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जनकपुरधामक गीति एल्वमक इतिहास





जनकपुरधाम कलाक हिसाबसँ नेपालमे अग्रस्थानमे अबैत अछि । मुदा जखन गीती एल्वमके बात करब तऽ एहिके इतिहास ओतेक बडका नहि अछि ।
एहिठाम मिथिला नाट्य कला परिषद लगायतक नाट्य संस्थासभ नाटकके क्षेत्रमे अपन दबदबा बना चुकल छल । चारु दिस एहि संस्थासभक काजके प्रशंसा सेहो भऽ रहल छल । मुदा एकटा कमी एहि बातके छल जनकपुरधामसँ गीती एल्वमसभ नहि निकलि रहल छल । इहो सपना ३० बर्ष पहिने पूरा भेल । जखन मिथि समुह नामक संस्थाके एतुका कलाकारसभ जन्म देलन्हि । मिथि समुह वि.सं. २०५२ सालमे ‘रे छौरा तोरा बज्जर खसतौ’ नामक एल्वम निकालि कऽ अहुके इतिहासक प्रारम्भ कऽ देलक ।
‘रे छौरा तोरा बज्जर खसतौ’ ओहि समयमे पहिलबेर जनकपुरधामसँ गीती एल्वम निकलल छल जे सभकिओ बहुत बेसी पसिन कएने रहथि । ओहि एल्वममे संगितकार एवं गायक सुनिल मल्लिक, गीतकार अशोक दत्त, प्रवेश मल्लिक, गायक आभाष लाभ, गायिका रश्मी, नेहा प्रियदर्शनी सहितक कलाकारसभ अपन कलाक प्रदर्शन कएने रहथि । जाहिके चारु दिस प्रशंसा सेहो भेल छल । ओना ओ समूह ई एल्वम मात्रे निकालि कऽ नहि रुकल ।
वि.सं. २०५५ सालमे असलमे गीती एल्वमके इतिहासमे क्रान्ति आबएबला छल । ओ क्रान्ति आनएबला एल्वमके नाम छल ‘गीत घर घरके’ । इ एल्वम ओहि समयमे एहन क्रान्ति अनने छल जे सभक मुहपर इएह एल्वमके गीतसभ बैसल छल । ओना आइयो कोनो सांस्कृतिक कार्यक्रममे एहि एल्वमके गीत नहि बाजत तऽ लगैत अछि जेना ओ कार्यक्रम पूर्णे नहि हएत । जनकपुरधामसँ निकलल सभसँ सफल गीती एल्वम इएह अछि कहल जाए तऽ अतिशयोक्ति नहि हएत । तहिना ‘मैया भवानी विनती सुनु’, ‘हमर धकधकी बढैया’ नामक गीती एल्वम सेहो इएह समूहके सक्रियतामे निर्माण कएल गेल छल ।
एहिबिचमे मिथि समूह एकपर एक एल्वमसभ निकालि रहल छल । ओना मिनापक चुप्पी सेहो टुटल गीती एल्वम निकालएके मामिलामे । मिनाप जे नाट्य क्षेत्रमे अपन बर्चस्वता कायम रखने छल ओहो गीती एल्वम निकालएके मामिलामे कहाँ पाछा पड़एबला छल । मिनाप ‘लेहुयाएल आँचर’ आ ‘खोता सिंगार’ नामक एल्वमके निर्माण कएने छल ।
संस्थागत रुपसँ एल्वमसभ निकलिए रहल छल मुदा व्यक्तिगत रुपसँ सेहो गीती एल्वमसभ निकालएके काज आरम्भ भऽ गेल छल । गायक संजय यादव जे ओहि समयमे संघर्षरत छलथि ओ चान्दके टुकड़ा नामक गीती एल्वमके निर्माण कएलन्हि । जे एल्वम २०६१ सालमे निकलल छल । ओहिके बाद ओ २०६३ सालमे बाबु ले ला छाता ठेंगा(तोहर गोर गोर) गाल नामक गीती एल्वम सेहो निकालथि । एतेक गीती एल्वमसभके बाद तऽ गीती एल्वमके लहर जेना चलि गेल हुए तेना भऽ गेल । ओहिके बाद माल टनाटन छै, रसगर चहटगर, तोँ छे सभसँ नम्बर वन लगायतक एल्वमसभ निकलल । ई एल्वमसभक गीतमे गायक संजय यादव अपन आवाज देने छलथि ।
२०५० सालसँ लऽ कऽ २०६५ सालधरि जनकपुरधामक गीती क्यासेटके इतिहास देखल जाए तऽ स्वर्णिम समय छल । ओहि समयमे जनकपुरधाममे गीती एल्वमसभ अत्याधिक मात्रामे निकलल छल । मुदा ओहिके बाद जेना मानु एल्वम निकालएके होड समाप्त भऽ गेल हुए । ओना एहिके लेल लगानीकर्ताक अभाव आ लगानीकर्ताके पैसा उपर नहि हएब से मूख्य कारक रहल गायक, गीतकार तथा निर्मातासभक पीडा छन्हि । मुदा गीतसभ आबएके क्रम अखनो नहि रुकल अछि ।
पहिने क्यासेटमे निकालएके झन्झट, बाहर जा कऽ रेकर्डिङ्ग कराबएके झन्झट रहैत छल । मुदा आब जनकपुरधाममे सेहो बहुतो रेकर्डिंङ्ग स्टुडियोसभ अछि जतएसँ गीत निर्माण भऽ रहल अछि । गीत जनजनधरि पहुँचाबए लेल युट्युब सहज माध्यम भऽ गेल अछि ।