व्यक्तिसंग सकारात्मक अनुभव होइत अछि । ओकरासभकप्रति हमरसभक मनोवृत्ति सेहो सकारात्मक बनैत अछि । ताहिकारणेँ कहल जाइत अछि, घरेसँ सु–संस्कृत आ सभ्य व्यवहार सिखावए सिखु । एहिसँ भविष्यमे सभ्य नेतृत्वक निर्माणमे सहयोग पहुँचैत अछि ।
अन्यथा बबुरक बीज रोपि आमक फल खोजब जेहन हएत । जीवनमे जेहन संस्कारसँ जेहन अनुभव प्राप्त भेल रहैत अछि, ताहिअनुरूप व्यक्तिद्वारा समाजमे देखावएवला व्यवहार आ अभ्यासक विकास होइत अछि । आजुक राजनीतिक अभ्यासक क्रियाकलाप काल्हि सिखौने संस्कार आ तेकर अनुसरण करैत गेल अनुभवक परिणाम मानए सकैत छी कि ? संस्कारकेँ सु–संस्कृत बनावए सकैत छी । सुधारक आवश्यकता पड़ैत अछि । सुधारल गेल राजनीतिक अभ्यास विकासक मापन बनए सकैत अछि । ताहिकारणेँ अनुभव आ संस्कारसँ हानिकारक अभ्यासमे प्रेरित करैत अछि तँए ताहिसँ रूपान्तरित भऽ कऽ उपर उठब आवश्यक अछि ।
शिक्षा
व्यक्तिक जीवन विकासमे औपचारिक आ अनौपचारिक दुनू ढंगक शिक्षासँ महत्वपूर्ण भूमिका खेल्ने रहैत अछि । शैक्षिक योग्यता मात्र शिक्षा नहि । व्यक्तिद्वारा सिखल आ योगदान पहुँचौने आधारमे ओकर विवेक आ सभ्यतासँ शिक्षित व्यक्तिक परिचय दैत अछि । मनोवैज्ञानिक ज्ञानसँ बुद्धि आ विवेकमे सकारात्मक रूपान्तरण लाबए सघौने रहैत अछि । जकर माध्यमसँ सफलता सुनिश्चित करैत अछि । हमरासभसंग बाहिरी जानकारी आ सूचना प्रशस्त अछि मुदा आन्तरिक ज्ञान, समझ आ विवेकक सदति अभाव आ अपूर्णताक अनुभूति होइत अछि । जीवनयापन, दलगत राजनीति आ समय सहजतासंग बितावए मात्र शिक्षा लेल नहि जाइत अछि । जीवन कोना शान्त, संयम, करुणावान भऽ कऽ बाँचए आ समाजमे सकारात्मक योगदान देबए सकैत अछि, ओ ज्ञान शिक्षाक रूपमे विकास भेल होइत अछि । नकारात्मक मानसिकता, अस्वस्थ शरीर जेहन होइत अछि ।
तहिकारणेँ मनोवृत्ति विकास करए हिसाबसँ शिक्षा वास्तविकता आ यथार्थताकेँ अनुभूति करा रूपान्तरण करबैत अछि । शिक्षा तेहन भाग अछि, जे उत्पादकत्व वृद्धिमे योगदान दिए । सकारात्मक नेतृत्व क्षमताक विकास करए । समस्या समाधानक लेल उचित पहल करए सकए । व्यक्तिगत विकास, सामाजिक विकास आ नेतृत्व विकासमे गुणस्तरीयताक विकास करए सकए । अनुकूल वातावरणक निर्माणसहित वफादारिताक विकास हुए । किए तँ नकारात्मक मनोवृत्ति विकासक बाधक बनैत अछि । तनाव, क्रोध, लालच, द्वेष सभ नकारात्मक मनोवृत्तिक परिणाम हएत । ताहि कारणेँ सेहो आजुक समाज कतए जाइत अछि ? सडकमे, आन्दोलनमे, राजनीतिक दलक नेतृत्व आ कार्यकर्तामे मात्र खोजिकऽ भेटैत अछि । प्रत्येक व्यक्तिक मनोविज्ञान, संस्कार, अभ्यास आ जीवनशैली आचरणमे खोजब आवश्यक अछि ।
सदाचारक गुण
सत् +आचार मिलकऽ सदाचार शब्द बनल अछि । सत्यक आचरण करब सदाचार अछि । सही आचरण, शिष्ट व्यवहार, अनुशासित जीवनशैलीए सदाचार अछि । एकरा जीवनमे अपनावएमे कोन चीज बाधा बनैत अछि ? किए व्यक्ति सदाचारी बनए नहि सकैत अछि ? जखनकी सभकेँ बुझल अछि– जीवनमे सदाचारक गुण जतेक महत्वपूर्ण आर्जन आओर होबए नहि सकैत अछि । धन, सम्मान, शिक्षा, पदसँ बड़का सम्पत्ति अछि, सदाचार । किए तँ सदाचार व्यक्तिमे नहि धैर्य आ संवेदनशीलताक विकास भेल रहैत अछि । संवेदनशील आ धैर्यवान व्यक्तिद्वारा कएल गेल कार्य सदाचारक गुणसँ भरल रहैत अछि । आ उएह कार्य सफल होइत अछि । अस्तित्वकेँ आ समाजक नियम माने सदाचार अछि । ताहिकारणेँ सफलता प्राप्तिक लेल सदाचार महत्वपूर्ण होइछ । आत्मबलक अभाव, आत्मीयताक अभाव, वैरभाव आ दुष्ट प्रवृत्ति राजनीति अछि कहि बुझ्mए लगलाक बाद आजुक दिनमे अपन गुणवत्ताक विकास कऽ सामाजिक हितमे कार्य करए लेल सदाचारमे स्थित रहए पड़त ।
झुट, बेइमानी, भ्रष्टाचारसँ धन भेटत, बाहरी सम्मान सेहो भेटत मुदा आत्मसम्मान नहि भेटि सकैत अछि । सत्यतामे, सदाचारमे, इमान्दारिताक आचरणमे स्थित व्यक्तिक जीवनमे जतेक बेसी सुख–दुःख आ अनुकूलता वा प्रतिकूलता अएलाक बादो विचलित नहि होइत अछि । मानसिक रूपसँ सन्तुष्ट, मानवीय गुणसँ करुणावान, व्यक्तिगत रूपमे प्रसन्नता, स्वस्थ आ आनन्दित रहए बहुत धन–सम्पत्ति नहि, सदाचारी भेलसँ भऽ सकैत अछि ।