

कहिया हेतै दूर्गा पूजा ?, कहिया बनतै मूर्ति ?, कथी पर सवार भऽ औथिन दूर्गाजी ? एहि तरहक अनेक प्रश्न दूर्गा पूजा आबएसँ पहिनहि हिन्दु धर्माबलम्बीसभके मोनमे उब्जए लगैत अछि । दशमीक प्रतिक्षा हरेक उमेर वर्गक लोकके रहैत अछि । एक वर्षक प्रतिक्षा आ धैर्य बन्हने श्रद्धालु भक्तजनसभके मोन तखन आनन्दसँ विभोर भऽ जाइत अछि जखन शारदीय नवरात्री शुरु होइत अछि । शारदीय नवरात्रीक आमगनसँ आनन्दित होबएबलामेसँ हमहुँ छी ।
एकटा समय छल दशमी अबिते जनकपुरधामक एहन कोनो मन्दिर नहि बाँकी रहैत छल जतए पूजा पाठ करएसँ हम चुकैत होइ । जनकपुरधामक शक्तिपीठ तथा दूर्गा पूजा होबएबला स्थलपर घटस्थपने दिनसँ लऽ कऽ विजय दशमीधरि अवश्य पहुँचैत छलौँ । सबेरे उठि कऽ स्नानक बाद घरमे पूजा करैत छलहुँ । पूजाक बाद विभिन्न मन्दिरक लेल प्रस्थान करैत छलौँ । मन्दिरसभमे पूजा पाठ तथा दर्शनक पश्चात मात्रे दशमी अवधीमे भोजन करैत छलौँ ।
दशमीमे सभसँ नीक पक्ष हमरा ई लगैत छल क्याम्पसमे छुट्टी होइत छल, जकर फाइदा उठबैत जखन मोन होइत छल घूमए निकैल जाइत छलौँ । किछु चिजसभ अछि जे हमरा दैनिकीके दशमीमे आन दिनक तुलनामे पृथक बनबैत अछि ।
साथीसभसंगे दशमीमे घरसँ प्रत्येक साँझ दीप बारए लेल शक्तिपीठमे पहुँचब ओहिसंग घूमब जाहि आनन्दके शब्दमे वर्णन करएमे हम असमर्थ छी । माटिक दीप बना कऽ राजदेवी मन्दिर, विद्यापति चौकस्थित दूर्गा मन्दिर, बौद्धी मन्दिर, अन्नपूर्णा मन्दिर, राम मन्दिरसहितक मन्दिरसभमे दीप बारए अवश्य पहुँचैत छलौँ ।
एहिसभसँ बेसी दशमीक मेला हमरा आकर्षित करैत अछि । मेलामे आएल झुलासभ तऽ हम्मर आनन्दक उडानके पाँखि दऽ दैति अछि । अर्थात हम झुलाके देखि अपनाके रोकि नहि पबैत छी । प्रत्येक वर्ष दशमीक मेलामे आएल झुला संगीसभसंगे झुलएके नहि छोडैत छी ।
दशमीक चर्चा हुए आ झिझियाक चर्चा नहि हुए किनहुँ नहि भऽ सकैत अछि । झिझिया मिथिलाक लोकनृत्यसभमेसँ सभसँ प्रसिद्ध नृत्य अछि । कहल जाइत अछि ई नृत्य डायन जोगिनके टोना टापरसँ अपन सखा सन्तानक संगे परिवारक रक्षाक लेल कएल जाइत अछि ।
प्रत्येक राति मन्दिरसभमे दशमीक समयमे झिझिया नृत्यक आयोजना कएल जाइत अछि । जाहिसँ निर्माण होबएबला अदभूत वातावरण हमरा तऽ आकर्षित करबे करैत अछि संगै अन्य श्रद्धालुसभ सेहो अपनेआप खिचैत चलि जाइत अछि ।
दशमी अन्तिम आकर्षणके रुपमे रावण बद्धमे सेहो हम सहभागी होइत आएल छी । जनकपुरधामस्थित राम मन्दिरक आगामे रहल धनुष सागर पोखरिके मोहारपर रावण बद्ध कार्यक्रमक आयोजना कएल जाइत अछि । जे देखबाकले हजारौ श्रद्धालुके भीड़ लागल रहैत अछि । मुदा हम पातर छितर छि ओहिके बहुतो घाटा त अछि मुदा एहन एहनमे फाइदा उठबैत आएल छी । केहनो भीड़ रहैत छल तऽ रावण बद्ध देखबाक लेल बेकल रहैत छलौँ । असत्य उपर सत्यके विजयक दृश्य अपना नजरिसँ आन आन वर्ष देखैत आबि रहल छलौँ ।
दशमीक ई उमंगमे सरावोर रहबाक मोन प्रत्येक वर्ष होइत रहैत अछि, मुदा समय एकहि रंग कहाँ रहैत अछि । समयक गतिसंग दिनचर्यामे सेहो बदलाव आनए पड़ैत अछि । कहल जाइत अछि ने समयके आगा सभकिओके झुकहिटा पड़ैत अछि । इएह स्थिति हमरोसंग अछि एहि बेर ।
किछुए महिना भेल पत्रकारितामे प्रवेश कएला । पत्रकारिताक विभिन्न रंगसँ धीरे धीरे परिचित भऽ रहल छी । इएह पत्रकारिता हमरा जीवनमे व्यस्तताक वर्षा कऽ देने अछि । कहादन जखन सभकिओके छुट्टी रहैत अछि तखन पत्रकारसभक व्यस्तता आओर बढैत जाइत अछि । सभकिओ पूजापाठसंगे मेला घूमएमे व्यस्त रहैत छथि आ संचारकर्मीसभ हुनकरसभक आनन्दक विश्लेषण आ दशमीसँ सम्मबन्धित समाचार अपना क्यामरामे कैद करएमे व्यस्त रहैत छथि । वएह हमरोसंग अछि । हमहुँ आई काल्हि समाचारक खोजीमे रहैत छी दिनभरि । ताहुमे अखन नवप्रवेशी छी तऽ कनी बेसीए काज करए पड़ैत अछि । मुदा ईहो हमरा जीवनमे एकटा बढियाँ पाठ सिखा रहल अछि । जे आबएबला दिनमे बढियाँ स्मृतिसभमेसँ एक रहत । ओना आन आन बर्षक दशमीक स्मृतिके संजोगि कऽ कर्मक्षेत्रमे लागब एकरो एकटा अलग्गे आनन्द अछि । आबएबला दिनमे पत्रकारिता सिखए आ करएके क्रममे भोगल अनुभव सेहो साझा करैत रहब से वचनवद्धताक संग अपन लेखनीक आई एतहि विराम दैति छी ।
