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मैथिली कविता – अपाङ्ग सन्तान





 प्रेम विदेह

छल इजोत
देसक आधा आकासमे
छल अन्हार आधामे पसरल
दियाबाती छल
उतरबारी भागक धरतीपर
सोगाएल छल आधा
दखिनबारी भागक धरती
भेल छल लेहूलेहुआन
ओही दिन
जनमल छल देसक अपाङ्ग सन्तान
नवका संविधानक रूपमे।
+
नओ बरिस बादो अपाङ्गे छै
आधा अङ्ग दुरुस्त छै एकर
आधा छै बेकाम
गणतन्त्ररूपी मस्तक
मौलिक हकरूपी मूँह
बहुधार्मिकतारूपी छाती
जन-सार्वभौमिकतारूपी रीढ
दुरुस्त छै
मुदा
सङ्घीयतारूपी टाङ छै नाङर
बहुभाषिकतारूपी हाथ छै लूल्ह
समानुपातिकतारूपी आँखि छै कनाह
तएँ
प्रतिगामी तनने छै बन्दूक
अपाङ्ग सन्तानपर
मौकापर चौका लगएबालए
होसियार!
समाधान नहि अछि सन्तानक हत्या
समाधान अछि
साङ्ग बनाएब अपाङ्गके ।
+
बनएबाक लेल साङ्ग
जरूरी अछि
अपाङ्गक अङ्गसभक उपचार — पुनर्निर्माण
करी तएँ
परिस्थितिक निर्माण
एकजूट भए
सहीदक सप्पत लए
करी तैयार — डाक्टर इमान्दार
नर्स, कम्पाउन्डर भरमार !