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मैथिली कविताः कला





♦ अयोध्यानाथ चौधरी

सुन्दर चित्र देखि मोन हुलसित , कलाकार पर जाइत अछि ध्यान
ज्ञात रहथु , अज्ञात रहथु ओ , सभक हृदय भरि जाइछ सम्मान।
पाथर , कागत आर काठपर , चित्रकार बनबैत छथि सुन्दर चित्र
अद्भुत लिखिया , अनुपम नक्कासी , सब रंगक आर चित्र- बिचित्र ।
अजन्ता आर एलोराक गुफा चित्र सब , पर्यटकक ध्यान करय आकृष्ट
मिथिला चित्रकला बना लेलक अछि विश्वमे अपन स्थान विशिष्ट।

माटिक मूर्ति हो बा संगमरमरक हो , आकृष्ट करैछ ओ सबहक ध्यान
किछु क्षण दर्शक आत्मबिभोर भेल, हेरा जाइछ जेना ओकर ज्ञान।
दुर्गा , सरस्वती , कृष्ण आदिक पूजा पर, रंग-बिरंगक मूर्ति अनूप
दर्शकक मोन स्वयं आह्लादित, जादू कय जाइछ अनुपम रूप।
संगमरमरक त’ बाते नहि हो , अपूर्व छटा , अनुपम हाव – भाव
मन्दिर प्रवेश करितहि भक्त पर , पडि जाइछ अद्भुत, पुण्य प्रभाव।

नव- निर्मित राम- मन्दिर लखि जे अनुपम नक्कासीक अछि प्रमाण
भक्तियोग आ भक्तिभाववश , बाजि उठैछ सब जय श्री राम ।
वास्तुकलाक उत्कृष्ट उदाहरण, ताजमहल आश्चर्यक खान
कोन कम अछि लालकिला , कुतुबमीनार आ अक्षरघाम !
जनकपुरक जानकी मन्दिर अछि विश्वप्रसिद्ध आ अपन पहिचान
विश्व सम्पदामे सूचीकृत पशुपतिनाथकेँ के नहि जान !

गीत-संगीतक बात नै पूछी , स्मरण करी बैजू आ तानसेन महान
दीपक राग सँ दीपक जरय , मल्हार सँ बरखाक होइत छल संधान ।
भारतीय शास्त्रीय गायन केर छै विश्वमे स्थापित विशिष्ट अपन नाम
विदेशी संगीतप्रेमी लोकनि विशेष अध्ययन हेतु प्राय: आबथि एहिठाम।
आधुनिक हिन्दी फिल्मी गीतक क्षेत्रमे लता मंगेशकर आ रफी महान
नेपालोक नारायण गोपाल आ भक्तराजक अछि विशिष्ट पहिचान।

सुन्दर कविताक धारमे बहि कय , श्रोता करथि परम आनन्द स्नान
जहाँ न जाए रवि , वहाँ जाए कवि ,सर्वविदित उक्ति ई के नहि जान ?
साहित्यक अनेक विधामे , सबसँ लोकप्रियमे कविता केर नाम
कविता कला अगम छै निश्चय, तैं कवि पाबथि मान- सम्मान।
साहित्य, संगीत आ कला – एहि तीनूमे अन्योनाश्रय सम्बन्ध
खूब बिचारि कय जौं देखब त’ पायब एकटा स्थायी अनुबन्ध।

नर्तकीक सुनृत्य निरन्तर , देखबालए बाल – बृद्ध सब रहथि हरान
नृत्यकलासँ जुड़ल अछि भरतनाट्यम, कथक आ अनेक नाम।
मिथिलांचलमे प्रचलित झिझिया , डोमकछ आर सलहेस
दुर्गापूजाक अवसर पर झिझिया नाचक उत्साह बिशेष
नाटक आ सिनेमाक त’ बाते नै हो , लोकप्रिय ई सकल जहान
नामी कलाकार देखबाक बास्ते , रहै छथि सब तजने प्रान ।

सुभोजन ककरा नै चाही , मुदा छैक अपेक्षित पाककलाक ज्ञान
मिथिलाक भोजन बड्ड नामी , गरीबो जनै छथि कुटुम्ब सन्मान ।
नबका पर फोटोग्राफी अछि जोरायल , एकरो छै अपन अलगे शान
गाम- शहर सब ठाम स्टुडियो , सुन्दर फोटोक नै छै अन्त ठेकान ।
एहि तरहें ई कलाक भेद अछि , लाखों लोक एहिमे संलग्न निर्माण
कला – पारखी घूमि – घूमि देखथि , ब्यापक अछि एकर बितान ।

कला कोनो हो , कलाकार सब होइत छथि निश्चय प्रतिभावान
मुग्ध भेल हम कतेक पारखीकेँ देखैत रहैत छी करैत प्रणाम।
कला शब्द एतेक अछि ब्यापक, सब परिभाषा रहैछ अपूर्ण
कोनो ने कोनो पक्ष छूटल जौं , कोना क’ मानबै ओकरा पूर्ण।
साहित्य, संगीत आर कलाक अभावमे मानव जीवन होइछ अपूर्ण
आनन्द ,स्नेह आर शान्तिक अनुभूतिसँ जीवनकेँ करी हम पूर्ण।