

सुजीत कुमार झा
विवाह उपनयन वा मुड़न किनको होइत छल तँ शारदा सिन्हाक गीत लाउडीस्पीकरमे बजए लगैत अछि । मुड़नक बात तँ स्मरण नहि अछि । हँ तखन हमरो उपनयन आ विवाहमे शारदा दीदी अर्थात शारदा सिन्हाक गीत बजल छल । हमरा लग पुरनका टेपरेकर्डरक क्यासेट एखनो अछि – जकरा हम बर्षो बहुत रुचि पूर्वक सुनैत छलहुँ ।
टेपरेकर्डरक समय गेलाक बादो छठि पावनिमे बहुतोबेर हुनक गीत सुनैत छी । जखन ओ आइ हमरासभक बीच नहि छथि एकरबादो हुनक मैथिली आ भोजपुरीमे गाएल गीत कतेकोबेर सुनलहुँ अछि । मनमे लागल बात लिखएसँ पूर्व सेहो हिनक गीत मोबाइलमे सुनलहुँ अछि ।
गीत गाबए तँ नहि अबैत अछि तखन गीत सुनएकेँ बहुत सौखिन छी । आ फेर उदीत नारायण आ शारदा दीदीक फैने जकाँ रहलहुँ । जखन पत्रकारितामे एलहुँ तँ शुरुएमे उदीत नारायणसँ भेट भऽ गेल । ओ सप्तरीक भारदह आएल छलथि आ हुनक अन्तरवार्ता कएलहुँ मुदा पत्रकारिता शुरु कएलाक १५ वर्षक बाद दीदीसँ भेट भेल छल ।
हम तहिआ रेडियो मिथिलामे काज करैत रही । एकटा रिपोटिंग करएकेँ क्रममे मधुबनी पहुँचल छलहुँ । भोरमे मर्निगं वाकमे रही कि शारदा दीदीसँ भेट भऽ गेल । हुनका अपन परिचय देने छलहुँ आ बहुत प्रसन्न भेल रहथि । हुनका बुझल छलन्हि नेपालमे बहुत रेडियो सभ खुजलैक अछि आ ओहिमे हुनक गीतसभ खूब बजैत छैक । हमरासँ बेसी हुनको उत्सुकता छल जे एकटा शहरमे ५–७ टा रेडियो कोना काज करैत अछि । कतेक गोटे काज करैत छियैक जिनकासंग अन्तरवार्ता लेबए गेल छलहुँ ओ स्वयं हमरासँ आधा घण्टाधरि अन्तरवार्ता कएलन्हि ।
कोना गीत गायन शुरु कएलन्हि आ केहन–केहन चुनौतिसभ आएल खुलि कऽ ओ बातचित कएलन्हि । गायन क्षेत्रमे लगबाक लेल साउससँ शुरुमे कतेक अवरोध आएल छलसँ लऽ पतिक सहयोग सेहो सभ सुनौलन्हि ।
पहिलबेर मैथिली गीतक रेकर्ड करए पहुँचल छलीह आ एचएमभी रेकर्डिगं कम्पनीक अधिकारी मैथिली गीत नहि चलत कहि अस्वीकार कऽ देने छल । एहिपर अधिकारी आ हुनक बातचित रोचक ढंगसँ सुनौने छलीह ।
अधिकारी मुसलमान छल । ओकारासँ दीदी कहलीह अहाँसभक घरमे तँ कुरान तँ लोक पढ़ैत हएत ओ बजलथि सभक घरमे पढ़ैत अछि तहिना मिथिलाञ्चलमे बच्चा–बच्चा गौसाउनी गीत गबैत अछि सुनैत अछि । अधिकारीसँ एतेकधरि कहने छलीह – जँ ई क्यासेट हिट नहि भेल तँ ओ एक–एकटा खेत, बाड़ी, घराड़ी बेच कऽ पैसा चुक्ता कऽ देतीह । ई कहलाक बाद ओ अधिकारी मानल छल आ फेर विद्यापति रचित गीत रेकर्डिगं भेल छल ।
बातचितक क्रममे पहिलबेर पता चलल छल शारदा सिन्हाक छठिक चर्चित मैथिली आ भोजपुरी गीत हृदयनारायण झा लिखने छथि । ओहिसँ पहिने शारदे दीदी लिखने छलीह बुझैत छलहुँ ।
अन्तरवार्ताक बाद ओ कहने छलीह – जखन जनकपुरधाम आएब तँ रेडियो मिथिलामे एबए करब स्टुडियोमे अहाँसंग बातचित करब ।
मैथिलीक गायक एवं संगीतकार आदरणीय सुनिल मल्लिक भाइजीक ई शब्द पैचा लैत रखैत छी – हमरा कहबामे कोनो झिझक नहि जे लोक जगतक खाँटी सुगन्ध हुनका गायिकीमे भेटैत छल से आब दुर्लभ भऽ जाएत । जनकपुरधाममे हिनका लेबाक सपना अधुरे रहि गेल । दू तीन बर्ष पहिनहुँ प्रयास कयने रही मुदा हिनक शारीरिक अस्वस्थताक कारणे हिनका नहि लाबि सकलहुँ ं। सभकिछु तँ अछिये दीदी पावनि तिहार हेबे करतै वियाहदान हएबे करतै अहाँक गीतसब बजिते रहतै खाली अहाँ नहि रहब भौतिक रुपे । एकटा कलाकारक वास्तविक श्रद्धाञ्जलि तँ एहने हेबाक चाही । हिनक अमर संगीत एहु वसुधामे गुँजैत रहए । जखन–जखन छठि हेतै अहाँ लोकक मन प्राणमे बसल रहब । वियाह दान हेतै अहीं रहब । आर की चाही ।
दुखवा मिटाईं छठी मईया, रउए असरा हमार…इएह हुनक अन्तिम गीत अछि ई सुनि हमरो आँखि नोरा गेल । हुनक आवाजमे एहन जादू अछि जे छठि पूजाक गीत सुनिकऽ लोक भावुक भऽ जाइत अछि ।
स्वर कोकिला शारदा सिन्हा ७२ वर्षक उमेरमे दिल्ली स्थित एम्समे अन्तिम स्वास लेलीह अछि । ओ किछु दिनसँ बीमार चलि रहल छलीह । नेपाल भारतक हरेक स्थानपर किछु दिनसँ शारदा सिन्हाक आवाज छठि गीतक माध्यमसँ गूँजि रहल अछि । संयोग देखू आस्थाक महापर्व छठिसँ जुड़ल प्रायः मधुर आ पारम्परिक गीतकेँ जे आवाज देलन्हि, ओ आवाज छठि पावनिके बीचे सभदिनक लेल शान्त भऽ गेल । हुनका बीना छठिक पूजा अधूरा सन लगैत अछि ।
