

आई नेपालभरि तीज पाबनि मनाओल जा रहल अछि । कोनो समयमे पहाडमे मात्र सीमित यी पाबनि आब मिथिलानी महिलासभमे सेहो व्यापकता पाबि रहल अछि । पछिल्ला किछु वर्षसँ तऽ जनकपुरधामक चौक चौकमे महिलासभ नाचगानक कार्यक्रम सेहो रखैत आबि रहल छथि । जनकपुरधामक गणेश युवा कमिटीक प्राङ्गणमे तऽ तीजक रंगमे रंगाएल महिलासभके भीड़े लागल रहैत अछि ।
कतेको गोटेके तर्क छन्हि तीज मिथिलाञ्चलक लेल आयातित परम्परा अछि । ओना मिथिला अपने पाबनि तिहारसँ भरिपूर्ण अछि । एहनमे अपन संस्कृतिके संरक्षणक दिशामे काज करएके सट्टा दोसरठामक संस्कृतिके नक्कल किए ? तीज अहुठाम मनाओल जा रहल अछि ओहिमे हमरा कतहुँ विमति नहि अछि । मुदा आधुनिकताक नाम पर या कही तीजक नामपर बढल विकृतिके नक्कल करब हमरा अहाँक समाजके लेल कतेक उचित छैक यी छलफलक विषय भऽ सकैत अछि ।
जे जेना अखन हिमाल, पहाड तथा तराई नेपालक हरेक क्षेत्रमे तीजक लहर अछि । तीजके लऽ कऽ महिलासभमे उत्साह देखए लायक अछि । जनकपुरधामक कपड़ा दोकान, कस्टमेटिक दोकान, ब्युटी पार्लरसभमे एक दिन पहिनहिसँ महिलासभके भीड़ लागल छल । ओना महिलासभ एक महिना पहिनहिसँ तीजक तैयारीमे जुटि जाइत छथि । लाल सारी, लाल चुरी, टिकली, श्रृंगारक समानमे एहन सजल रहैत छथि जेना नवकनिया । पहाडी समुदायक महिलासभक लेल तीज बडका पाबनि त अछिए मुदा आब आबि कऽ मिथिलानी महिलासभमे सेहो एहि पाबनिके लऽ कऽ अलग्गे उमंग देखबामे अबैत अछि । स्कुल, बैंक, सरकारी तथा गैरसरकारी कार्यालयसभमे तीज आबएसँ पहिनहि गीतनाद, नृत्य, खानपानक कार्यक्रम राखल जाइत अछि ।
तीज पाबनि महिलासभ अपन सोहागक लेल करैत छथि । सोहागक रक्षाक कामना संग मनाओल जाए बला एहि पाबनिमे पतिके गरियाओल आ अश्लिल गीतसभपर नृत्य करैत महिलासभके सहजहि देखल जा सकैत अछि । ओतबी ओ नृत्यके गर्वपूर्वक सामाजिक सञ्जालमे पोस्ट करएसँ पाछा सेहो नहि हटैत छथि ।
अतेक पवित्र पाबनि अपन परिवार तथा टोल समाजक रमनचमन छोइड़ कऽ बड़का बड़का होटेलसभमे आयोजन होबएके आब धीरे धीरे शुरु भऽ गेल अछि । तीज पाबनिके पूर्व सन्ध्यामे दर खाएके परम्परा सेहो अछि । मुदा दर खाएके नामपर मांश मदिरा खाएब कति उचित ? कि यी तीजक परम्परामे अबैत अछि ? पक्के नहि ।
समान अधिकार आ समान प्रतिनिधित्वक बात जोडतोडसँ उठैत अछि । नेपालमे अधिकार प्राप्तिक मामिलामे संसारभरिमे अग्रणी स्थानपर अछि । यी अलग विषय अछि जे महिलासभके अखनो संरक्षणक आवश्यक्ता अछि । मुदा अधिकारक नामपर एहि प्रकारक दुरुपयोग हएब नेपाली तथा मिथिला समाजक लेल चिन्ताक विषय अछि । स्वतन्त्रताक नामपर उच्छृंखलताके कहिओ उचित नहि ठहराओल जा सकैत अछि ।
एहिके एकहिटा समाधान अछि तीजके तीजे रहए देल जाए । एकरा मनोरञ्जनक वस्तु नहि बनाओल जाए । तिजमे पश्चात्य संस्कृतिके मिश्रण नहि घोलल् जाए । हम तऽ कहब तीज जे नेपाली समाजमे पहिने मनाओल जाइत छल ओहिना मनाओल जाए । तीजके पुरनके स्वरुपमे घुराबएके जिम्मा महिलेसभके हएबाक चाही ।
