

⇔ सुजीत कुमार झा ।

कनिदिन पहिने भिट्ठामोड सीमापर गेल छलहुँ । सीमापर लिखएकेँ अर्थ भारत दिसक चौकपर । दीपावलीक एक दिनक बाद रहैक । भिट्ठामोडक सभ दोकानमे किनएवलासभक भीड़ लागल छल । अधिकांश ग्राहक नेपाली छल । नेपालीए ग्राहककेँ ध्यानमे राखि ओहिठाम बजार अछि ।
पावनि तिहारक समयमे मात्र नहि आनो दिन अहिना ओहिठाम भीड़ रहैत अछि । दीपावलीसँ पहिने तँ एतेक भीड़ छल, लोककेँ आबए जाएमे समस्या रहैक । फेर ई स्थिति भिट्ठामोडक मात्र नहि । मधवापुर, उमगाउँ, वासोपट्टी, जयनगर सहित सीमासँ जुड़ल हरेक चौकपर छल ।
जनकपुरधाम, जलेश्वर, मलंगवा सहितक बजारमे भलेही खासे किनएवलाकेँ भीड़ नहि देखाइत हुए मुदा ओहिठाम एतेक जे उपभोक्तासभ लाइनमे लागल रहैत अछि । एहन लाइन वा भीड़ आनो दिन रहैत अछि ।
फेर आश्चर्य लागत एकटा छोटको सामान किनए लेल बार्गेनिगं करएवला नेपाली उपभोक्ता ओहिठाम अनुशासित भऽ सामान लेबएकेँ प्रतीक्षामे रहैत अछि । अहाँकेँ कोन–कोन सामान किनएकेँ अछि लिष्ट लिखा दिऔक । समान तौल कऽ दऽ देत । जे पैसा ओ लिख देलक गनि कऽ दऽ दिऔक ।
दीपावलीक समय भारतीय पैसाक फलो एतेक बढि़ गेल छल, नेपाली रुपैयाक बट्टा ६ रुपैया सैकड़ामे कटैत छल । सभ दिन अहिना नहि रहतैक मुदा बट्टा कटएवला काज नहि रुकत एकटा व्यापारी सुना रहल रहथि ।
पहिने नेपाली सञ्चारमाध्यम सभमे अबैत छल नेपाली रुपैयाक कारोबार भारतीय बजारमे मुदा ओ स्थिति छल जखन नेपालसँ सोनाक तस्करी होइत छल । जहिना नेपालसँ भारतमे सोनाक तस्करी रुकल नेपाली पैसासँ कारोबार तँ होइत अछि मुदा बट्टा बढि़ गेल अछि ।
भारतीय रुपैया लऽ कऽ जाएब तँ ओहिठाम कोनो सामान किनएमे सहज हएत । ई सत्य अछि ।
हमरा ई लिखएकेँ तात्पर्य अछि सीमा क्षेत्रमे सामान किनएवलाक कतेक उपलब्धि होइत अछि ? मोटरसाइकिलसँ जाउ ओकर तेलक दाम, बट्टा, चुनिकऽ सामान सेहो नहि भेटत । प्रायः एकदाम । फेर किछु बेसी सामान भेल तँ नेपाली पुलिस सेहो एकदू ठाम किछु पैसाकेँ आशा करैत अछि । इलोक्ट्रोनिक सामान लेलहुँ तँ भारतीय एसएसबीकेँ सेहो किछु चाही । एसएसबी दैनिक उपभोग्य सामानमे नहि रोकैत अछि ।
नेपाली सीमामे रहल सभकेँ कम दाममे सामान भेटएकेँ नामपर ई कष्ट सेहो भोगए पड़ैत अछि । ई कष्टक लेखाजोखा के करत ? राज्य खाली दैनिक उपभोग्य सामानक भन्सार राजस्वमे मोल तँ बढ़ा दैत अछि मुदा एकदिस अधिकांश घरमे एहिना कऽ सामान अबैत अछि । नहि राज्यकेँ फाइदा दोसरादिस नेपाली उपभोक्ताक कम मूल्यपर सामान भेटएकेँ नामपर, कम पीड़ा नहि होइत अछि ।
किछु घण्टामे हमर ई अनुभव रहल । मुदा जे बराबर सामान अनैत अछि हुनका कतेक कष्ट होइत हेतैक उएहसभ जनथि !
