

बिना सहाराके सेहो हम अहाँ अप्पन सफल जीवनके आधार तैयार कऽ सकैत छी । ई बात शिवानी राउतक संघर्षक कथा प्रमाणित करैत अछि । शिवानी कोनो प्रसिद्ध व्यक्ति तऽ नहि छथि मुदा ओ जे छथि ओहन बनबाक लेल बहुतोके सोचए पड़त । किए तऽ ओ एकटा संघर्षी महिला छथि । ओ ओहन बहुतो महिलाक लेल उदाहरण छथि जे अपनाके दोसरके सहारापर जीबए लेल बाध्य बनौने छथि । शिवानीसँ बात कएलापर हम स्वयं प्रोत्साहित भेलौँ ।
जनकपुरधामक धनुष सागर पोखरिके मोहारपर नास्ताके हुनक ठेला छन्हि । जाहिसँ ओ अप्पन जीवन तऽ चलाइए रहल छथि संगे धियापुताके पेट पालि रहल छथि । ओ कहैत छथि, ‘किछु वर्ष पहिने पतिके मृत्यु भेलाक बाद विपदके पहाड टुटि पड़ल ।’
हम कहिओसँ किछु नहि कएने छलौँ सभदिनसँ पतिए सभकिछु करैत छलथि । हम्मर काज घर गृहस्थि सम्हारएके मात्रे रहैत छल । ओ सभटा जिम्मेबारी पूरा करैत छलाह । मुदा हुनका गेलाक बाद साउस ससुर सेहो घरसँ निकालि देलक । तुही हम्मर बेटाके मारि देले से कहि कऽ ।
ओहिके बाद कि करु, कहाँ जाउ कोनो उपाय हमरा सुझबामे नहि आबि रहल छल । ओहिके बाद किछु वर्ष बालबच्चाके लऽ कऽ नैहरमे रहलौँ । एम्हर पतिक मृत्युके विषयमे सेहो पत्ता लगाबएके प्रयास कऽ रहल छलौँ । किछु वर्षक बाद बुझएमे आएल जे हम्मर पतिके मृत्यु ओहिना नहि भेल छल, हत्या भेल छल । हुनकर अपने साथीसभ मदिरामे विष मिला कऽ मारि देने बुझएमे आएल । मुदा किछु नहि कऽ सकलौँ । सभकिछु बुझल रहितो हम किछु नहि कऽ सकलौँ । हमरा लग कोनो प्रमाणो नहि छल, कोन निकायमे कोना जाउ किछु नहि बुझल छल, फेर गरिब जनताके देखएबला किओ नहि अछि एहि संसारमे । तएँ भगवाने न्याय करता से सोचि हम अप्पन बालबच्चाके पालन पोषणमे लागि गेलौँ ।

एम्हर नैहरमे छी से बात बहुत परेशान करैत छल । ओहिके बाद अपने किछु करएके सोच बनेलौँ । फेर हम जनकपुरधाम चलि एलौँ । एहिठाम एकटा स्कुलमे पियनके काज कएलौँ आ स्कुलमे तीनु बच्चाके नाम सेहो लिखेलौँ ।
विधवा महिला रही बहुत समस्यासभ आएल, साउस ससुर सेहो देखएबला नहि रहल । ओसभ तोहर बच्चा छौँ तुँही बुझै से कहैत छल, कोनो खोजो पुछार नहि कएलक । कखनो कऽ मोन एहन होइत छल जे हमहुँ हुनके लग चलि जइतहुँ मुदा तीनु बच्चा कतए जायत से सोचि मोनके मनेलौँ । किए तऽ मायके ममता सभसँ पैघ होइत छैक । ओहि ममताक आगु सभ बाधा अडचन छोट लागए लगैत छैक । स्कुल छोरि कऽ बहुतोठाम खाना बनाबएके काज सेहो कएलहुँ । खाना बनबैत बनबैत मस्तिष्कमे आएल किए नहि अपने कोनो काज करी । मुदा कि बना कऽ बेचु ई सोचि परेशान छलौँ तथापि प्रकाशक किरण प्रवेश करएके बाट कोनो दोग दने ताकिए लैत अछि ।
हम किछु दिन होटेलमे सेहो काज कएलौँ । । होटेलमे कएने काजक अनुभव संजोगि कऽ ठेला पर नास्ता बेचएके नियार कएलौँ । कोनो स्थान लऽ कऽ वा सटर भाडा लऽ कऽ नास्ता दोकान चलाबएके सामथ्र्य नहि छल, किछु कर्जा लऽ कऽ ठेलेपर नास्ता दोकान चलाबए लगलाक बाद स्थितिमे किछु सुधार आएल । धियापुतासभ सेहो पढि रहल अछि । आर्थिक स्थिति नीक नहि रहलाक कारण सभ धियापुताके सामुदायिक विद्यालयमे पढा रहल छी । जेठका बेटा आब नहि पढैत अछि । ओ कहलक तुही कतेक करबे, जतेक करएके छलौ कएले आब हम करब । हम बहुत रोकलियै मुदा नहि मानलक, भिसा लगा कऽ विदेश चैलि गेल कमाए लेल । हम अखन घरमे बेटी आ छोटका बेटा मात्रे छी ।
एम्हर धिरे धिरे साउस ससुरके ममता जागए लगलै तऽ हम्मर पुतहु, हम्मर पुतहु कहि बजाबए लागल, मुदा हम नहि गेलौँ । जहिआ हमरा सहाराके आवश्यक्ता छल तहिआ कतिया देलक, आंगुर छोरा लेलक । आब हम अपने अप्पन पैर पर ठाड भऽ गेलौँ तऽ आब कोरामे उठाबए आएल कहैत हम हुनकासभसँ हाथ पैर जोइर लेलौँ । मुदा हम अप्पन सन्तानसँ दाइ बाबाक ममता स्नेह पाबएके अधिकार नहि छिनने छियै । ओसभ हम्मर बेटा बेटीसँ भेटघाट करए अबैत रहैत छथि हम रोकटोक नहि करैत छियैक ।
ई अछि शिवानी राउतक संघर्ष । हुनकर बहुतो बात हम तऽ नहि कहए सकब मुदा हुनकर एहि संघर्षके हम प्रणाम करैत छी । हुनकर संघर्षसँ अपनाके कमजोर असहाय बुुझएबाली महिलाके आत्मनिर्भर बनबाक प्रेरणा दैति अछि । एहन एहन संघर्षक कथासभ देखि हमरामे पत्रकारिताप्रतिके लगाव आओर बढैत जा रहल अछि । जतए जतए हम अन्तरवार्ता लेबए जाइत छी किछु पाठ पैढि कऽ अवश्य अबैत छी । शिवानी राउतक अन्तरवार्ता हमराले अनुभवके संग संग एकटा सिख सेहो अछि । कोनो पदपर पहुँचल, वा कोनो सामाजिक काजमे लागल महिला मात्रे नहि शिवानी राउतके देखि एकटा आम महिला सेहो बहुतोके प्रेरणा प्रदान कऽ सकैत अछि से लगैत अछि ।
