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अपना आनन्दक लेल गाउ, लाइक भ्युजके लेल नहिः गायिका रंजना झा

‘श्रृंगारके श्रृंगारे रहए दियौ अश्लिलतादिस नहि धकलु’





मैथिली गीतसंगीतके प्रसिद्ध नाम अछि रंजना झा । गायिका झा चिकित्सक बनएके सपना बुनने रहथि मुदा ओ संगीतक डाक्टर बनि गेलथि । माय बाबु दुनू गोटे गीत संगीतक क्षेत्रमे लगलाक कारण हुनक रुझान संगीत दिस बढैत चलि गेल । मोडेलखबरके समाचार संयोजक जयन्त ठाकुर गायिका झासंग हुनक सांगीतिक यात्रासंगे, मैथिली संगीतक वर्तमान अवस्था तथा हुनक किछु व्यक्तिगत प्रसंगमे बातचित कएलन्हि अछि ।
अपनेक संगीतक यात्रा कोना आरम्भ भेल ?
हमरा संगीत विरासतमे प्राप्त भेल अछि । पिता भागवत मिश्र वियोगी आ माय शान्ति मिश्र दुनू संगीतक साधक छथि । लम्बा समयधरि हुनकरसभक संगीत यात्रा रहलै हुनकेसभसँ हमरा प्रेरणा प्राप्त भेल । आइ जे लोक संगीत हम गाबए सकि रहल छी ओहिमे मायबाबूक देन छन्हि । ओना संगीतक आन आन प्रारुप सिखबाक लेल शास्त्रिय संगीत पण्डित योगेन्द्र भारती, डा. ओमप्रकाश नारायणसँ अलग अलग विधा सिखलियै ।
बच्चेमे सोचने रहियै संगीतमे कैरियर बनाबएके छै ?
नहि तेहन नहि रहै । हमरा घरमे संगीतमे माहौल रहैत छैक । कोनो बच्चा जन्मल कि ओ आ..आ.. करिते निकलैत छैक । मुदा हम संगीते हम्मर जीवन बनत से नहि सोचने रहियै । हमरा चिकित्सक बनएके सपना रहए । हमरामे बच्चेसँ सेवा भाव रहए आ ओहिके लेल चिकित्सकीय पेशासँ बढियाँ कोनो माध्यम नहि भऽ सकैत अछि । मुदा संगीत दिस रुझान बेसी चलि गेलै कक्षा ८ के बाद । एतेक भऽ गेल बादमे जे संगीतके बाहेक आब किछु बुझेबो नहि करैत अछि ।
डाक्टरी पढलियै कि नहि ?
नै डाक्टरी तऽ नहि कएलियैक मुदा संगीतेमे डक्ट्रेट जरुर कएलियै ।
कनी बाल्यावस्थाके चर्चा करु जे केहन रहए अपनेके बाल्यावस्था ?
हम्मर बाल्यावस्था संगीतसँ भरल रहल । बाबुजीके कार्यक्रम पूरा मिथिलाञ्चलमे होइत छलैक । हम ओहि समयमे बहुत छोट रहियैक । मुदा बाबूजी हमरा सभठाम लऽ जाइत छलखिन । हुनकासंगे कक्षा ९धरि बहुत बेसी घुमलियैक, बिहारके कोना कोना ।
कतेक वर्षक उमेरमे पहिलबेर मञ्चपर चढल रहियैक ?
४ वर्षक उमेरमे पहिलबेर मञ्चपर चढल रहियैक । ‘कोने दिशामे लेके चला रे बटोहिया’ गीत गौने रहियैक । इएह मञ्चीय कार्यक्रमकबाद हम्मर सांगीतिक यात्राके आरम्भ भेलैक । ओकर बाद एहन भेलैक जे हम महिनामे २० दिन मञ्चीय कार्यक्रममे सहभागी होइत छलियैक ।
पढाई कतेक प्रभावित होइत छल ?
कनी कनी तऽ प्रभावित होइत छलैक । मुदा जतए जतए कार्यक्रमक लेल जाइत छलियैक हमरासंगे किताबो काँपी जाइत छलैक । राइतमे कार्यक्रम दिनमे पढाई संगे संगे करैत छलियैक । प्रभुके कृपा आ मायबाबूक आशिर्वादसँ कहियो द्वितिय नहि भेलियैक ।
अपनेक पहिल रेकर्डेड गीत कहिआ आएल ?
हम्मर पहिल एल्वम आएल २००१मे । हम ओशो सन्यासी सेहो छियैक । हम्मर विवाह भेल १९९६मे मेट्रिक कएलाक बाद । हम्मर पति मनोजकुमार झा सेहो ओशो सन्यासी छथिन । ओशोसँ सम्बन्धित भजनसभ ओहि एल्वममे समावेश कएल रहैक ।
विवाहके बाद ओशो सन्यासी बनलियैक ?
हँ सन्यासी तऽ बादमे भेलियैक मुदा जानकारी पहिने भऽ गेल रहए ओशोक बारेमे । जखन कलेजमे नाम लिखेलियैक तहन ओहिठाम ओशोक चर्चा सुनैत छलियैक । हुनका विषयमे खराबे बजैत छलैक निक त किओ नहि बजैत छलैक । हम त नामो नै सुनने रहियै ओहिसँ पहिने । जखन हम्मर विवाहक बात चलैत रहैक बाबूजी हमरा लेल ओशोक किछु किताब आनि देलखीन । ओ किताब पढलियैक हमरा बहुत नीक लागल । बाबूजी पुछलथि ई किताब केहन लगलौ ? हम कहलियैक हमरा त बहुत नीक लागल । मुदा हमरा ई नै बुझल रहए जे ई दुलहाक पठाओल किताब छैन्हि । हमरा त विवाहसँ एक हप्ता पहिनेधरि नहि बुझल रहए जे हम्मर विवाह भऽ रहल छैक । घरमे रंग रोगन होइत रहैक आ टेबल पर विवाहक कार्डमे देखलियै हम्मर नाम लिखल छैक तहन बुझएमे आएल जे हम्मर विवाह छैक । मुद्दा हमरा हिम्मत नहि छल जे ककरोसँ पुछियैक । आब ने लडकीसभ पुछि लैत छैक । अखनके युग लडकीक लेल स्वर्णीम युग छैक । अखन जे लडकी पाछा छथि ओ आगा नहि बढि सकैत छथि । अखन नैहर हुए वा ससुरारि दुनू पक्ष सहयोग करैत छैक ।
अपनेक संगीत यात्रा विद्यापतिदिस बेसी प्रभावित भेल देखबामे अबैत छैक, अपने ओशोक चर्चा कएलियैक, विद्यापति दिस कोना प्रभावित भेलियैक ?
बच्चेसँ गीत सभ गबैत छलियैक । सभ दिन क्लासिकल गीत गौलाक बाद विद्यापतिक गीत गबैत छलियैक । ओहि गीतसँ लोक बहुत बेसी प्रभावित होइत छलखिन । ओहि समयमे ओ गीतक भाव तऽ नहि बुझैत रहियैक मुदा जखन भाव बुझए लगलियैक तहन आओर विद्यापतिदिस रुझान बढए लागल ।
अखनके समयमे लोक अपन सस्ता प्रचारक लेल अश्लिल शब्दके सहारा लैत छैक, ओहि समयमे अपने एकटा उदाहरणीय गायिकाक रुपमे साबित भऽ सकैत छियैक ?
देखियौ अश्लिलता मोनके बात छैक । यदि श्रृंगारक बात कएल जाए तऽ श्रृंगारके खोलि कऽ राखि देबै तऽ ओ अश्लिल भऽ जाइत छैक । महाकवि विद्यापतिक लिखल श्रृंगार ओ पराकाष्ठा छैक । ओहिसँ बेसी श्रृंगार भइए नहि सकैत अछि । अखन जे भऽ रहल छैक लोक ओहिके खोलि कऽ राखि दैत छैक । श्रृंगारके श्रृंगार रहए दियौ । अश्लिलता दिस नहि लऽ जएबाक चाही । संगीत क्षेत्रमे उपर चढए लेल शर्टकर्ट नहि भऽ सकैत अछि । जँ किओ शर्टकर्ट अपनाबैत छथि तऽ ओ शर्टकर्ट रहि जाइत छथि । संगीत अपना लेल गाउ, लाइक भ्युजके लेल नहि गाउ हम तऽ इएह सल्लाह देबए चाहबै ।

गायिका रंजना झासंगक पूरा बातचित निचला युट्युवके लिंकपर देखए सकैत छी ।