

⇔ सुजीत कुमार झा
आइ भोरेसँ जनकपुरधाममे चहल–पहल छल । जानकी मन्दिर राम मन्दिर सहित नगरक धार्मिक स्थलसभपर दिनभरि भीड़ रहल । ठाम–ठाम पिकनिक मनबैत लोककेँ देखल गेल । एकदोसरासँ भेट होइतए नव वर्षक शुभकामना देबएसँ किओ पाछाँ नहि रहथि ।
भलहि नेपालमे बैशाख १ गते नव वर्ष होइत अछि मुदा जनवरी १ तारिक उत्सवक मामलामे अगे बढि़ गेल अछि । पहिने बैशाख १ आ २ गतेकेँ एहिठाम नव वर्ष मनबैत छल मुदा २०–२५ वर्ष इम्हर जनवरी १ केँ नव वर्ष मनाबएकेँ बेसी जोड़ बढ़ल स्थानीयसभ कहैत छथि । स्थानीयकेँ उत्साह देखि लगैत अछि कतहुँ हमहुँसभ इएह नववर्षमे तँ नहि लागि गेल छी ।
ग्रेगोरियन पतराक अनुसार आइसँ नव वर्ष इस्वी सम्वत् २०२५ शुरु भेल अछि । जिजस क्राइस्टकेँ फाँसी देलाक बाद इस्वी सम्वतक शुरुवात् भेल मान्यता रहल अछि । पोप ग्रेगोरियन जुलियन पतरा अनुसारक सम्वतकेँ प्रतिस्थापन करैत एखन प्रचलनमे आएल पतराकेँ चलौलाक कारणेँ एकरा ग्रेगोरियन पतरा अनुसारक नव वर्ष मानल जाइत अछि ।
जुलियन पतरा शासक जुलियस सिजर प्रचलनमे लौने रहथि । ईशापूर्व ४५ मे रोमक सम्राट जुलियस सिजर पहिने चल्तीमे रहल चन्द्रपतराकेँ व्यापक रूपसँ अदली–बदली कएलन्हि । ओ ई क्यालेन्डर बनबैत समय वैज्ञानिक रूपसँ ‘लिप इयर’ समेत जोडिकऽ बनौने रहथि । ओ वर्षक १२ महिना बनौने रहथि । हुनकासँ पूर्व क्यालेन्डर चल्तीमे अबितो १० महिना मात्र छल वर्षमे । मुदा ओ अपन नाम आ अपन पुत्र अगस्टससमेत जोडि़ जुलाइ आ अगस्त महिना थपने रहथि ।
जनवरी १ केँ उएह वर्षक पहिल महिनाक रूपमे मान्यता दिओने रहथि । नहि तँ एहिसँ पहिने मार्च महिनामे नव वर्ष मनाओल जाइत छल । सेप्टेम्बर, अक्टोबर, नोभेम्बर तथा डिसेम्बर जेहन नाम अंकक आधारमे बनौने छथि । सेप्टेम्बर माने सात, अक्टोबर आठ आ नोभेम्बर नौ अछि ।
विवादक कारण ई पतरा रसिया २०० वर्षक बाद मात्र प्रचलनमे अनने छल ।
विवाद होइतो उपनिवेशकालमे विभिन्न स्थानमे ई सम्वत् लादलाक कारणेँ वर्तमानमे एकर विश्वव्यापी प्रचार अछि । ई सम्वत् नेपालमे प्रचलनमे नहि होइतो भ्रमणमे आबएवला विदेशी एकर प्रयोग करैत अछि ।
जनवरी १ एखन संसारभरिक नव वर्ष मानल जाइत अछि । रोमन सम्राट जुलियस सिजर अपन दूटा मुँहवला भगवान् जानुसक सम्मानमे रखलाक लेल ई महिनाक नाम भीतरक कथा एखन बहुत गोटेकेँ बुझल नहि अछि ।
रोमनसभ पूजा करएवला दूटा मुँहवला भगवानक एकटा हाथमे चाभी आ दोसर हाथमे बड़का लाठी रहैत अछि । हिनक प्रिय वाहन मुर्गा रहल अछि । किए नहि हुए ई हरेक भोर सर्वसाधारणकेँ जगावएकेँ जे काज करैत अछि । ओहि समयक रोमनसभक विश्वास छल, हरेक दिन भोरक संकेत जानुस सर्वसाधारणकेँ जगबैत अछि । भोरक ओहि समयक काल्हिक काजक समीक्षा करए आ आजुक भविष्यक लेल तैयारी करएके लेल अछि ।
जुलियस सिजर उएह धारणा वर्षक पहिल महिनामे जोडि़ देलन्हि । जानुसक सम्मानस्वरूप सिजर वर्षक पहिल जनवरी बनौलन्हि । अहिना एखन हमसभ मानैत आएल महिनासंग रोमन सम्राट जुलियस सिजर आ हुनक भगवान् जानुस जोड़ल अछि ।
ओना तँ जतए–ततए सभ्यता जन्मल, पृथ्वीवासी ओतए–ओतए नव वर्ष मनौलन्हि । ओसभ भगवान्केँ पूजा कएलन्हि आ अनेक कथा जोडि़कऽ भोजभतेर, उत्सव तथा कसम खाएकेँ प्रचलन शुरु कएलन्हि ।
प्राचीन मिश्रवासी ईशापूर्व ३००० वर्ष पहिने ‘विपेट रिन्पेट’ (नव वर्षक स्वागत) कहि मनबैत छलथि । मुदा ओ स्वागत जनवरी १ मे नहि, मध्य जुलाईमे मनाओल जाइत छल । जाहि समय मज्जासँ नाइल नदीमे बाढि़ अबैत छल, ओसभ ओकरा स्वागत करैत छलथि । ओ स्वागत ओना गर्भधान आ पुनर्जन्मक उत्सवक रूपमे मनाओल जाइत छल । एहन उत्सवमे नाचगान, भोजभतेर, दारु तथा पेयक उच्च खपत होइत छल ।
एहिसँ पहिने सेहो बेबिलोनवासी चारि हजार वर्ष पूर्व १२ दिन नव वर्षक उत्सव मनबैत छलथि । ओकरा ‘फिस्ट अफ अकिटु’ कहल जाइत छल । ओ बालीनाली समेटलाक बाद वसन्त ऋतुक स्वागतमे मनाओल जाइत छल । ई उत्सवमे बहुतरास देवीदेवताक प्रतिमाकेँ शहरमे घुमाओल जाइत छल, भोजभतेर खुवाओल जाइत छल । कोनो राजाक राज्याभिषेक करएकेँ अवस्था एलापर नव वर्षमे घुमाओल जाइत छल । पुराने राजा रहथि तँ अपन राजकीय शक्ति संकेतात्मक रूपसँ पुनर्नवीकरण करए घोषणा करए इएह समय खोजैत रहथि ।
चिनियाँसभ औपचारिक रूपसँ नव वर्ष मनावए शुरु कएने तीन हजार वर्ष पहुँचल अछि । जाढ समाप्त भेलाक दोसर हप्ताकेँ ओसभ नव वर्ष मानैत अछि । हमसभ नेपाली तथा हिन्दू प्रभावित भारतमे सेहो विक्रमादित्यद्वारा चलाओल गेल विक्रम सम्वत् चल्तीमे अछि । ई मनावए शुरु कएल गेल सेहो २०८१ वर्ष पहुँचल अछि । बौद्ध धर्मक प्रभाव भेल देशसभ नव वर्ष वैशाख पूर्णिमा लगपासमे मनबैत आएल अछि । एहन चलन बर्मा सहित दक्षिणपूर्वी एसियामे प्रचलित अछि ।
जतए–जतए रोमन प्रभाव जमौलक, ओतए–ओतए जनवरी १ मे नव वर्ष मनावएकेँ प्रचलनसँ व्यापकता पौलक, मुदा नव वर्ष पृथ्वीमे हरेक स्थानपर अलग–अलग समयमे मनाएब स्वाभाविक छल । खासकऽ वसन्त ऋतुक समय पृथ्वीक अधिकांश स्थानपर नव वर्ष मनावएकेँ प्रचलन छल । रोमनक जुलियन क्यालेन्डर रोमन साम्राज्यभरि चल्तीमे भेला बहुतो वर्षक बाद कतेको स्थानपर जनवरी १ मे नव वर्ष नहि मना पहिने मनबैत आएल नव वर्षकेँ जारी रखने छल ।
१६अम शताब्दीमे रोमन पोप ग्रेगोरी १३अम अनिवार्य रूपमे जनवरी १ मे नव वर्ष मनावएकेँ उर्दी जारी कएलन्हि । एकर विरोधस्वरूप बहुत गोटे मार्च २५ केँ मनावएकेँ कार्य जारी रखलन्हि । जकरा ओसभ नव वर्षक पावनि नहि कहैत ‘घोषणा पर्व’ कहल करथि । एहन घोषणा पावनि सन् १७५२ धरि जारी रहल ।
खास कऽ पूरे संसारभरि एकरूपता लाबए बेलायती तथा बेलायती औपनिवेशिक क्षेत्रमे जनवरी १ केँ नव वर्ष मनवएकेँ शुरु भेल । नव वर्षक उत्सव कहएकेँ अर्थ भोजभतेर वा मनोरञ्जन करब मात्र नहि छल । एकरा नव संकल्प करएकेँ दिनक रूपसँ समेत मनाओल जाइत छल आ ई प्रचलन प्राचीनकालसँ अछि । मेसोपोटेमियाक सभ्यतामे भगवानकेँ नव वर्षक भोग चढ़ाओल जाइत छल । ओसभ आओर बेसी मेहनत करए, ऋण फिर्ता करए, ककरोसँ लेल गेल उधार सामान (घरेलु सामान, थारी, बटुक सहितक बर्तन ) फिर्ता करएकेँ दिनक रूपसँ लेल जाइत छल ।
सिजरक समय जनवरी १ क दिन भगवानकेँ आगाँ बलि चढाएब सभक आगाँ अपने दोसरप्रति बढि़या व्यवहार करएकेँ कसम खाएब । मध्यकालीन समयमे युद्ध सरदारसभ (नाइट्स) मयूरकेँ छूबिकऽ क्रुसेडमे निकलए कसम खाइत छल ।
१८अम शताब्दीताक मेथोडज्म सम्प्रदाय निर्माण करए जोन विस्ले १८अम शताब्दीक समय ईश्वरक आगाँ अपन पुरान वचन पूरा करए प्रचलन लौने छल । जेना खराब चीज नहि करब । जोन विस्लेक शिष्यसभ कसम खाइत छलथि ।
जे किछु जनकपुरधामक लेल ई एकटा उत्सवे बनि गेल अछि । व्यवसाय नहि बढि़ रहल कहि चिन्तित रहल एहिठामक व्यापारीकेँ एकहिबेर व्यवसाय बढा देलक । भारतदिसक लोक भारी संख्यामे नव वर्ष मनावए जनकपुरधाम चलि अबैत अछि ।
